00:21मुझे बारिश नहीं होती है और सब जगों हो भी जाए
00:31जीव जनतु इंसान देखी रहे आप गर्मी से परशान है पंचियां भी परशान है उसलिए इनके जीव धार के लिए
00:40और मा गंगा के से चड़नों में आके मैं पूजा पाड करता हूं
00:44और उनको जो हमारे पास अंग बस्तरम होगरे रता मा को चड़ाता हूं अगर बत्ती मालाव पुन से पूजा पाड़
00:48करता हूं फिर भगवान भासकर भगवान इंद्र को मैं प्रसंद करने के लिए अपना राग मेक प्रसुत करता हूं और
00:55उसके बाद एक मानो तो मेरी मा ए
01:11मान तू मेरी मा ना मानो तू मेरी मा पानी।
01:29इसलिए मैं गंगा वहिया के चरुणों में ही अपने आचल में उनके में बजाता हूं
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