Dhoomketu
An engraved murder weapon and two unidentified fingerprints provide JP his first solid lead. With 48 hours to show progress, he rushes to identify the sword's owner and the perpetrators.
#Raakh
#Raakh2026
#Raakhfullseries
#Raakhwebseries2026
#Raakhseriesondailymotion
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Short filmTranscript
00:00दोस्तो आज हम ऐसी रॉंग्टे खड़े कर देने वाली psychological thriller और murder mystery की कहानी explain करने वाले हैं
00:05जो आपको शुरू से अंत तक बांद का रखेगी
00:08कहानी की शुरुआत दिल्ली में दो मासूम भाई बहन के बेहद बेहरैमी से हुए murder से होती है जिसके बाद
00:14पुलिस महकमे में हरकम पमच जाता है
00:16इस से उलजे हुए केस को सुलजाने के लिए सब इंस्पेक्टर जै प्रकाश को जिम्यदारी दी जाती है जिसके पास
00:21कातिलों तक पहुँचने के लिए सिर्फ एक आखरी रात का वक्त है
00:24जैसे जैसे जाच आगे बढ़ती है
00:26फॉरंजिक लैब से लेकर बॉमबे और सोनी पत के तार जुड़ते हैं
00:30और सामने आते हैं दो ऐसे खूंखार साइकोपैट अपराधी जो पहले भी कई वारदातों का अंजाम दे चुके हैं
00:36कार के अंदर बच्चों का खौफनाक स्रंगर्स, मर्डर वेपन के पीछे छुपा पुराना राज, अपनों की गद्दारी और रॉंग्टे खड़े
00:42कर देने वाला सस्पेंस
00:43आखिर उस काली तुफानी रात को जंगल के अंधेरे में उन बच्चों के साथ क्या हुआ था
00:47और जैप्रकाश अपनी नौकरी दाओं पर लगा कर कातिलों को कैसे दबोशता है
00:51चलिए देखते हैं पूरी कहानी
00:53कहानी के शुरुआत होती है सुमन और साहिल मदलब दो भाई बेहन को दिखाते हुए
00:58जो स्कूल में पढ़ाई करते हैं
00:59उम्र का फासला सिर्फ दो साल का है
01:01पिता आर्मी में लेफटेनेंट करनल है और मा स्कूल टीचर है
01:04सुमन बहुत अच्छा गाना गाती है
01:06आज रेडियो पर उसके गाने का प्रोग्राम था
01:08लेकिन समय पर नहीं पहुँच पाने के कारण
01:10उसका स्लोट उसकी सहेली को दे दिया जाएगा
01:13जिस वज़े से सुमन जल्दी जल्दी तयार हो रही थी
01:16जाते समय सुमन की मा मोना ने
01:18सुमन को अपनी गोल्द की इयरिंग्स की जोडी पहना थी
01:20उनके पिता उस समय घर पर नहीं थे
01:22इसलिए सेफटी के लिए मोना ने साहिल को सुमन के साथ जाने के लिए का है
01:26इसके बाद दुनों भाई बहन तयार होकर रेडियो स्टेशन के लिए निकल जाते हैं
01:29प्रोग्राम शाम साथ बज़े है
01:31इसलिए उनके पिता अशोक घर लोटते ही
01:33अपने सहकर्मियों को कॉल करके बता रहे थे
01:35कि आज साथ बज़े मेरी बेटी रेडियो पर गाना गाएगी
01:38लेकिन प्रोग्राम शुरू होता है
01:40सुमन की सहेली के गाने से
01:41अशोक और बाकी सब सोच रहे थे
01:43कि सुमन को शायद बाद में गवाया जाएगा
01:46लेकिन सुमन के बिना ही प्रोग्राम
01:47खत्म हो जाता है
01:48मोना के मताबिक सुमन तो किसी भी तरह
01:51प्रोग्राम मिस्करने वाली नहीं थी
01:52और कहा भी था लेट होने पर उसका
01:54slot sahili ko dhe dhya jayega
01:56ashok bhi samaj ni pa raha tha
01:58ke unho ne aisa kuyun kiya
01:59is liya ashok mona ko dinner taiyar rakhne ko bholkar
02:02suman or sahil ko lene ke liya
02:04radio station chalye jate hai
02:05jahan suman ki classmate بتati hai
02:07ke hem to shaman se suman ka indhazar kari rathen
02:09suman or uska bhai nahi nahi ane ke karan
02:11mjboor hokar mujhe gana pada
02:13iska matlab suman or sahil
02:15yaha pahunche hi nahi
02:16office bhi bendh ho gya hai
02:17to suval ye hai ke dhunho bhai bhai bhai n kaha gaya
02:19ashok te suman ki sahiliyong ke ghar
02:21call karke pata lene ko bolta hai
02:23iske baad ek taraf mona sab ko call
02:25kalti jari thi
02:26اور dhusti taraf ashok skuti lhe kar
02:28sardko par bieťe aur bieťi ko dhundtay
02:30fir raha thien
02:31اور yahaan átahe sabse bada sawal
02:33kia ashok apne bachyo ko dhundh pahengue
02:34nahi milnay par wo kaha gaya
02:36اور asal me bhai bhai bhai n ke sath
02:38kya hua tha
02:38abh samay hai 1978 ka
02:40scene hai dhilli ka
02:41ghan sham naam ke retired constable
02:43ko dhkhaja jata hai
02:44bieťe ke liek khana bana kar
02:46thhanay me ai hai
02:47اور yahe ghan sham ka bieťa jay prakash
02:49joh is thhanay ka asi ke pad par hai
02:51aghe jay prakash ka promotion ka exam
02:53tha
02:54isle jay us exam ke liye
02:55tiyari kar raha tha
02:56اور ghan sham ke bare me
02:58ek baad bata dung
02:59ghan sham na 30 sal constable
03:00ke roope me naukri ki hai
03:02jay baut chhota tha
03:03jab uski maa
03:03is dunia ko chhoڑ kar chalhi gai
03:05اور uske baad se ghan sham
03:06hi hemiesha khana banaate hai
03:07unke haat ka khana baut achcha hai
03:09اور unki haat ki
03:10mutten kari sab ko phasan dhati hai
03:12isle kubhi kubhi
03:13wu mutten kari bana kar lhe kar aate hai
03:15jisai jay ke saath
03:16thhanay ke dhustre sabhi
03:17log baut mazhe lhe kar khaate hai
03:19lakin áj khana ke bich
03:20hi suman aur sahil ki
03:21guayab honne ki shikayat aati hai
03:23torant hi jay
03:24jay apni team ko lhe kar
03:25suman ke ghar pahun jata hai
03:26jay wahan pahunc te hi
03:27jana pahata hai
03:28کہ guayab bacho ke pita
03:29ya ne ashok
03:30ek lieutenant karnel hai
03:31isle jay case
03:32bauti sensitive hai
03:33jay pehle ashok se
03:35mulaqat karta hai
03:35mona batathi hai
03:36کہ دونوں
03:37sham sarae 4 baje
03:38radio station ke liye
03:39niklet hai
03:40lag bhaag sarae 4 ghande
03:41biedh gaya hai
03:42abhi tak unka
03:42koi surag naihi
03:43ashok kahi bhi
03:44unka pata nai laga pahe
03:46mojbore ho kar
03:46polis ko batana pada
03:47aur aisa kabhi nai hua
03:49woh bina batai
03:50kabhi kahi nai jate hai
03:51jay pehle unki
03:52photo maangta hai
03:53saath hi
03:53jab sham ko
03:54woh niklet hai
03:55to koon sa
03:55kapda pahana tha
03:56sari detail
03:57se khattaya kardta hai
03:58jay ye bhi
03:59jana chah raha
04:00tha ki
04:00unke jane ke baad
04:01ghar se koji or
04:02chiz gaib hui thi
04:03ya nai
04:03asal me jay
04:04apna bas
04:04procedure follow
04:05kar raha tha
04:06kyunki sarae angle
04:07se usai janche
04:08karni hoti hai
04:08lekin shuruwaati
04:09tawar par
04:10jay anandazah
04:11laga raha tha
04:11ki unke
04:11shayad unhye
04:12kidnap kiya
04:13jasakta hai
04:13iso lehi
04:14kisi bhi
04:14samayi
04:15shayad
04:15kidnapar
04:16ka call
04:16aisho ka
04:17kena hai
04:18kye bacho
04:18ko vaapas
04:19pane ke
04:19liye kisi
04:20bhi
04:20demand
04:20par
04:21woh
04:21tiyar
04:21hai
04:21lekin
04:22isi bich
04:22hospital
04:23se call
04:23ane
04:24pere
04:24ashok
04:24or
04:25baqi
04:25sapturant
04:25hospital
04:26chalye
04:26jate
04:26hai
04:27jahe
04:27accident
04:27me
04:28marre
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04:29ki
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04:31chek
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04:31te
04:31que
04:31sahil
04:32ya
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04:33koji
04:33bhi
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04:33iska
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04:35unke
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04:41khoj chukai
04:41hai
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05:26kuch
05:30kuch
05:33kuch
05:35kuch
05:36रजो चला जा रहा था तभी बाबू से रोक लेता है और समझाता है कि असल में उन्हें अपने करियर
05:41पर फोकस करना चाहिए कुछ ऐसा करना होगा जिसे वो दोनों जल्दी बड़े आदमी बन सकें इसलिए बाबू रजो से
05:47कहता है कि सब कुछ मेरे ऊपर छोड़ दे और दे
06:06धर चुका है और अब वो ये सब काम नहीं करता है हलाकि वो बिर्चू नाम के एक आदमी के
06:10बारे में बताता है जो बच्चों को किड्नैप करके देश से बाहर बेच देता है उसका अड़ डा पास के
06:15ही एक जंगल में है जो ठीक रेडियो स्टेशन के एक दम पास में ही है �
06:19इसलिए जैप्रकाश अंदाजा लगाता है कि उस जंगल की तलाशी लेने पर शायद बच्चे मिल सकते हैं पुलिस थाने से
06:25हतियार जरूरी सामान और डॉक स्कौाड लेकर रात के वक्त ही जैप्रकाश जंगल में सर्च ऑपरेशन शुरू कर देता है
06:32सीन फिर से बॉंबे
06:50जैसे ही वो घर के अंदर जाते हैं वहाँ उन्हें एक बुजर्ग आदमी दिखाय देता है जिसकी उन्होंने उमीद ही
06:56नी की थी इसले पहले वो दोनों उस बुजर्ग को बान देते हैं और घर का कीमती सामान पैक करने
07:01लगते हैं तब ही अचानक कुछ आवाज सुनकर र�
07:16केला नहीं था उसने कार की पिछली सीट पर एक छोटे बच्चे को बांद का रखावा था असल में वो
07:21बच्चा उसी बुजर्ग का पोता था बाबू कहता है घर का समान चोरी करके उन्हें कितने पैसे मिलेंगे लेकिन इस
07:27छोटे बच्चे को गिड़ना परके इसके पिता
07:42में जहां जैपरकाश अपनी फोर्स के साथ जंगल में तलाशी ले रहा था इसी बीच बहुत तेज बारिश होने लगती
07:48है जिसकी वज़े से तलाशी का काम ठीक से होनी पा रहा था तब ही कंट्रोल रूम से खबर आती
07:53है कि बच्चों को शाम के वक्ट केंटोनमेंट के आ
08:12दजार कर रहे हैं और इसी तरह पूरी रात गुजर जाती है अगली सुबा एक आदमी जंगल के रास्ते से
08:17अपनी भेड़े लेकर जा रहा था तब ही उसे सुमन और साहिल की कटी फटी खून से लटपत लाशे दिखाए
08:23देती हैं खबरे मिलते ही पुलीस मौके पर पहु�
08:40ठीक वही पास में सुमन का डुपट्टा और साहिल के खून से सने हुए जूते मिलते हैं साथी एक कार
08:46का रियर व्यू मिरर भी मिलता है चश्म दीदों ने बताया कि उन्होंने बच्चों को आखरी बार स्कूटी पर देखा
08:51था लेकिन इस शीशे के मिलने से लगता है कि य
09:10पुलिस को अब तक हत्या में इस्तेमाल किया गया हत्यार नहीं मिला और तलाश अभी भी जारी है जैप्रकाश का
09:16मानना है कि ये कोई मामुली किड्नैपिंग का केस नहीं है क्योंकि अगर किड्नैपिंग होती तो वो मोटी रकम वसूलने
09:21के लिए बच्चों को जिन्दा र
09:41पूरी तरह टूट जाते हैं जबके चश्मदीदों ने लाल रंगी स्कूटी की बात कही थी इसलिए पूलिस शहर के उन
09:49सभी सिख लोगों को ठाने लाकर पूछता शूरू करती है।
10:37conference
10:46conference
11:37conference
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11:41conference
11:41conference
11:44conference
11:45He asked me to ask for a question.
12:15He said that he said that he would have 2,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000
12:19,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000
12:22,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000
12:23,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000
12:24,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000
12:30,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,000,
12:39जैप्रकाश को बताते हैं कि बच्चों पर किसी चूटी चूरी से नहीं बलके किसी भारी चीज़ जैसे के तलवार से
12:45हमला किया गया था.
12:46डॉक्टर का ये भी मानना है कि बच्चों को कहीं और मार कर लाशों को यहां लाकर फेका गया था,
12:51क्योंकि घसीटिने की वज़े से सहिल की बॉड़ी पर कई जगा रगड के निशान थें
12:55वहीं सुमन की मौत सिर पर किसी भारे लोहे की रौड से वार करने के कारण हुई थी
13:00अब ये देखना बागी था कि क्या सुमन के साथ कोई सेक्शॉल असॉल्ट हुआ था या नहीं
13:04इसके अलावा क्राइम सीन से जो कार का जो रियर व्यू मिरर मिला था
13:08उस पर हरे रंग के पेंट के कुछ अंश मिले थें
13:10इसका मतलब साब था के कार पका हरे रंग की थी
13:30इसके पिता घंशाम स्पी को मटन करी खिला रहे थें
13:33ये कोई नई बात नहीं थी जब घंशाम नौकरी में थे
13:35तब से ही सीनियर्स को खोश रखना उनकी आदत थी
13:38लेकिन जैप रकाश को ये बिलकुल पसंद नहीं आता
13:40क्योंकि उसे लगता है कि उसके पिता सीनियर्स की चापलूसी करके
13:44उनका फेवर पाना चाते हैं
13:45तब ही स्पी जब प्रकाश को बताते हैं कि आई जी ने उन्हें बुलाया था
13:49और इस केस को लेकर उन पर बहुत उपर से दबा बनाया जा रहा है
13:52इसलिए कल से इंस्पेक्टर चोहान इस केस के जिम्यदारी समालेंगे
13:56इंस्पेक्टर कहता है सर मैंने सिर्फ 24 गंटे के अंदर इतनी सारी चीज़े ढून निकाली है
14:00यहां तक के कार का रंग भी पता कर लिया
14:03लेकिन स्पी बोलते हैं यह काफी नहीं है
14:05कार कहा है और अभी तक मर्डर वेपन भी नहीं मिला
14:07सरकार और जनता सिर्फ रिजल्ड चाती है प्रोग्रस नहीं
14:10वो आगे कहते हैं कि जो इस काम के लायक है उसे ही करने दो
14:14इसमें क्या दिक्कत है
14:15हाला कि एस भी जैप्रकाश की तकलीफ समझ रहे हैं
14:32शाम को पुलिस के चंगुल से किसी तरह बच कर लोटने के बाद बाबू गुसे में
14:36जिम्मी को मारने के लिए दोड़ता है क्यूंकि उसका माना था कि जिम्मी के पिता ने
14:39उसके साथ डबल गेम खेला था
14:41लेकिन रज्जो किसी भी कीमत पर जिम्मी को हाथ तक लगाने ने देता
14:45इस बात को लेकर दोनों के बीच हाथा पाई और मार पिट शुरू हो जाती है
14:48गुसे में आकर बाबू एक बोतल उठाकर रज्जो के सिर पर दे मारता है
14:52जिसे गुसा होकर रज्जो उसका गला दबा देता है
14:55बाबू को समझ आ जाता है कि वो ताकत में रज्जो से जीत नहीं पाएगा
14:59इसलिए वो हार मान लेता है ठीक है अब से रज्जो जो कहेगा वही होगा
15:03और वो उस बच्चे को कुछ नहीं करेगा
15:05इस शर्थ पर रज्जो उसे छोड़ देता है
15:07लेकिन जिम्मी इस सबसे इतना जादा डर गया था कि वो रोते वे लगातार बोल रहा था
15:12कि मुझे छोड़ दो मुझे कुछ मत करो
15:13बाबू से चुप कराने की कोशिश करता है
15:16लेकिन वो छोटा बच्चा था और बहुत गहरे खौफ में था
15:19आखरकार बाबू अपने गुस्से पर काबू नहीं रख पाता
15:22और पास रखी एग तेज चाकू उठाकर जिम्मी की हत्या कर देता है
15:26खून करने के बाबू को होश आता है कि उसने कितनी बरी गलती कर दी
15:30वो रज्जों के सामने रोते वे कबूल करता है के गुसे में उसका दिमाख काम नहीं करता
15:34और वो खुद को कंड्रोल नहीं कर पाता
15:36वो जान बुचकर ऐसा नहीं करना चाता था
15:38लेकिन अब जब मर्डर हो चुका है तो वो कभी भी पकड़े जा सकते हैं
15:41इसलिए वो तैय करते हैं कि जितनी जल्दी हो सके उन्हें ये शहर छोड़ कर भागना होगा
15:45यहां प्रेजन्ट में उस रिपोर्टर निसार को दिखाया जाता है
15:49रात के वक्त जब वो हॉस्टर लोड़ती है तो देखती है कि जैपरकाश वहां उसका इंदजार कर रहा था
15:54यहां पता चलता है कि जैपरकाश और निसार काफी समय से रिलेशन्शिप में हैं
15:58एस पी इस केस की जिमेदारी इंस्पेक्टर चौहान को दे रहे हैं
16:02इस वज़े से जैपरकाश का दिल बहुत छोटा हो गया है और उसका मन काफी खराब है
16:06इसी वज़े से वो निसार से मिलने आया था
16:08जैपरकाश अपनी सारी बाते निसार के साथ शेयर करता है
16:11उसके हाथ में अब सिर्फ आज की आखरी रात बची है
16:14क्या एक रात में केस सॉल्फ करना मुम्किन है
16:16लेकिन जैपरकाश वैसला करता है
16:19जब उसने इस केस के पीछे इतनी महनत की है
16:21तो एक रात और सही
16:22एक रात और महनत करने से क्या बिगर जाएगा
16:25इसलिए जैपरकाश अपनी जेब से सुमन और साहिल की
16:28K
16:32K
16:33ڈیوی فوٹو چھاپے تاکہ لوگ ان بچوں کا یہ مسکراتا
16:37و چہرہ ہی یاد رکھیں دوسری طرف اپنے دونوں
16:39بچوں کو کھونے کے بعد مونا کی دماغی حالت
16:42بہت خراب ہو چکی تھی جیسا کہ پہلے بتایا تھا
16:44وہ بہت صدمے میں چلی گئی تھی اسے اس بات پر
16:47بلکل یقین نہیں ہو رہا تھا کہ اس کے دونوں بچے
16:50اب اس دنیا میں نہیں ہیں وہ گھر پر بیٹھ کر
16:52چپ چاپ سکول کے بچوں کی ایکزام کامپیز چیک کر رہی تھی
16:55اسے دیکھ کر کوئی اندازہ بھی نہیں لگا سکتا
16:57کہ اس کے دو بچوں کا اتنی بہرہمی سے مرڈر ہوا ہے
17:00ادھر جائے پرکاش رات کے وقت
17:02اکیلا ہی اسی مرڈر سپورٹ پر جاتا ہے
17:04کیونکہ اسے امید ہے کہ اگر اس آخری رات میں
17:07اسے کوئی نیا سراغ مل جائے تو بات بن سکتی ہے
17:09وہاں چھپ کر وہ دیکھتا ہے کہ بچوں کے پتا
17:11کرنل اشوک بھی وہاں اکیلے کھڑے ہیں
17:13اشوک اپنے بچوں کو کھوچ چکے ہیں
17:15اور بہت دکھی ہیں
17:16اشوک کہتے ہیں کہ یہ اتنی سنسان اور شانت جگہ ہے
17:19کہ یہاں میرے دونوں بچے درد سے چلائی ہوں گے
17:22لیکن ان کی آواز کسی کے کانوں تک نہیں پہنچی
17:25اشوک کے جانے کے بعد جائے پرکاش
17:26جب اپنی جیپ لے کر لوٹ رہا ہوتا ہے
17:28تو بہت تیج بارش ہو رہی تھی
17:30اچانک جیپ کے سامنے ایک ہیرن آ جاتا ہے
17:32جائے پرکاش جیسے ہی جوڑ سے بریک مارتا ہے
17:35اس کی نظر پاس کے جنگل میں جاتی ہے
17:45اس کا مطلب بچوں کا خون کرنے کے لیے
17:48اسی کار کا استعمال کیا گیا تھا
17:50جب اس کار کو فورنسک لیب لائی جاتا ہے
17:52تو جانچ میں کار کے اندر
17:53چار لوگوں کے فنگر پرنٹ ملتے ہیں
17:55ان میں سے دو فنگر پرنٹ تو انہی دونوں بچوں کے تھے
17:58لیکن باقی کے دو فنگر پرنٹ میں سے
18:00ایک آدمی کے ہاتھ کا فنگر پرنٹ بہت ہی دھندلا تھا
18:02جس کا کار ان سمجھ نہیں آرہا تھا
18:04کار کے اندر جو خون ملا
18:06اس کی ریپورٹ آنے کے بعد ہی پتا چلے گا
18:08کہ وہ خون کس کا ہے
18:09یہ تو صرف کار کی بات تھی
18:11پولیس کو اس کار کے اندر مرڈر ویپن بھی مل جاتا ہے
18:14وہ ہتیار بریٹیج زمانے کی ایک پرانی تلوار تھی
18:16جس کے اوپر اس کے مالک کا نام بھی لکھا ہوا تھا
18:19شری موہن لال سوڈھی
18:20اب تک کے کیس میں یہ سب سے بڑی لیڈ تھی
18:22کیونکہ جائے پرکاش نے صرف ایک رات کے اندر
18:25اتنا بڑا سراغ ڈھونڈ نکالا تھا
18:36اور دے دیتے ہیں
18:36سین اب اس گھٹنا سے چار دن پہلے کا دکھایا جاتا ہے
18:40جہاں بابو اور رجو بومبے سے
18:42اس کانڈ کے بعد وہاں سے بھاگ کر دلی آ چکے ہیں
18:44وہ یہاں کے ایک آشرہ میں بیٹھ کر کھانا کھارے ہوتے ہیں
18:47رجو گور کرتا ہے کہ بومبے میں چھوٹے بچے
18:50جیمی کا مرڈر کرنے کے بعد بھی
18:52بابو ایک دم نورمل بیہیف کر رہا تھا
18:54جیسے کہ اسے کوئی فرق ہی نہیں پڑا
18:55کہ اس نے کیا کیا ہے
18:57تب بابو رجو کو سمجھاتا ہے
18:58کہ بچپن سے ہی اسے بہت زیادہ گصہ آنے کی بیماری ہے
19:01وہ اپنے پتا کو تو جانتا بھی نہیں ہے
19:03اور اس کی ماں آگ میں جل کر مر گئی
19:05اس حادثے میں بابو کا ایک ہاتھ بھی بری طرح جل گیا تھا
19:08یہاں ہمیں سمجھ جاتا ہے
19:10کہ اس کار کے اندر جو فنگر پرنٹ دھندلا تھا
19:12وہ دراصل بابو کا ہی تھا
19:13کیونکہ اس کا ہاتھ جلا ہونے کے کارن
19:15اس کی ہتیلی کے نشان کار پر صاف نہیں چھپے تھے
19:18اس کا مطلب صاف ہے
19:19کہ سومن اور ساحل کے مرڈر کے پیچھے
19:21پکا بابو اور رجو کا ہی ہاتھ ہے
19:23بابو اپنے عطیت کی یہ کہانی سنانے کے بعد
19:26رجو سے وعدہ کرتا ہے
19:27کہ وہ اب سے سدھر جائے گا
19:29اچھے راستے پر چلے گا
19:30اور رجو جیسا کہے گا
19:32ویسا ہی کرے گا
19:33رجو اسے بتاتا ہے
19:34کہ یہاں دلی میں اس کا ایک دوست ہے
19:36جو ایک فائیو سٹار ہوتل میں سنگر ہے
19:38وہ شاید انہیں یہاں رہنے
19:40یا کوئی کام ڈھونڈنے میں مدد کر سکتا ہے
19:42اس لئے وہ دونوں اس سنگر دوست سے
19:44ملنے کا پلان بناتے ہیں
19:45ادھر سومن اور ساحل کے سکول میں
19:47دونوں بچوں کی آتما کی شانتی کے لیے
19:49ایک پرارتھنا سبھا رکھی گئی تھی
19:51تب ہی وہاں اچانک مونا پہنچ جاتی ہے
19:53مونا کو وہاں اس حالت میں دیکھ کر
19:55سکول کے سبھی لوگ حیران رہ جاتے ہیں
19:56مونا کا بڑھتاو ایک دم نورمل تھا
19:59جیسے کہ کچھ ہوا ہی نہ ہو
20:00دوسری طرف کارنل اشوک
20:02اپنے بچوں کے قاتلوں کا پتہ لگانے کے لیے
20:04پولیس کے بھروسے نہ بیٹھ کر
20:05ایک پرائیویٹ ڈیٹیکٹیف کو کام پر رکھ لیتے ہیں
20:08ادھر پولیس کو اس مرڈر ویپن
20:10یا تلوار پر لکھے نام کا پتہ مل جاتا ہے
20:12پولیس جب اس پتے پر پہنچتی ہے
20:14تو انہیں معلوم پڑتا ہے
20:15کہ اس آدمی کی دکان یہاں پہلے تھی تو صحیح
20:18لیکن وہ بہت سال پہلے مر چکا ہے
20:20اس کا ایک بیٹا ہے جس کا نام بللو ہے
20:22بللو نے اپنی وہ دکان اور گھر
20:24ایک دوسرے آدمی کو بیچ دیا تھا
20:26یہ بھی پتہ چلتا ہے کہ بللو گے تھا
20:28اور اس کا دھانی رام نام کے ایک لڑکے کے ساتھ
20:31افیار چل رہا تھا
20:32جسے لے کر اس علاقے میں کافی ویواد اور ہنگامہ بھی ہوا تھا
20:35لیکن اس وقت بللو کہاں ہے اور کیا کرتا ہے
20:38اس کی جانکاری کوئی بھی نہیں دے پاتا
20:40سین پریزنٹ سمیں سے چار دن پہلے کا دکھایا جاتا ہے
20:43جہاں رجو اپنے دوست پیارے موہن سے ملنے کے لیے
20:46بابو کو لے کر آتا ہے
20:47یہاں ہمیں پتہ چلتا ہے کہ پیارے موہن نسل میں
20:49ایک لوکل بار میں ڈوئٹ سنگر کے روپ میں کام کرتا ہے
20:53وہاں ایک آدمی ہمیشہ پیارے کے پیچھے پڑا رہتا ہے
20:55اور جب بھی موقع ملتا ہے
20:57اس کے ساتھ بتویجی کرنے کی کوشش کرتا ہے
20:59بار کا پروگرام ختم ہونے کے بعد پیارے
21:01ان دونوں کو اپنے گھر لے کر آ جاتا ہے
21:04ایدھر پریزنٹ میں دیکھتے ہیں
21:05ریپورٹر نیسار ایک گھر میں جا کر
21:07اپنے سینئر ایڈیٹر سے ملتی ہے
21:09نیسار اس کیس سے جڑی خبرے چھاپنے کی کوشش کر رہی تھی
21:12لیکن اسے اس کا کوئی کریڈٹ نہیں دیا جا رہا تھا
21:15ایڈیٹر کا کہنا تھا کہ نیسار نے
21:16اب تک جو بھی جانکاری جھٹائی ہے
21:18وہ کافی نہیں ہے
21:19اسے لئے اگر وہ کوئی نیا سراغ ڈھونڈ کر لاتی ہے
21:22تب وہ اس بارے میں سوچے گا
21:23دوسری طرف ہے جا پرکاش
21:25جب اپنے گھر لوٹتا ہے
21:26تو دیکھتا ہے کہ اس کی بوا اور فوفیری بہن
21:29اس کے گھر آئی ہوئی ہے
21:30ان سے بات کرنے کے بعد جب وہ تھانے کے لئے نکل رہا ہوتا ہے
21:33تو اس کے پتا گھنشام بتاتے ہیں
21:34کہ وہ ایس پی کو کھانا کھلانے گئے تھے
21:36جا پرکاش کو پتا کی یہ بات
21:38بلکل پسند نہیں آتی
21:39گھنشام اسے سمجھانے کی کوشش کرتے ہیں
21:42کہ پولیس میں سب کو ہاتھ میں لے کر چلنا پڑتا ہے
21:44لیکن جا پرکاش گصے میں کہتا ہے
21:46کہ مجھے بہت مشکل سے ایک بڑا کیس ملا تھا
21:49آپ اس طرح سبھی آفیسرزو کھانا کھلا کر
21:51مجھے سب کا مزاک مت بنائیے
21:53اس کے بعد پھر سے فلیچ بیک میں دیکھتے ہیں
21:55رجو اور بابو اس سنگر پیارے کے گھر پر بیٹھ کر باتے کر رہے تھے
21:58تب ہی باتو باتو میں پیارے بتاتا ہے
22:00کہ وہ پہلے ایک ویٹر کا کام کرتا تھا
22:03لیکن بعد میں اس نے سنگنگ شروع کر دی
22:05وہ رجو کے بارے میں بھی بتاتا ہے
22:07کہ رجو کی ایک بہن تھی
22:08جس کی شادی بہت پہلے ہو چکی ہے
22:10ساتھی وہ ایک دردناک بات بتاتا ہے
22:12کہ بچپن میں ایک ڈاکٹر نے سرجری کرتے وقت
22:15گلتی سے رجو کا انڈ کوش کاٹ دیا تھا
22:17جس کی وجہ سے لوگ اسے ہجڑا کہہ کر چڑھاتے تھے
22:20اس کے بعد جب رجو خود پیارے کے بارے میں بات کرنے لگتا ہے
22:24تو پیارے گسے میں بلو چڑھانے والا کا نام لیتا ہے
22:27جو ہمیشہ اس کے پیچھے پڑا رہتا تھا
22:29پیارے کی باتوں سے بابو کو پتا چلتا ہے
22:31کہ یہ بلو بہت امیر آدمی ہے
22:33بابو کے دماغ میں لالا چاہتا ہے
22:35کہ اگر وہ اس کے یہاں جائیں
22:36تو شاید بہت سارا پیسہ ہاتھ لگ سکتا ہے
22:38پھر پریزنٹ میں دیکھتے ہیں
22:40جہاں فورنزک ڈاکٹر بشواجیت
22:42انسپیکٹر جائے پرکاش کو لیب میں
22:43اسی ہری کار کے پاس بلاتے ہیں
22:45وہ بتاتے ہیں کہ کار کی پچھلی سیٹ پر جو خون ملا
22:48اسے صاف ثابت ہوتا ہے
22:50کہ دونوں بچے پیچھے کی سیٹ پر بیٹھے تھے
22:52لیکن کار کی اگلی سیٹ پر جو خون کے نشان ہے
22:54اسے پتا چلتا ہے
22:55کہ بچوں پر پیچھے سے بار بار وار کیا گیا تھا
22:58صرف اتنا ہی نہیں
22:59فرنٹ سیٹ کے سٹیرنگ ویل پر بھی خون لگا تھا
23:02جو ان بچوں کا نہیں تھا
23:03ڈاکٹر بسوجت اندازہ لگاتے ہیں
23:05کہ کار کے اندر بچوں اور کاتلوں کے بیچ
23:07بہت ہی بھیانک لڑائی ہوئی تھی
23:09جب پیچھے سے بچوں پر وار کیا جا رہا تھا
23:11تو بچوں نے بھی پلٹ کر
23:13آگے بیٹھے شخص پر حملہ کیا تھا
23:14جسے کہ وہ زخمی ہو گیا تھا
23:16کیونکہ آگے بیٹھا اپراد ہی بری طرح لہو لہان تھا
23:19اسی لیے وہ پکا علاج کے لیے
23:21کسی نہ کسی ہسپیٹل یا ڈاکٹر کے پاس
23:23تو وہ ضرور گیا ہوگا
23:25اس کے بعد رات کا سین دکھایا جاتا ہے
23:27نیسار جب جے پرکاس ملنے تھانے پہنچتی ہے
23:30تو جے پرکاس اپنی ٹیم کے ساتھ
23:31کسی جانج کے لیے باہر نکل رہا ہوتا ہے
23:33اس لیے نیسار تھانے میں ڈیوٹی پر موجود
23:35کانسٹیبل سنگ کے ساتھ کچھ باتے کر کے
23:38نئی جانکاری نکالنے کی کوشش کرتی ہے
23:40لیکن پولیس کو سخت نردیش تھے
23:41کہ پترکاروں کے ساتھ کوئی بھی خبر شیئر نہیں کرنی ہے
23:44اس لیے نیسار وہاں سے جانے لگتی ہے
23:46تب ہی کانسٹیبل سنگ کے پاس
23:48ایک ارجنٹ کال آتی ہے
23:49اور وہ اپنی بائیک لے کر نکلنے لگتا ہے
23:51نیسار کو اکیلا دیکھ کر
23:52وہ اسے اپنی بائیک پر لفٹ دے دیتا ہے
23:54راستے میں باتوں باتوں میں سنگ
23:56اس کیس سے جڑی اب تک کی ساری پروگریس
23:59اور گپت جنکاریاں نیسار کو بتا دیتا ہے
24:01ادھر جے پرکاش کی ٹیم
24:03ایک ہسپیٹل میں ڈاکٹر سے پوچھتاج کرتی ہے
24:05ڈاکٹر بتاتے ہیں کہ گھٹنا والی رات
24:07دو گھائل آدمی علاج کے لیے ہسپیٹل آئے تھے
24:10پہلے انہوں نے کہا کہ آپس میں مار پیٹھوئی ہے
24:12پھر کہنے لگے کہ ایکسیڈنٹ ہوا ہے
24:14لیکن ان کے گھاو دیکھ کر
24:15ڈاکٹر کو سمجھ آ گیا تھا کہ وہ جھوٹ بول رہے ہیں
24:18علاج کے بیچ ہی وہ دونوں اچانک ہسپیٹل سے بھاگ گئے تھے
24:21ڈاکٹر آگے ہولیا بتاتے ہیں
24:22کہ ان میں سے ایک لمبا تھا
24:24اور دوسرا لگ بھگ ساڑے پانچ فیٹ کا
24:26ایک آدمی کا ہاتھ بھی جلا ہوا تھا
24:28اور اس کی بولی سے لگ رہا تھا
24:29وہ شہر سے باہر کا رہنے والا ہے
24:31ڈاکٹر کو جب شک ہوا
24:33تو انہوں نے اسی رات پولیس ٹیشن بھی فون کیا تھا
24:35اس رات تھانے میں کل پیش راتھور نام کے کانسٹیبل نے فون اٹھایا تھا
24:39لیکن راتھور نے اسے معمولی بات سمجھ کر
24:42اس کی کوئی ڈائری یا ریپورٹ نہیں لکھی تھی
24:44پکڑے جانے پر راتھور بتاتا ہے
24:46کہ ان دونوں نے خود کو دوست بتایا تھا
24:48اور کہا کہ کہیں جاتے سمیں ایکسیڈنٹ ہو گیا
24:50وہ گریب لوگ تھے اور پولیس کے چکر میں نہیں پڑنا چاہتے تھے
24:53اس لئے اس نے انہیں جانے دیا
24:54حالانکہ راتھور نے ڈائری میں ان کے نام لکھے ہیں
24:57ایک کا نام پیارے کمار اور دوسرے کا نام موہن کمار
25:00ساتھی پیارے کے گھر کا پتہ بھی لکھا ہوا تھا
25:02یعنی اس راتھ بابو اور رجو نے پولیس سے اپنا جھوٹ نام بولا تھا
25:06راتھور یہ بھی یاد دلاتا ہے کہ اس راتھ ہسپٹل میں بہت بھیڑ تھی
25:10اور جب اس کی ان دونوں سے باتیں ہو رہی تھی
25:12تب خود جی پرکاش بھی اس ہسپٹل میں موجود تھا
25:14یہ وہی سمیں تھا جب کرنل اشوک ایکسیڈنٹ والے بچوں کی لاشے دیکھنے ہسپٹل آئے تھے
25:19سین ایک بار پھر سے چار دن پہلے کا دکھایا جاتا ہے
25:22پیارے سے اس امیر آدمی بلو کے بارے میں جاننے کے بعد
25:25بابو اور رجو اس سنگر پیارے کو لے کر بلو کے گھر پہنچ جاتے ہیں
25:29یہاں میں پتا چلتا ہے کہ بار میں جو آدمی پیارے کے ساتھ بتمیجی کر رہا تھا
25:33وہ کوئی اور نہیں بلکہ یہی بلو تھا
25:35بابو وہاں جا کر بلو کو ایک آفر دیتا ہے کہ تم مجھے ہزار روپے دو
25:39اس کے بدلے میں تم پیارے کے ساتھ جو چاہو وہ کر سکتے ہو مجھے کوئی دکت نہیں
25:43لیکن یہاں بات اتنی بگڑ جاتی ہے کہ بابو اور بلو کے بیچ ہانتہ پائی اور مار پیٹ شروع ہو
25:48جاتی ہے
25:49تب ہی رجو پیچھے سے آ کر بلو کے سر پر زور سے وار کر دیتا ہے
25:52یہ سب دیکھنے کے بعد پیارے ڈر کے مارے وہاں سے بھاگ جاتا ہے
25:55بابو اور رجو تب بلو کو رسی سے بان دیتے ہیں
25:58اس کے بعد وہ بلو کے گھر کی تلاشی لیتے ہیں
26:00جہاں قیمتی تو کچھ نہیں ملتا
26:02لیکن دیوار پر ٹنگی بلو کے پتا کی پورانی تلواریں انہیں مل جاتی ہیں
26:06پریزنٹ میں پولیس پیارے کے گھر پر ریڈ مارتی ہے
26:08جہاں انہیں ٹھیک ویسے ہی ایک اور تلوار ملتی ہے
26:11جس پر بلو کے پتا کا نام لکھا ہوا تھا
26:13اسے جہاں پرکاش کو سمجھ جاتا ہے کہ وہ دونوں اپرادی یہی تھے
26:17دوسری طرف اس رات بابو اور رجو اس گھر سے جو کچھ بھی ملا
26:21اسے لے کر باہر آتے ہیں تو دیکھتے ہیں پیارے بھاگ چکا ہے
26:24تب وہ جاتے جاتے راستے میں پارک کی ہوئی ایک ہرے رنگ کی کار چورا کر بھاگ جاتے ہیں
26:28پریزنٹ سمیں میں ریپورٹر رنی سار اب سلیم نام کے ایک دودھ والے سے ملتی ہے
26:32سلیم بتاتا ہے کہ گھٹنا کے دن شام کو جب وہ سائیکل سے دودھ دینے جا رہا تھا
26:37تب اس نے سمن اور ساحل کو اس ہری کار میں زبردستی لے جاتے ہوئے دیکھا
26:41کار کے شیشے پر بچوں کے ہاتھ کا خون دیکھ کر وہ انہیں بچانے دوڑا تھا
26:45لیکن اچانک کار رکھ بھی گئی تھی
26:47لیکن سلیم کے بہت کوشش کرنے پر بھی کار کا کوئی دروازہ نہیں کھلا
26:51آخر میں کار نے اسے ٹکر ماری اور وہ وہاں سے بھاگ نکلا
26:54بھاری بارش کے کارن وہ اندر بیٹھے دونوں لوگوں کے چہرے دیکھ نہیں پایا تھا
26:58اس گھٹنا کے بعد اس نے اپنے بڑے بھائی کو تھانے بھیجا تھا
27:01تاکہ بچوں کو بچایا جا سکے
27:03لیکن پولیس نے اس کی بات کو اہمیت ہی نہیں دی
27:05اس نے ہیلپ لائن نمبر پر بھی چار بار کال کیا تھا
27:08پر کوئی جواب نہیں ملا
27:09سلیم کا ماننا تھا کہ اگر پولیس لاپروہی نہیں کرتی
27:12تو آج سومن اور ساحل زندہ ہوتے ہیں
27:14ادھر تھانے میں کانسٹیبل راتھور کی مدد سے
27:17بابو اور رجو کے سکیچ تیار کیا جاتے ہیں
27:19جب یہ سکیچ پیارے کے مکان مالک کو دکھائے جاتے ہیں
27:22تو وہ انہیں پہچان نہیں پاتا
27:23وہ بتاتا ہے کہ پیارے اور موہن کوئی دو الگ لوگ نہیں
27:27بلکہ اس کا پورا نام پیارے موہن ہے
27:29اور وہ اکیلا ہی قرائے پر رہتا تھا
27:31پیارے نے اسے بز اتنا بتایا تھا
27:33کہ وہ پاس کے ایک بار میں سنگر کا کام کرتا ہے
27:35پولیس مکان مالک کی مدد سے
27:37اب پیارے کی بھی ایک سکیچ تیار کر لیتی ہے
27:39جہاں پہلے پولیس صرف دو لوگوں پر شک کر رہی تھی
27:42اب چار نام سامنے آ چکے تھے
27:44دوسری طرف سلیم سے پولیس کی لاپروہی کی بات جاننے کے بعد
27:47نصار اپنے اکھبار کی ہیڈ لائن میں
27:49پولیس کی اس گلتی کو چھاپ دیتی ہے
27:51اس خبر کو دیکھ کر جے پرکاش کو بہت برا لگتا ہے
27:54کہ نصار نے ایسا کیا
27:55کیونکہ کیس کو لے کر اس پر پہلے سے ہی بہت پریشر تھا
27:58اس بیچ بللو کے ساتھ
28:00افیر رکھنے والے دھانی رام کا پتہ چل جاتا ہے
28:02جے پرکاش جب اسے ملتا ہے
28:04تو دھانی رام قبول کرتا ہے
28:05کہ پہلے ان کا رشتہ تھا
28:07لگن اب وہ شادی شدہ ہے اور اس کے بچے بھی ہیں
28:09وہ بللو سے مہینے میں بس ایک دو بار ملتا تھا
28:12اور اس وقت بللو کہاں ہے
28:14اسے نہیں پتا
28:14حالانکہ وہ بللو کے گھر کا پتہ دے دیتا ہے
28:17جیسے ہی پولیس بللو کے گھر پہنچتی ہے
28:19انہیں سمجھ جاتا ہے کہ گھر میں لڑائی ہوئی تھی
28:21تب ہی اندر کے کمرے میں بہت ہی گندی بدبو آتی ہے
28:24جب پولیس اس بدبو کا پیچھا کرتے ہوئے اندر جاتی ہے
28:27تو ایک لکڑی کے بکسے کے اندر سے
28:29بللو کی آدھی سڑی ہوئی لاش ملتی ہے
28:31جے پرکاش دیوار کی طرف دیکھتا ہے
28:33تو سمجھ جاتا ہے کہ یہاں سے تلوارے گائب ہیں
28:35یعنی کہ ان بدماشوں نے ہی بللو کا مرڈر کیا ہے
28:38دھنی رام کو اپرادیوں کے سکیچ دکھائے جاتے ہیں
28:41اور وہ انہیں پہچان نہیں پاتا
28:42وہ بس اتنا بتاتا ہے کہ بللو زیادہ تر سمیں
28:45ایک لوکل بار میں بٹاتا تھا
28:46لیکن وہ بار کون سا تھا
28:48یہ اسے نہیں پتا
28:49ادھر بابو اور رجو اس بات سے پریشان تھے
28:51کہ انہوں نے بللو کو تو مار دیا
28:53لیکن یہ سب کرتے ہوئے انہیں پیارے نے دیکھ لیا تھا
28:56پیارے کبھی بھی پولیس کو بتا سکتا تھا
28:58اس لئے وہ ان کے لئے بہت بڑا خطرہ بن چکا تھا
29:00اس لئے بابو اور رجو اسے بار میں جاتے ہیں
29:03اور پیارے کو وہاں سے اٹھا لے جاتے ہیں
29:05پریزنٹ میں جب بللو کی لاش والے باکس کو
29:07فورنسک لیب میں ٹیسٹ کیا جاتا ہے
29:09تو پتا چلتا ہے کہ اسے چار پانچ دن پہلے ہی چوٹ پہنچائی گئی تھی
29:13لیکن اس کی موت تین دن پہلے ہوئی تھی
29:15یعنی کہ اسے زخمی کر کے اس باکس میں بند کر دیا گیا تھا
29:18اس باکس پر دو لوگوں کے فنگر پرنٹ ملے ہیں
29:20جو کار اور مرڈر ویپن سے ملے فنگر پرنٹ سے بلکل میچ کر رہے تھے
29:24لیکن سنگر پیارے کا کہیں کوئی سراغ نہیں مل رہا
29:27ڈاکٹر سے بات کر کے جب جے پرکاش باہر نکل رہا ہوتا ہے
29:30تو اس کی ملاقات نیسار سے ہوتی ہے
29:32اخبار میں پولیس کے خلاف خبر چھاپنے کے وجہ سے
29:35جے پرکاش اس سے ناراض تھا
29:36نیسار اسے سمجھاتی ہے کہ پروفیشنل لائف اور پرسنل لائف کو الگ رکھو
29:40سچ دکھانا میرا کام ہے
29:42اسی بیچ ہوسپٹل سے خبر آتی ہے کہ جے پرکاش کے پتا
29:45گھنشیام رکشے سے گر گئے تھے
29:47جے پرکاش تورنٹ ہوسپٹل بھاگتا ہے
29:49گرنے کے وجہ سے ہاتھ میں معمولی چوٹ آئی تھی
29:52پر ڈاکٹر کہتے ہیں کچھ دن آرام کرنا ہوگا
29:54جے پرکاش اپنے پتا کو سمجھانے کی کوشش کرتا ہے
29:57کہ وہ ایک بہتی ضروری کیس میں فسا ہے
29:59اس لئے وہ اپنا دھیان رکھیں
30:01گھنشیام بولتے ہیں کہ
30:02تمہیں یہاں آنے کو کس نے کہا تھا
30:04اس بات پر باپ بیٹے کی بحث ہو جاتی ہے
30:07جے پرکاش کہتا ہے کہ وہ کام کے پریشر میں ہے
30:09تو گھنشیام جواب دیتے ہیں کہ
30:11میں نے بھی تیس سال کانسٹیبل کی نوکری کی ہے
30:13اور ساتھی تمہارا پتا ہونے کا فرض بھی نبھایا
30:15تم مجھے کام مت سکھاؤ
30:16تم اپنا کام کرو میں اپنا دیکھ لوں گا
30:18تب ہی تھانے سے خبر آتی ہے
30:20کہ پیارے والے بار کا پتا چل گیا ہے
30:22جب پرکاش ترنت اپنی ٹیم کے ساتھ
30:24اس بار میں پہنچتا ہے
30:25جب وہاں بابو اور رجو کا سکیچ دکھایا جاتا ہے
30:28تو بار کے لوگ بتاتے ہیں
30:29کہ یہ دونوں تو تین دن پہلے
30:31خود کو انڈرکور پولیس بتا کر
30:32پیارے کو اپنے ساتھ اٹھا کر لے گئے ہیں
30:35ادھر بلو کی لاش مل چکی تھی
30:36اور پیارے موہن کو گائب ہوئے تین دن ہو چکے تھے
30:39اس لئے پولیس اب اندازہ لگا رہی ہے
30:41کہ شاید ان بدماشوں نے
30:42پیارے موہن کا بھی مرڈر کر دیا ہوگا
30:44تب ہی کہانی میں تین دن پہلے کا فلیچ بیک دکھایا جاتا ہے
30:47جب بابو اور رجو سنگر پیارے کو کڈنیپ کر کے
30:50جنگل میں لے گئے تھے
30:51اور اسے جان سے مارنے کی کوشش کر رہے تھے
30:53رجو لگاتار بابو کو سمجھانے کی کوشش کر رہا تھا
30:56کہ پیارے اس کا بچپن کا دوست ہے
30:58اور وہ ویسے ہی بہت ڈر گیا ہے
30:59اور کسی سے کچھ کہے گا نہیں
31:01لیکن بابو کوئی رسک نہیں لینا چاہتا تھا
31:03ٹھیک تب ہی بابو کی نظر پاس میں بات کر رہے
31:05ایک لڑکے لڑکی پر پڑتی ہے
31:07وہ لڑکی سڑک پر آئیس کریم دیکھ کر کھانے کی ضد کرتی ہے
31:10اور جب لڑکا آئیس کریم لینے جاتا ہے
31:12تو بابو اس لڑکی کو پکڑ کر وہاں سے لے آتا ہے
31:15بابو اب پیارے سے بولتا ہے
31:17تیری وجہ سے ہمیں بلو کو مارنا پڑا
31:19اس لئے اب تو ہمارے لیے اس لڑکی کو جان سے مارے گا
31:22دراصل بابو اس کا مو بند رکھنے کے لیے
31:24پیارے سے ہی مرڈر کروانا چاہتا تھا
31:26لیکن پیارے کسی بھی قیمت پر مارنے کو تیار نہیں ہوتا
31:29آخر میں بابو خود اس لڑکی کو مارنے کا فیصلہ کرتا ہے
31:32لیکن تب ہی وہاں پولیس کا ایک کانسٹیبل آ جاتا ہے
31:35پولیس کو دیکھ کر وہ سب بھاگنے کی گوشش کرتے ہیں
31:37پر پیارے کو سمجھ آ جاتا ہے
31:39کہ وہ پولیس کے پاس زیادہ سرکشت رہے گا
31:41اس لئے وہ بھاگ کر اس کانسٹیبل کے سامنے سرنڈر کر دیتا ہے
31:44پھر پریزنٹ میں دیکھتے ہیں
31:46ماں مونا سکول میں بچوں کو پڑھا رہی تھی
31:48لیکن ان کی دیماغی حالت دیکھ کر بچے انہیں پاگل سمجھ رہے تھے
31:52سکول کے پرنسپل مونا کو الگ سے بلاتے ہیں
31:54اور انہیں ترنت اپنے گھر جانے کو بولتے ہیں
31:56مجبوری میں مونا کو سکول سے نکلنا پڑتا ہے
31:59باہر بہت تیج باری شوری تھی
32:01راستے میں ایک کپل اپنی کار سے جا رہے تھے
32:03وہ مونا کو بھیگتے دیکھ لفٹ دینے کی کوشش کرتے ہیں
32:06لیکن مونا الٹا گستہ ہو کر ان کی کار پر اینٹ دے مارتی ہے
32:10اس وجہ سے معاملہ پولیس ٹیشن تک پہن جاتا ہے
32:13لیکن جب اس کپل کو پتا چلتا ہے
32:15کہ مرے ہوئے بچے سومن اور ساحل کی ماں یہی ہے
32:18تو وہ اپنا کیس واپس لے لیتے ہیں
32:19اور مونا سے معافی مانگ کر انہیں گھر بھیج دیتے ہیں
32:22دوسری طرف کرنل اشوک نے جس پرائیویٹ ڈیٹیکٹیو کو کام پر رکھا تھا
32:26وہ انہیں ایک ایسی ریپورٹ لاکر دیتا ہے
32:28جسے دیکھ کر ایک پتا کے روپ میں اشوک کے تو ہوش اڑ جاتے ہیں
32:32یہ اصل میں سومن کی پوسٹ مارٹم ریپورٹ تھی
32:34جس میں صاف لکھا تھا کہ مرڈر سے پہلے سومن کے ساتھ
32:37سیکشوال اسالٹ ہوا تھا
32:38یہ سچائی جاننے کے بعد اشوک کا گصہ اور دکھ برداشت کے باہر ہو جاتا ہے
32:43ادھر جی پرکاش کی ٹیم کو خبر ملتی ہے
32:45کہ سنگر پیارے کو پاس کے ہی ایک پولیس ٹیشن میں بند کر کے رکھا گیا ہے
32:49وہ تورنت اسے ملنے پہنچتے ہیں
32:50جیسے ہی پیارے کو ان دونوں بدماشوں کے سکیچ دکھائے جاتے ہیں
32:54وہ ڈر کر چللا اٹھتا ہے
32:55کہ یہ دونوں مجھے مار ڈالیں گے
32:56پیارے کے مو سے ہی پولیس کو بابو اور رجو کے اصلی نام پتا چلتے ہیں
33:00اس کے بعد پیارے سب کچھ سچ سچ اوگل دیتا ہے
33:03کہ وہ کیسے بومبے سے یہاں آئیں اور انہوں نے کیا کیا کیا
33:06لیکن جب جی پرکاش اسے سومن اور ساحل کے مرڈر کے بارے میں پوچھتا ہے
33:10تو پیارے صاف کہہ دیتا ہے سر مجھے اس بارے میں کچھ نہیں پتا
33:13جب پولیس پوچھتی ہے کہ وہ دونوں اس وقت کہاں چھپے ہو سکتے ہیں
33:16تو پیارے بتاتا ہے رجو کی بہن کی شادی سونی پت میں ہوئی تھی
33:20وہ شاید وہیں گئے ہوں گے
33:21اس کے بعد کہانی میں ایک بار پھر اس دن کا سین دکھایا جاتا ہے
33:25جنگل میں کونسٹیبل کو چکمہ دے کر بابو اور رجو کار لے کر بھاگ رہے تھے
33:29تب ہی انہوں نے بس ٹاپ پرسومن اور ساحل کو دیکھا تھا
33:32اور وہیں سے انہوں نے انہیں کیڈنیپ کرنے کا پلان بنایا تھا
33:35پھر سین اسی رات کا دکھایا جاتا ہے
33:37جہاں بابو اور رجو دونوں کار کے اندر زکمی حالت میں تھے
33:40بچوں کے ساتھ کار میں کیا ہوا تھا
33:42یہ دھیرے دھیرے صاف ہوتا ہے
33:43بابو چوٹ کی وجہ سے دھنگ سے ڈرائیو نہیں کر پا رہا تھا
33:46اور اچانک کنٹرول کھونے سے کار اسی کھائی میں جائے گیری
33:49جہاں سے پولیس کو وہ بعد میں ملی تھی
33:51رجو گھبرا کر بابو کی جان بچانے کے لیے
33:54اسے پاس کے ہسپٹل میں لے جاتا ہے
33:55جب ہسپٹل میں بابو کو ہوش آتا ہے
33:57اور وہ خود کو وہاں دیکھتا ہے
33:59تو وہ رجو پر بھڑک جاتا ہے
34:01کہ وہ اسے یہاں کیوں لیا
34:02کیونکہ یہاں وہ پکڑے جا سکتے ہیں
34:04ڈاکٹر جب ان سے پوچھتاچ کرتے ہیں
34:06تو بابو کو لگ جاتا ہے
34:07کہ ڈاکٹر کو ان پر شک ہو گیا ہے
34:09اسی لئے وہ ترنت وہاں سے بھاگ نکلتے ہیں
34:11وہ ٹھیک جائے پرکاش کے سامنے سے بھاگتے ہیں
34:13لیکن تب ہی کانسٹیبل راتھور انہیں روک لیتا ہے
34:16یہاں ان کے بیچ وہی باتشیت ہوتی ہے
34:18جو راتھور نے پہلے پولیس کو بتائی تھی
34:20ہسپٹل سے بھاگ کر وہ سیدھے بس ٹاپ پہنچتے ہیں
34:22لیکن وہاں پولیس کو آتا دیکھ
34:24وہ دونوں الگ الگ ہونے کا فیصلہ کرتے ہیں
34:26بابو کہتا ہے
34:27رجو فلحال سونی پتھ میں اپنی بہن کے گھر جا کر چھپ جائے
34:30ساتھی بابو
34:31اسے بامبے کے اپنے ایک دوست کا نمبر دیتا اور بولتا ہے
34:34کہ وہ فلحال اس کے پاس جا رہا ہے
34:36معاملہ ٹھنڈا ہونے پر وہ آگے کا پلان بنائیں گے
34:38جاتے جاتے بابو اسے
34:40سمن کی سونی کی وہی بالیاں دے دیتا ہے
34:42جو ماں مونا نے اسے پہنائی تھی
34:44تیہ پلان کے مطابق
34:45رجو سونی پتھ میں اپنی بہن کے گھر پہنچ جاتا ہے
34:48وہ گھر پر جھوٹ بولتا ہے
34:49کہ بامبے میں فلم کی شوٹنگ کے دوران
34:51اس کے ہاتھ میں چوٹ لگ گئی تھی
34:52حالانکہ رجو وہاں پر رہنے کے لئے آیا تھا
34:55لیکن اس کی بہن کا پتی مطلب جیجہ
34:57اسے بلکل بھی پسند نہیں کرتا
34:58سالے کو گھر میں رکھنے کے گصے میں
35:00وہ رات کو رجو کی بہن اور اس کی چھوٹی بیٹی کو
35:03بری طرح پیٹتا ہے
35:04رجو اندر کمرے میں سب کچھ سن رہا تھا
35:06لیکن وہ اتنا بے برد تھا کہ وہ کچھ بول بھی نہیں پاتا
35:09یہ تین دن پہلے کی بات تھی
35:11سین پھر پریزنٹ میں آتا ہے
35:13جے پرکاش اپنی ٹیم کے ساتھ
35:14سونی پت رجو کی بہن کے گھر پہنچ جاتا ہے
35:17وہاں انہیں پتا چلتا ہے
35:18کہ کل رات ہی رجو اپنے جیجہ کی بائک چڑھا کر
35:20وہاں سے بھاگ چکا ہے
35:21پولیس کو وہاں سے رجو کی کچھ پورانی تصویریں ملتی ہیں
35:24جے پرکاش اس کی بہن کو سچ بتا دیتا ہے
35:27کہ اس کا بھائی کتنا بڑا پڑا دی ہے
35:29بہن اور اس کی بیٹی کے چہرے پر
35:31چوٹ کے نشان دیکھ کر
35:32جے پرکاش سمجھ جاتا ہے
35:34کہ یہ اس کے پتی کی کرتو تھے
35:35اب جبکہ رجو کل رات ہی بھاگا تھا
35:37اس لئے پولیس اندازہ لگاتی ہے
35:39کہ وہ زیادہ دور نہیں گیا ہوگا
35:40دورانت پورے شہر کے چیک پوسٹ
35:42الٹ کر دیے جاتے ہیں
35:43اور ناکہ بندی شروع ہو جاتی ہے
35:44جے پرکاش اور اس کی ٹیم
35:46اسے ڈھونڈنے نکل پڑتی ہے
35:47تبھی دکھایا جاتا ہے
35:49کہ کل رجو نے ایک لوکل ڈاکٹر سے
35:51اپنے ہاتھ کا چیک اپ کرایا تھا
35:52اس کے بعد جب وہ بازار کی
35:54ایک دکان پر بیٹھ کر کھانا کھا رہا تھا
35:56تب ہی اکھبار کے فرنٹ پیج پر
35:57اپنی اور بابو کی وہی تصویر چھپی تھی
36:00مطلب سکیچ جو نیسار کے اکھبار میں آئی تھی
36:02اپنے فوٹو دیکھ کر
36:03رجو کے پیرو تلے زمین کھسک جاتی ہے
36:05اور وہ بری طرح گھبرا جاتا ہے
36:07وہ تورنت دکان سے اٹھ کر
36:08بابو کو فون لگاتا ہے
36:10بابو فون پر رجو کو سمجھانے کی کوشش کرتا ہے
36:13کہ وہ شانت رہے
36:14وہ کہتا ہے کہ مجھے تھوڑا وقت دو
36:16تم بھی جہاں ہو وہیں چھپے رہو
36:17لیکن رجو بری طرح گھبرایا ہوا تھا
36:20رات کے وقت جب رجو سو رہا تھا
36:22تب ہی اچانک اس کی بہن کی بیٹی بندی
36:24اس کے پاس آتی ہے
36:25دراصل رجو نے گھر پر جھوٹ بولا تھا
36:27کہ وہ بومبے میں فلموں کی شوٹنگ پر کام کرتا تھا
36:30اور بندی کو ایکٹرز بننے کا بہت شوق تھا
36:32اس نے بندی اپنے ماما رجو سے بولنے لگتی ہے
36:35کہ وہ بھی اسے اپنے ساتھ بومبے لے چلے
36:37رجو اچھی طرح جانتا ہے
36:39کہ اگر اس نے ایسا کیا
36:40تو بندی کا پتا ان دونوں کا کیا حال کرے گا
36:42لیکن بندی زد پر اڑ جاتی ہے
36:44اور کہتی ہے کہ تم بس مجھے یہاں سے لے چلو
36:47تم جو کہوگے میں وہی کروں گی
36:48تب رجو اسے چھپ کرانے کے لیے
36:50سومن کی سونے والی وہی بالی
36:52گفٹ کرنے کی کوشش کرتا ہے
36:53لیکن بندی کہتی ہے کہ مجھے سونے کی بالی نہیں چاہیے
36:56تم مجھے بس بومبے لے چلو
36:58میں زندگی بھر تمہاری سیوہ کروں گی
37:00بندی کی ان باتوں کو سن کر
37:01رجو کے مند میں غلط خیال آنے لگتے ہیں
37:04اسے لگتا ہے کہ بندی کسی اور طرف
37:06اشارہ کر رہی ہے
37:07وہ خود پر کابو نہیں رکھ پاتا
37:08اور بندی کے ساتھ زبردستی کرنے کی کوشش کرنے لگتا ہے
37:12بندی کو بھی اپنے ماما کے گندے ارادے سمجھ آ جاتے ہیں
37:15لیکن ٹھیک اسی وقت
37:16رجو کی آنکھوں کے سامنے
37:17مریوی بچی سومن کا چہرہ گھوم جاتا ہے
37:20وہ اندر سے ہل جاتا ہے
37:21اور ترنت بندی کو چھوڑ کر
37:22اس کے پتا کی بائیک اٹھا کر وہاں سے بھاگ نکلتا ہے
37:25اب پریزنٹ میں دیکھتے ہیں
37:26انسپیکٹر جے پرکاش کو جانکاری ملتی ہے
37:29جس کے بعد وہ ہائیوے کے پاس
37:30ایک اڈھابے سے بندی کے پتا کی
37:32وہ چوری کی ہوئی بائیک برامت کر لیتے ہیں
37:35لیکن رجو کا کوئی سراغ نہیں ملتا ہے
37:37کوئی اور راستہ نہ دیکھ کر
37:38جے پرکاش کو اپنی ٹیم کے ساتھ واپس لوٹنا پڑتا ہے
37:41ادھر اسپی پر بھی
37:42اس کیس کو لے کر اوپر سے بہت دباو آ رہا تھا
37:45ہوم منسٹر تو سیدھے طور پر
37:47اسپی سے کہہ دیتے ہیں
37:48کہ وہ کسی جونئر آفیسر کے بھروسے نہ بیٹھیں
37:50بلکہ کسی سینئر آفیسر کو
37:52اس کیس کی جانچ سوپ دیں
37:53اس کے بعد جہاں ایک طرف
37:55پولیس کرنل اشوک کے گھر جا کر
37:57سمن اور سہل کا بچا ہوا سامان لوٹا دیتی ہے
37:59وہیں دوسری طرف
38:00دلی سے ریپورٹر نیسار کے پاس
38:02رجو اور بابو کو لے کر
38:04ایک بہت بڑا سراغ آتا ہے
38:05جے پرکاش جب سونی پت سے لوٹ کر
38:07اسپی سے ملنے پولیس ٹیشن پہنچتا ہے
38:09تو دیکھتا ہے کہ وہاں انسپیکٹر چوہان
38:11پہلے سے ہی موجود ہیں
38:12یہ دیکھر جے پرکاش صاف سمجھ جاتا ہے
38:15کہ اب یہ کیس اسے چھین کر
38:17چوہان کو دے دیا جا رہا ہے
38:18چوہان اسے کہتا بھی ہے
38:19کہ میں اسپی صاحب سے ریکویسٹ کروں گا
38:21کہ وہ تمہیں اس کیس میں میرا اسسسٹنٹ بنا کر رکھے
38:24اس بات سے جے پرکاش کا من بہت خراب ہو جاتا ہے
38:27اور وہ اداس ہو کر گھر لوٹ آتا ہے
38:29اسی بیچ نیسار کو جو بھی جانکاری ملی تھی
38:31وہ اسے جے پرکاش کو بتانے کے لیے
38:33اس کے گھر پہنچتی ہے
38:34وہاں جے پرکاش کے نہ ہونے پر
38:36وہ اس کے پتا گھنشام سے بات کرنے لگتی ہے
38:38باتوں باتوں میں گھنشام کو سمجھ آ جاتا ہے
38:41کہ جے پرکاش اور نیسار
38:42ایک دوسرے سے پیار کرتے ہیں
38:44کچھ ہی دیر میں جے پرکاش بھی گھر آ جاتا ہے
38:46اسے لگتا ہے کہ نیسار ہمیشہ کی طرح
38:48اکھبار کے لیے کوئی نئی خبر یا جانکاری چورانے آئی ہے
38:51اسی بات کو لے کر دونوں کے بیچ
38:52بحث اور کہہ سنی ہو جاتی ہے
38:54نیسار گسے میں کہتی ہے
38:56کہ تم ہمیشہ مجھ پر شک کیوں کرتے ہو
38:58میں تو صرف اپنا کام کر رہی ہوں
38:59اور تم اپنا تمہاری گلتیوں کے لیے
39:01تم مجھے ذمہ دار نہیں ٹھہرا سکتے
39:03اور سنو میں یہاں تم سے کوئی جانکاری لینے نہیں آئی تھی
39:06بلکہ تم ایک جانکاری دینے آئی تھی
39:08نیسار اسے بتاتی ہے
39:09کہ بابو اور رجو نے دلی میں
39:11ایک چھوٹے بچے کا مرڈر کیا تھا
39:13اور اس کے بعد ہی وہ وہاں سے بھاگ نکلے
39:15اس لئے اگر پولیس دلی جا کر جانچ کرے
39:17تو ان کے بارے میں کچھ پتا چل سکتا ہے
39:19یہ بھی ممکن ہے
39:20کہ وہ وہاں سے بھاگ کر
39:22واپس دلی ہی چلے گئے ہوں
39:23یہ سب بتانے کے بعد
39:25نیسار ناراض ہو کر وہاں سے چلی جاتی ہے
39:27اس کے بعد جب جی پرکاش کچن میں کھانا بنا رہا تھا
39:30تب اس کے پتا گھنشام اس کے پاس آتے ہیں
39:32گھنشام اسے سمجھاتے ہیں
39:34کہ ہر انسان کے اندر
39:35ایک الگ ٹیلنٹ اور طاقت ہوتی ہے
39:37جو جیسا ہوتا ہے
39:38وہ اپنی اس طاقت کا استعمال کرتا ہے
39:41میں اچھا کھانا بنا سکتا تھا
39:42اس لئے میں نے اپنی اس قابلیت کا استعمال
39:44افسروں کو خوش کرنے کے لئے کیا
39:46تم اپنے بارے میں سوچو
39:47تمہارے پاس قانون اور دماغ کا جو ہتیار ہے
39:50اسے کام پر لگاؤ
39:51تب ہی ایس آئی جاوید دوڑتے ہوئے آتا ہے
39:53اور بتاتا ہے کہ بومبے پولیس کے ایک ایس آئی کا فون آیا تھا
39:57انہوں نے رجو اور بابو کے سکیچ کو پہچان لیا ہے
40:00اور وہ جی پرکاش سے بات کرنا چاہتے ہیں
40:02جی پرکاش تورنٹ تھانے جا کر
40:04اس ایس آئی سے بات کرتا ہے
40:05بومبے پولیس بتاتی ہے کہ ان کے پاس
40:07بابو کے واپس مومبائی لوٹنے کی پکی خبر ہے
40:10اس لئے وہ جی پرکاش کو جتنی جلدی ہو سکے
40:12وہاں آنے کو بولتے ہیں
40:13جی پرکاش حساب لگاتا ہے
40:15کہ انسپیکٹر چوہن کل صبح
40:17اس کیس کا چارج سمحلیں گے
40:18اور کیس کی فائلوں کو سمجھنے میں
40:20انہیں کم سے کم ایک دو دن کا وقت تو لگے گا
40:22اسی وقت کا فائدہ اٹھا کر وہ بینا کسی کو بتائے
40:25چپکے سے اپنا کام پورا کر سکتا ہے
40:27تھانے کی باقی پولیس والے بھی
40:29اس کا ساتھ دینے کو تیار ہو جاتے ہیں
40:30جی پرکاش اسی رات کی ٹرین پکڑ کر
40:33بومبے کے لئے روانہ ہو جاتا ہے
40:34جہاں ایک طرف جی پرکاش ٹرین سے بومبے جا رہا تھا
40:38وہیں دوسری طرف رجوں کو بھی دکھایا جاتا ہے
40:40جو چھپتے چھپاتے بومبے کی طرف ہی بڑھ رہا تھا
40:43رات کے وقت اچانک تیج باری شروع ہو جاتی ہے
40:45بادلوں کی گڑ گراہٹ سے مونا کی نیند کھل جاتی ہے
40:48وہ بچوں کے کمرے میں جاتی ہے
40:50تو دیکھتی ہے کرنل اشوک کھڑکی بند کر رہے ہیں
40:53مونا بھی بچوں کا بکھرا ہوا سمان سمیٹنے لگتی ہے
40:55تب ہی اس کی نظر فورنزک لیپ سے آئے
40:58ایک باکس پر پڑتی ہے
40:59جس میں بچوں کا سمان تھا
41:00جیسے ہی مونا اس باکس کو کھول کر بچوں کی چیزیں دیکھتی ہے
41:04اس کا سبر ٹوٹ جاتا ہے
41:05وہ چیک چیک کر رونے لگتی ہے
41:07آخرکار مونا نے اس کڑوے سچ کو سویکار کر ہی لیا
41:11کہ اس کے دونوں بچے اب اس دنیا میں نہیں رہے ہیں
41:13کہانی اب سیدھے بارہ سال پیچھے کے فلیش بیک میں جاتی ہے
41:17جہاں بابو کے بچپن کا ایک قصہ دکھایا جاتا ہے
41:19بچپن میں بابو کا اصلی نام کمار تھا
41:22ایک دن سکول میں پڑھائی کے دوران بابو نے ایک بچے کا سر پھوڑ دیا تھا
41:25جس کی وجہ سے پرنسپل اسے سکول سے نکال رہے تھے
41:28بابو کی ماں نے ٹیچر کے سامنے بہت ہاتھ پیڑ جوڑے
41:31پر وہ نہیں مانے
41:32اپنی ماں کو خوش کرنے کے لیے بابو
41:34کہیں سے جنگلی شہد چورا کر لاتا ہے اور ماں کو دیتا ہے
41:37لیکن تبی سنجے نام کا ایک لڑکا وہاں آ کر
41:40پول کھول دیتا ہے کہ بابو یہ شہد چوری کر کے لائیا ہے
41:43اس بات سے بابو کی ماں اسے ناراض ہو جاتی ہے
41:46اور بابو کے سامنے ہی سنجے کی تعریف کرنے لگتی ہے
41:49یہ دیکھ کر بابو کو بہت گصہ آتا ہے
41:51جب سنجے ٹوالٹ میں جاتا ہے
41:53تو بابو اندر سے ایک جلتی بھی لکڑی فنک دیتا ہے
41:55اور باہر سے دروازہ بند کر دیتا ہے
41:57جسے جھلس کر سنجے کی موت ہو جاتی ہے
42:00پریزنٹ میں ہم دیکھتے ہیں جے پرکاش
42:02اب بومبے پولیس کے ساتھ
42:04اس پرانے کرائم سین پر پہنچتا ہے
42:05جہاں بچپن میں وہ حادثہ ہوا تھا
42:07وہاں اسے پتا چلتا ہے
42:08کہ بابو نے واپس آ کر
42:10یہاں ایک کپل کے ساتھ بھی کچھ بہت گلت کیا ہے
42:13کہانی پھر تین دن پہلے کے سین پر جاتی ہے
42:15جہاں بابو اپنے بچپن کے دوست
42:17جیمی کے پاس جاتا ہے
42:18دراصل بچپن میں سنجے کا مرڈر کرنے کے بعد
42:21بابو کو ریمان ڈھوم بھیجا گیا تھا
42:23اور وہیں اس کے ملاقات اس جیمی سے ہوئی تھی
42:25لیکن اب جیمی پوری طرح سدھر چکا تھا
42:28اور ایک شریف زندگی جی رہا تھا
42:30بابو اب ایک لڑکی سے سچا پیار کرنے لگا تھا
42:32اور دو دن بعد ہی اسے شادی کرنے ہی والا تھا
42:35اسی رات بابو جب ایک ٹیکسی چوری کر کے بھاگ رہا تھا
42:38تو راستے میں ایک پتی پتنی
42:40اسے اصلی ٹیکسی والا سمجھ کر
42:42اس کی گاڑی میں بیٹھ گئے
42:43جے پرکاش اس کپل سے ملتا ہے
42:45وہ بتاتے ہیں کہ اس رات بابو انہیں ایک سنسان جگہ پر لے گیا
42:49اور ان پر بہت ٹورچر کیا
42:50اس نے پہلے پتی کو ادھننگا کر کے بری طرح پیٹا
42:53اور پھر پتنی کے کپڑے تک فار دیئے
42:55اتنا ہی نہیں
42:56وہ ان کے پیسے گہنے اور یہاں تک ان کا پالتو کتا بھی چورا کر بھاگ گیا
43:00ادھر جیمی کی شادی کی تیاریاں چل رہی تھی
43:03اور دڑ جی اس کے کوٹ کا ناپ لے رہا تھا
43:05جیمی اپنے دوستوں کو ہنیمون کا پلان بتاتے ہوئے کہتا ہے
43:09کہ شادی کے ترند بعد وہ دونوں تاج محل دیکھنے آگرہ جائیں گے
43:12تب ہی ٹھیک رجو کا فون آتا ہے
43:14اور وہ بابو کو بتاتا ہے کہ اکھبار میں اس کی تصویریں چھپ چکی ہیں
43:18اور وہ خود واپس بومبے آ رہا ہے
43:20یہ سن کر بابو پولیس سے بچنے کا ایک نیا پلان بناتا ہے
43:23دوسری طرح پریزنٹ سمیں میں جے پرکاش اپنے سینئر
43:26ایس پی کو بینا بتائے بومبے آ گیا تھا
43:29اس لئے ایس پی اس پر بہت بری طرح بھڑکے ہوئے تھے
43:31ایس پی نے صاف کہہ دیا تھا
43:33کہ اگر جے پرکاش نے ترند ان سے کانٹیکٹ نہیں کیا
43:36تو وہ اسے نوکری سے سسپینڈ کر دیں گے
43:38لیکن اسی بیچ جے پرکاش کو بابو کی ماں کے بارے میں ایک بڑا سڑاگ ملتا ہے
43:42اس لئے وہ ایس پی کو کال کیے بھی نہ ہی وہاں سے نکل پڑتا ہے
43:46کہانی اب 6 سال پہلے کے فلیش بیک میں جاتی ہے
43:48جب بابو 18 سال کا ہوا
43:50تو اسے ریمانڈ ہوم سے ریہا کر دیا گیا تھا
43:53وہاں سے چھوٹ کر وہ سیدھے اپنی ماں کے پاس پہنچا
43:55وہاں جا کر اس نے دیکھا کہ اس کی ماں نے دوسری شادی کر لی ہے
43:59اور اس نئے گھر میں اس کی ایک چھوٹی بیٹی بھی ہے
44:02بابو کو لگا کہ وہ اپنی ماں اور اس نئے پریوار کے ساتھی رہے گا
44:05لیکن اس کی ماں بابو کے کھونکھار گسے اور عطیت سے اچھی طرح واقف تھی
44:10اس لئے اس کا نیا پتی گھر آئیں
44:12اس سے پہلے ہی انہوں نے بابو کے ہاتھ میں کچھ پیسے تھمائیں
44:15اور وہاں سے چلے جانے کو کہہ دیا
44:16اس بات سے بابو کو صاف سمجھ آ گیا
44:18کہ اس کی ماں اب اس سے پیار نہیں کرتی
44:20اور ان کے لئے ان کا یہ نیا پریوار اور نئی بیٹی ہی سب کچھ ہے
44:24بابو اس بات کو برداشت نہیں کر پایا
44:26اور چائے بنانے کے باہنے اس نے پورے گھر میں آگ لگا دی
44:30سین پھر پریزنٹ میں آتی ہے
44:31جے پرکاش کی ٹیم ایک چیریٹی سنس تھا کے ہسپٹل میں جا کر
44:35بابو کی ماں سے ملتی ہے
44:36اس آگ والے حادثے میں ان کی چھوٹی بیٹی تو ماری گئی تھی
44:40اور ماں بھی پوری طرح جل گئی تھی
44:41لیکن وہ کسی طرح زندہ بج گئی
44:43جے پرکاش ان سے پوچھتاچ کرتا ہے
44:45تو پتا چلتا ہے کہ بابو بچپن سے ہی
44:47ریمانڈ ہو میں رہا تھا
44:49پولیس جب اس ریمانڈ ہو میں جاتی ہے
44:51تو انہیں بابو کے پرانے دوست
44:52جیمی کا سراغ ملتا ہے
44:54لیکن جیمی اس وقت کہاں رہتا ہے
44:56یہ جانکاری ابھی نہیں مل پائی تھی
44:57دوسری طرف اکھبار میں بابو کا سکیچ دیکھ کر
45:00اس کی گل فرینڈ مینا بہت گھبرا جاتی ہے
45:02اور سمجھ نہیں پاتی کہ کیا کریں
45:04اسے ایک پل لگتا ہے کہ یہ بابو نہیں ہو سکتا
45:07لیکن اس کی سہیلی اور کلیگ
45:08اسے سمجھاتی ہے کہ یہ پکا وہی ہے
45:11اور انہیں پولیس کو سب بتا دینا چاہیے
45:13مینا پولیس کے چکر میں نہیں پڑنا چاہتی تھی
45:15لیکن اس کی کلیگ ریشمی
45:17خود تھانے فون کر کے پولیس کو ساری سچائی بتا دیتی ہے
45:20خبر ملتے ہی جی پرکاش
45:21اپنی ٹیم کے ساتھ تورنت ہسپٹل پہنچتا ہے
45:23اس وقت مینا نرس کے ہسٹل میں تھی
45:25تب ہی اچانک بابو ان سے ملنے وہاں آدھمکتا ہے
45:28بابو کو لگ رہا تھا
45:29کہ آج ہی وہ دونوں شادی کرنے والے ہیں
45:31لیکن مینا تو اس کا سچ جان چکی تھی
45:33اس لئے وہ ڈڑتے ڈڑتے بابو کو
45:35باتوں میں الجانے کی کوشش کرتی ہے
45:37ادھر جی پرکاش کو جب ہسپٹل میں
45:39مینا نہیں ملتی اور پتا چلتا ہے
45:41کہ وہ ڈیوٹی پر نہیں آئی
45:42تو وہ ٹیم کے ساتھ سیدھے نرس ہسٹل کی طرح بھاگتا ہے
45:45اسی بیچ کمرے میں بابو کی نظر
45:47مینا کے پاس رکھے اس اکھبار پر پڑتی ہے
45:50اسے سمجھ آ جاتا ہے
45:51کہ مینا اس کے قاتل ہونے کا سچ جان چکی ہے
45:54مینا بھی خود کو بچانے کے لئے
45:55اس کے پاس رکھا گرم دودھ
45:57بابو کے چہرے پر فینک دیتی اور بھاگنے کی کوشش کرتی ہے
46:00لیکن دھوکے سے باکھلایا بابو
46:02گسے میں مینا کے سر پر زور دار وار کر دیتا ہے
46:04جسے کہ اس کی موقع پر ہی موت ہو جاتی ہے
46:07جب تک جی پرکاش کمرے کا دروازہ
46:09توڑ کر اندر پہنچتا ہے
46:10بابو وہاں سے فرار ہو چکا تھا
46:12حالانکہ بھاگتے سمیں بابو اپنے ساتھ لائیا
46:14وہی چوری کا کتہ کمرے میں ہی چھوڑ جاتا ہے
46:16اور جو نیا کوٹ وہ پہن کر آیا تھا
46:19وہ بھی وہی چھوڑ جاتا ہے
46:20جی پرکاش اس کوٹ کا لیبل چیک کرتا ہے
46:22جس سے انہیں دڑ جی کا پتہ مل جاتا ہے
46:25اور اس ٹیلر کے ذریعے وہ سیدھے جمی کے گھر پہنچ جاتے ہیں
46:28کیونکہ وہ کوٹ جمی کا ہی تھا
46:30جی پرکاش جب جمی کو پکڑتا ہے
46:32تو پتہ چلتا ہے
46:33کہ بابو وہاں سے پہلے ہی بھاگ چکا تھا
46:35جمی کو اس بات کا اندازہ بھی نہیں تھا
46:37کہ بابو اتنے سارے مرڈر کر کے
46:39اس کے گھر پر چھپا ہوا تھا
46:40حالانکہ جمی پولس کو ایک بہتی ضروری بات بتاتا ہے
46:43کہ جاتے جاتے بابو
46:45اس کی شادی کے شرگون کے پیسے
46:46اور ان کے آگرہ والے ہنیمون کے ٹکٹ بھی چورا کر لے گیا
46:49اس کا مطلب صاف تھا
46:51کہ وہ اب آگرہ بھاگ چکا ہے
46:52اس کے بعد جیسے ہی جی پرکاش تھانے لوٹتا ہے
46:55ایس پی کا فون آتا ہے
46:56ایس پی اسے ترنت دلی واپس لوٹنے کی
46:58کڑک چتاونی دیتے ہیں
47:00اور کہتے ہیں کہ اگر وہ واپس نہیں آیا
47:02تو اسے سسپینڈ کر دیا جائے گا
47:04اس کے بعد وجود جی پرکاش
47:05اپنی نوکری کی پرواہ نہ کرتے ہوئے
47:07اکیلے ہی آگرہ جانے کا فیصلہ کرتا ہے
47:09جہاں ایک طرف جی پرکاش آگرہ جا رہا تھا
47:12وہیں دوسری طرف بابو ٹرین سے آگرہ پہنچ جاتا ہے
47:15اور رات کے اندھیرے میں
47:16وہاں ایک گھر میں ڈکیتی کرنے گھوس جاتا ہے
47:18اگلے دن صبح رجو آگرہ سٹیشن پر
47:21بابو کو لینے پہنچتا ہے
47:22وہ دیکھتا ہے کہ بابو نے
47:24وہاں اپنا سر منڈوا لیا تھا
47:25تاکہ پولیس اسے پہچان نہ سکے
47:27لیکن تب ہی سٹیشن پر موجود ایک کانسٹیبل
47:29رجو کو پہچان لیتا ہے
47:31پولیس کو پیچھے آتا دیکھ
47:32دونوں کسی طرح بائیک سٹارٹ کر کے
47:34وہاں سے رفو چکر ہو جاتے ہیں
47:36اسی بیچ جے پرکاج بھی آگرہ پہنچ جاتا ہے
47:38وہ وہاں کے لوکل تھانے کے انسپیکٹر سے ملتا ہے
47:41اور ان سے جھوٹ بولتا ہے
47:42کہ اس کی پوری ٹیم دلی سے روانہ ہو چکی ہے
47:44اور وہ خود کسی کام سے پاس میں ہی تھا
47:47اس لئے خبر ملتے ہی وہ پہلے آ گیا
47:49یعنی کہ وہ سسپنڈ ہونے
47:50اور بینہ پرمیشن آنے والی بات
47:52لوکل پولیس سے چھپا لیتا ہے
47:53تب ہی ریلوے سٹیشن والا وہ کانسٹیبل بھی تھانے آ کر بتاتا ہے
47:57کہ اس نے اپرادیوں کو دیکھا
47:58اور بابو نے اپنا سر منڈوا لیا ہے
48:00یہ پتا چلتے ہی لوکل پولیس
48:02پورے شہر میں ان کے نئے ہلیے والے سکیچ بٹوا دیتا ہے
48:05اور لاؤڈ سپیکر پر مائیکنگ کروا کر
48:07جنتا کو بھی الٹ کر دیتی ہے
48:09کہ ان بدماشوں کو دیکھتے ہی
48:10ترنت پولیس کو خبر کریں
48:13ادھر رجو اس منڈے ہوئے بابو کو لے کر
48:15اسی گھر میں آتا ہے جہاں اس نے پچھلی رات ڈکے دی کی تھی
48:18رجو نے اس گھر کے بڑھے مکان مالک
48:21اور اس کی پتنی کو پیٹ کر رسی سے باندھ رکھا تھا
48:23انہیں گھر میں کافی پیسے
48:25سونے کے گہنے اور پورانی بندگ بھی ملی تھی
48:27لیکن اس بندگ میں کوئی بولٹ نہیں تھی
48:29وہ اس گھر کی بڑھی عورت سے زبردستی
48:32اپنے لئے کھانا تک پکواتے ہیں
48:33تب ہی گھر میں رکھے ریڈیو پر وہ سنتے ہیں
48:36کہ پولیس پورے شہر میں ان کی تلاش کر رہی ہے
48:38دوسری طرف آگرہ کے لوکل انسپیکٹر
48:40جب دلی کے انسپیکٹر چوہان سے
48:42فون پر بات کرتے ہیں
48:43تو انہیں سارا سچ پتا چل جاتا ہے
48:45کہ جے پرکاش جھوٹ بول رہا ہے
48:47وہ سسپینڈ ہو چکا ہے اور اس کے ساتھ
48:49کوئی ٹیم نہیں آ رہی
48:50سچ سامنے آتے ہی لوکل انسپیکٹر
48:52اپنے جوانوں کو آدیش دیتے ہیں
48:54کہ دلی پولیس کی ٹیم کے آنے تک
48:55جے پرکاش کو تھانے کے اندر ہی بند رکھا جائے
48:58ادھر بابو اور رجو
48:59اس پورانی بندوق کے لیے گولیاں ڈھونڈنے بزار نکلتے ہیں
49:02وہ ایک لوہار کے پاس پہنچتے ہیں
49:04لوہار بندوق دیکھ کر
49:05ان کے لیے گولیاں بنانے کے لیے تیار ہو جاتا ہے
49:08لیکن وہ کہتے ہیں کہ
49:09اسے تیار کرنے میں ایک گھنٹے کا سمیں لگے گا
49:12وہ دونوں وہیں انتظار کرنے لگتے ہیں
49:14لیکن تب ہی اس دکاندار کا بڑھا باپ
49:16چپکے سے تھانے فون لگا دیتا ہے
49:18اور پولیس کو جانکاری دے دیتا ہے
49:19کہ وہ دونوں قاتل اس وقت اس کی دکان پر ہی موجود ہیں
49:22اب تک وہ دونوں کھالی ہاتھ تھے
49:24لیکن اب ان کے ہاتھ میں بندوق پہنچ چکی تھی
49:27جے پرکاش آگرہ کے لوکل انسپیکٹر کو سمجھانے کی کوشش کرتا ہے
49:30کہ اب ہمارا ایک ایک پل بہت قیمتی ہے
49:33کسی بھی قیمت پر ہمیں ان دونوں کو پہلے پکڑنا ہوگا
49:35ورنہ وہ کسی اور ماسوم کو اپنا شکار بنا لیں گے
49:38ادھر بابو اور رجو پولیس سے چھپ کر تاج محل دیکھنے پہنچ جاتے ہیں
49:42اور وہاں بیٹھ کر سمیں کاٹتے ہیں
49:44وہاں بیٹھے بیٹھے وہ پلاننگ کرتے ہیں
49:46کہ وہ یہاں سے کنیا کو ماری بھاگ جائیں گے
49:48اور وہاں اپنی نئی پہچان بنا کر ایک نئی زندگی شروع کریں گے
49:51لیکن تب ہی وہاں تینات ایک کونسٹیبل کی نظر ان پر پڑ جاتی ہے
49:55وہ پولیس کو دیکھ کر وہاں سے بھی بھاگ نکلتے ہیں
49:58لیکن اب وہ بھاگ کر کہاں جاتے ہیں
50:00پولیس نے چاروں طرف سے ناکہ بندی کر کے انہیں گھیر لیا تھا
50:03اور ان کے بچنے کا کوئی راستہ نہیں تھا
50:05اس کے باوجود وہ دونوں کسی طرح بھاگ کر ایک ٹرین کے اندر گھوز جاتے ہیں
50:09جے پرکاش ان کا پیچھا کرتے کرتے آخر کر
50:11ٹرین کے اندر رجو کو ڈھونڈ لیتا ہے اور اسے پکڑ لیتا ہے
50:14اپنی جان خطرے میں دیکھ
50:16ببلو تران ٹرین میں موجود ایک لڑکی کی گردن پر چاکو رکھ دیتا ہے
50:19اور جے پرکاش کو دھمکی دیتا ہے کہ اگر اس نے رجو کو نہیں چھوڑا
50:22تو وہ اس لڑکی کا گلہ کاٹ دے گا
50:24لیکن جے پرکاش اپنی جگہ سے ٹس سے مس نہیں ہوتا
50:27اور رجو کو نہیں چھوڑتا
50:29جب رجو دیکھتا ہے کہ اب بچنے کا کوئی راستہ نہیں ہے
50:32تو وہ خود کو بچانے کے لیے رونے لگتا ہے اور چلا کر بولتا ہے
50:35سر میں نے کچھ نہیں کیا
50:36سب کچھ اسی بابو نے کیا تھا
50:38میں نے تو صرف اپنی جان بچانے کے لیے اس کے ساتھ گھوم رہا تھا
50:41رجو کی یہ گداری دیکھ کر بابو کا دل ٹوٹ جاتا ہے
50:44اور اسے سمجھ جاتا ہے کہ رجو بھی باقی دنیا کی طرح بے حد مطلبی ہے
50:48اور اس دنیا میں اسے کوئی پیار نہیں کرتا
50:51بابو اب اس لڑکی کو چھوڑ کر اکے لیے بھاگنے کی کوشش کرتا ہے
50:54لیکن جے پرکاش فورتی دکھا کر اسے دبوجھ لیتا ہے
50:57دونوں کے پکڑے جانے کے بعد پولیس کے سامنے اس خوفناک دن کی اصلی سچائی آتی ہے
51:02کہانی اب فلیش بیک میں اس دن کے کرائم سین پر جاتی ہے
51:05اس دن بہت تیج بارش ہو رہی تھی
51:07اور سومن اور ساہل بس ٹوپر کھڑے ہو کر بارش رکھنے کا انتظار کر رہے تھے
51:11ساہل کہتا ہے کہ اگر ہم یہاں سے دوڑ کر جائیں گے
51:14تو صرف چھے منٹ لگیں گے
51:15لیکن سومن بولتی ہے
51:17اگر ہم بھیگ گئے تو میں ریڈیو سٹیشن پر گانا کیسے گاؤں گی
51:20تب ہی وہاں سے بابو اور رجو کی وہی ہری کار گزرتی ہے
51:23بچوں کو بھیگتا دیکھ وہ گاڑی روکتے ہیں اور انہیں لفٹ آفر کرتے ہیں
51:27دونوں بچے ان کی کار میں بیٹھ جاتے ہیں
51:29کار میں کچھ دور جانے کے بعد باتو باتو میں
51:31بابو اور رجو کو پتا چلتا ہے
51:33کہ ان بچوں کے پتا آرمی میں ایک بڑے آفیسر ہیں
51:36یہ سنتے ہی رجو بری طرح گھبرا جاتا ہے
51:39ادھر سومن کو بھی بابو کی حرکتوں اور اس کی باتو پر شک ہونے لگتا ہے
51:43تب ہی سومن گوھر کرتی ہے کہ کار کا پچھلا سیٹ کے دروازوں میں
51:46اندر سے کھولنے والے ہینڈل ہی گائب ہیں
51:48اور انہیں جان بوچ کر نکال دیا گیا تھا
51:51سومن ڈڑ جاتی ہے اور ان سے کار رکھنے اور اترنے کے لئے بولتی ہے
51:54لگن بابو کار نہیں رکھتا
51:56اور انہیں چھوڑنے سے صاف منع کر دیتا ہے
51:58خود کو خطرے میں دیکھ
51:59سومن اور ساحل کار کے اندر ہی ان دونوں بدماشوں سے بھیڑ جاتے ہیں
52:03اور ان کے بیچ ہاتھا پائی شروع ہو جاتی ہے
52:04بابو گصہ ہو کر کار میں رکھی وہی پرانی تلوار نکالتا ہے
52:08اور ساحل کے ہاتھ پر زور دار وار کرتا ہے
52:10اور یہ وہی سمیں تھا
52:11جب اس دودھ والے سلیم نے کار کے شیشے پر بچوں کا خون دیکھا تھا
52:15اور کار کا دروازہ کھولنے کی کوشش کی تھی
52:17جب وہ دودھ والا بھی نہیں بچا پاتا
52:19تو کار آگے بڑھ جاتی ہے
52:20بچے خود کو بچانے کے لئے اور زیادہ
52:23وائلنٹ ہو کر اپرادیوں پر حملہ کرتے ہیں
52:25جس سے آگے بیٹھا بدماج بھی لہو لہان ہو جاتا ہے
52:27گصے میں پاگل ہو کر رجو پچھلے سیٹ پر بیٹھے
52:30ساحل پر تلوار سے تاب اور تور کئی بار وار کر دیتا ہے
52:33ساحل بری طرح جکھمی ہو جاتا ہے
52:35سومن روتے ہوئے ان سے بھیک مانگتی ہے
52:37کہ پلیز میرے بھائی کو ہسپیٹر لے چلو
52:39ہمیں جانے دو
52:40لیکن وہ اس کی ایک نہیں سنتے ہیں
52:42اور کار کو سیدھے جنگل کی طرف موڑ دیتے ہیں
52:44ببلو کہتا ہے کہ ان بچوں نے ہمارا چہرہ دیکھ لیا
52:47اس لیے اب انہیں زندہ چھوڑنا خطرے سے خالی نہیں ہے
52:50ہمیں ان دونوں کو مارنا ہی ہوگا
52:52رجو پہلے تو بچوں کو مارنا نہیں چاہتا تھا
52:54لیکن جب لہو لہان ساحل اپنی بہن کو بچانے کے لیے
52:57دوبارہ ان سے لڑنے کی کوشش کرتا ہے
52:59تو رجو اسے گھزیٹتے ہوئے جنگل کے اندر لے جاتا ہے
53:02ساحل کی سانسے ابھی بھی چل رہی تھی
53:04اور وہ اپنی جان بچانے کے لیے آخری دم تک لر رہا تھا
53:07اس نے جیسے ہی خود کو بچانے کے لیے رجو پر ہاتھ اٹھایا
53:10رجو نے گصے میں آ کر تلوار سے اس پر اندھا دھندوار کیے
53:13اور اسے وہیں موت کے گھاٹ اتر دیا
53:15ساحل کا مرڈر کرنے کے بعد
53:17جب رجو واپس کار کے پاس لوٹا
53:19تو وہ دیکھتا ہے کہ پیچھے سے بابو نے سومن کے ساتھ ریپ کیا ہے
53:23بابو اب رجو کو بھی سومن کے پاس جانے کو بولتا ہے
53:26لیکن رجو اس گھنونی حرکت کے لیے صاف منع کر دیتا ہے
53:29اس بات کو لے کر دونوں کے بیچ بحث اور مارپٹ شروع ہوتی ہے
53:32دونوں کو آپس میں لڑتا دیکھ
53:34سومن کو موقع مل جاتا ہے
53:35اور وہ پاس پڑی لوہے کی ایک بھاری روڈ اٹھاتی ہے
53:38اور بابو کے سر پر دے مارتی ہے
53:40اس کے بعد وہ روتے ہوئے اپنے بھائی ساحل کو
53:42ڈھونڈنے کے لیے جنگل کی طرح بھاگتی ہے
53:44جب وہ جنگل میں ساحل کی لاش کے پاس پہنچتی ہے
53:47تب ہی پیچھے سے رجو اور بابو وہاں آدھمکتے ہیں
53:49رجو گصے میں ایک بھاری چیز سے
53:51سومن کے سر پر زوردار وار کرتا ہے
53:53اور سومن بھی وہیں دم توڑ دیتی ہے
53:55اور اس کے بعد لاشوں کو ٹھکانے لگانے کی جو بھی کہانی تھی
53:58وہ تو ہم نے پہلے دیکھی لیا ہے
54:00پریزنٹ میں جے پرکاش
54:01آگرہ سے اپرادھیوں کو پکڑ کر
54:03ڈلی لوٹ آیا تھا
54:04وہ اپنے سینئر ایس پی کو پوری حقیقت بتاتا ہے
54:07جسے سن کر ایس پی بھی دنگ رہ جاتے ہیں
54:09وہ کہتے ہیں کہ یہ کوئی معمولی اپرادھی نہیں ہے
54:11بلکہ خطرناک سائیکو پاتھ ہیں
54:13اس کے ساتھ ہی ایس پی جے پرکاش کی بہدوری اور کام کی تعریف بھی کرتے ہیں
54:17اور اسے پروموشن کے اگزام کے لیے تیاری کرنے کو بولتے ہیں
54:20کچھ دنوں بعد کا سین دکھایا جاتا ہے
54:22جے پرکاش اب اگزام پاس کر کے پروموٹ ہو چکا ہے
54:25اور انسپیکٹر بن چکا ہے
54:26اس کیس کی پوری ذمہ داری اب اسی کے ہاتھوں میں ہے
54:29آج کوٹ میں بابو اور رجو کے کیس کا آخری فیصلہ سنایا جانے والا تھا
54:33اسے لئے جے پرکاش خود کو انہیں کسٹڈی میں لے کر کوٹ پہنچتا ہے
54:37عدالت ان کے اس بے حد کرور اور گھینوں نے اپراد کے لیے
54:40بابو اور رجو دونوں کو فانسی کی سزا سناتی ہے
54:43بھلے ہی کانون نے دونوں قاتلوں کو ان کے کرموں کی پوری سزا دے دی
54:47لیکن جن بدنصیب ماتا پتا نے اپنے ماسوم بچوں کو کھو دیا
54:50کیا انہیں کبھی اپنے بچے واپس مل پائیں گے
54:53ریپورٹر نسار اپنے اکھبار میں اس پورے کیس اور انصاف کو لے کر
54:57ایک بہتی بڑا اور ایموشنل آرٹیکل چھاپتی ہے
55:00اس کے بعد لاسٹ میں ڈیریکٹر ہمیں اس دن کا ایک اور سین دکھاتے ہیں
55:03جہاں دکھایا جاتا ہے کہ کاش
55:05اس دن سومن نے اپنے بھائی ساحل کی بات مان لی ہوتی
55:08اور وہ کسی اجنبی کی کار میں لفٹ لینے کے بجائے
55:11پیدل ہی دوڑ کر ریڈیو سٹیشن گئے ہوتے ہیں
55:16لیکن سرکشت ریڈیو سٹیشن پہنچ جاتے ہیں
55:19اور آج دونوں مسکراتے ہوئے زندہ ہوتے ہیں
55:21لیکن افسوس
55:22حقیقت میں ایسا نہیں ہوا
55:23چاہے کتنی بھی مجبوری ہو
55:24کسی بھی انجان آدمی پر بھروسہ کر کے
55:27اس کی گاڑی میں لفٹ لینے کی گلتی کبھی نہ کریں
55:29تھوڑی دیر کے لئے بارش میں بھیگ جانا یا پریشان ہونا
55:32اپنی جان کو خطرے میں ڈالنے سے لاک گناہ بہتر ہے
55:35ساتھ ہی ہمیں اپنے گھر کے بچوں کو بھی
55:37اجنبیوں سے سادھان رہنے کی سیکھ دینی چاہیے
55:40اور گاڑی میں بیٹھتے ہی
55:41ہمیسا سرکشہ اور دروازوں کے ہینڈل جیسی چیزوں پر
55:44پینی نظر رکھنی ہوگی
55:45یاد رکھئے
55:46سماج میں گھوم رہے ایسے بے رہم سائیکوپیت
55:49اپرادیوں سے بچنے کے لئے ہماری خود کی سترکتہ
55:51سوج بوجھ
55:52اور پل بھر کی سادھانی ہی
55:53ہمارے اور ہمارے پریوار کی
55:55سب سے بڑی سرکشہ ہے
55:56تو آج ویڈیو کو یہی پر اینڈ کرتے ہیں
55:58تو کیسی لگی آج کی سٹوری کمنٹ کر کے ضرور بتانا
56:01ویڈیو پسند آیا تو ویڈیو کو لائک کر دیں
56:03اور چینل کو بھی سبسکرائب کر دیں
56:05ملتا ہے نیکسٹ ویڈیو میں
56:06ٹیک کیئر
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