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  • 11 minutes ago
बिहार की पत्थरकट्टी कला, बावन बूटी और पीड़िया पेंटिंग को जीआई टैग मिला है. पढ़ें रत्नेश कुमार, महमूद आलम और आलोक भारती की स्पेशल रिपोर्ट..

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00:02नालंदा की 52 बूटी को जी आई टैग मिल किया है इस कला का मुख्य केंद्र जिले का बस्वन बेगा
00:10और उसके आसपास का शेत्र है जहां पीडियों से बुनकर परिवार इस परंपरा को सहेजते आ रहे हैं इस फैसले
00:18के बाद बुनकरों में जशन का महौल है उनको उम्मीद
00:22है कि अब अच्छे दिन आएंगे जी आई टैट के बाद तो क्या होता है इसका भैलू कुछ तो बढ़ेगा
00:29और यह जिकली भी बढ़ना चाहिए इसका उमीद है उमीद है उमीद ही परी तो हम खाम कर रहे हैं
00:36बजबन से बनाने का बावल बुटी कपड़ा में शाड़ी, स
00:54इस विशिष्ट वस्तरकला में कपड़े पर बावन प्रकार के पारंपरिक बौध एवं सांस्कृतिक प्रतीकों को हाथ करगे पर बड़ी ही
01:04बारिकी से बुना जाता है
01:06हलांकि बुनकरों का कहना है कि उनके स्थिति अभी बहुत खराब है
01:29सालों से बावन बुटी का काम करने वाली लाखो देवी कहती है कि बिना सरकारी मदद के
01:35हालात सुधरने वाली नहीं है
01:37अगर सरकार दोकान नहीं देंगे आउडर नहीं देंगे तो हम कहां से बिनेंगे या कहां से हम बुनकर के बढ़ावे
01:44लगे
01:45अगर आउडर देते हैं तो हम भी बढ़ाते हैं सूता खरी देंगे बढ़ावे लगे बुनकर के भी बढ़ावे लगे
02:05उमीद करते हैं कि जी आई टैग मिलने से अब इस्थानिय बुनकरों की आए बढ़ेगी और नई पीड़ी के युवा
02:12भी इस स्वरूजगार से जुड़ने के लिए प्रिरित होंगे
02:17नालंदा से एटीवी भारत के लिए मुहमद महमूद आलम की रिपॉर्ट
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