00:00श्रद्धा शतम, जीवें श्रद्धा शतम, शुड़याम श्रद्धा शतम, हम सौ वर्षों तक स्वस्त रहें, दिखें, सुनें और सुप्पूर्वक जीवन व्यतीत
00:09करें, इनी मंगल कामनाओं के साथ प्रमानिनी राश्पती मौद्याजी समस्त तरिकन दीप प्रचलित कर
00:16रहे हैं, जले दीप तो हर घर में विश्वास डगे, आरोगय का नव उजास डगे, ज्यान
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