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  • 11 minutes ago
बिहार की पत्थरकट्टी कला, बावन बूटी और पीड़िया पेंटिंग को जीआई टैग मिला है. पढ़ें रत्नेश कुमार, महमूद आलम और आलोक भारती की स्पेशल रिपोर्ट..

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Transcript
00:00गया के पतरकटी अस्टोन कराप को GI TAG मिला है और अब पतरकटी के सिल्पकारों की पहचान दुनिया भर में
00:09होगी
00:17गया की प्रसिद शिल्पकला पत्थरकटी को भागोलिक संकेतक यानि GI TAG मिलने से शित्र के शिल्पकारों में खुशी की लहर
00:27है
00:27। लंबे समय से इस मान्यता की प्रतीक्षा कर रहे कारिगनों का सपना अब साकार हुआ है।
00:35इस्थानिय शिल्पकार और दुकानदार कहते हैं कि जी आई टैग मिलने से अब इसकी पहचान राष्ट्रिय और अंतराष्ट्रिय स्तर पर
00:43और मजबूत होगी हमारी आए भी बढ़ेगी।
01:11पत्थर कटी की शिल्प परंपरा का इतिहास गौरव शाली है।
01:16माना जाता है कि 300 साल पहले गयाजी के प्रसिद्ध विश्नुपद मंदिर के निर्मान के दौरान जैपूर से शिल्पकार परिवारों
01:25को बुलाया गया था।
01:26निर्मान के बाद कई परिवार यहीं बस गए और पिढ़ी दर पिढ़ी इस कला को जिवीत रख रहे हैं।
01:53वास्ता में पथर कटी कला केवल पथर तरासने की कला नहीं है बलकि पीडियों से संजोई गई वह विरासत है
02:03जिससे अब जाकर अंतराष्ट्रिय पहचान मिलने वाली है।
02:08गया से ETV भारत के लिए रतनेश कुमार की रिपोर्ट
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