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बाघों और इंसानों के बीच का 'अनोखा बंधन', अद्भुत अविश्वसनीय अकल्पनीय में देखें पूरी कहानी
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00:26प्रच झाल
00:50एक ऐसा जंगल जहां रहते हैं बाग और बाग के कलेजे वाले लोग भी
00:55एक ऐसा जंगल जहां पर दो लोगों के नाम पर बागों के नाम रख दिये गए
01:01एक ऐसा जंगल जहां पर महलाएं भी बागों के आँख में आँख डाल कर देख सकती है
01:06एक ऐसा जंगल जहां महर्शी वालमीकी ने वालमीकी रामायन की रचना की थी
01:13जहां पर वालमी की आश्रम है और आज भी आश्रम के भीता राकर कोई भी बाद किसी पर हमला नहीं
01:19करता है
01:20एक ऐसा जंगल जहां पर बागों का आकड़ा आठ से चववन तक पहुँच गया
01:25ये अद्भुत और विश्वस्निय और कल्पनिय है
01:29नमस्कार मैं हूँ श्वेता सिंग और चलिए मेरे साथ इस अद्भुत जन्रल के और विश्वस्निय सफर पर
01:50नेपाल की तराई से सटा गंडक नदी की कल-कल से गूंजता और महर्शिवालमीकी की तपो भूमी की कहानिया समेटे
01:58विहार का वालमीकी टाइगर रिजर एक ऐसा जंगल जहां हर पग डंडी रोमाज की अद्भुत इबारत लिखती है
02:06एक ऐसा जंगल जहां की हर सरसराहट में एक अविश्वस्निय सिहरन है
02:13हर खामोशी में एक अकल्पनिय चेतावनी जहां हर हलचल किसी अद्भुत और विश्वस्निय अकल्पनिय रहस्य की दस्तक लगती है
02:46आज हम निकल पड़े हैं उसी जंगल के दिल में जहां कदम कदम पर सस्पेंस है
02:52जहां पेडों की उची दीवारों के बीच सूरज की रोश्नी भी इजासत लेकर दाखिल होती है
03:01जहां कभी अचानक सब कुछ शांत हो जाता है तो वही सन्नाटा सबसे बड़ा अलार्म बन जाता है
03:07क्योंकि जंगल में जब आवाजें बंद हो जाती है तो अकसर कोई शिकारी चल पड़ा होता है
03:19जहां बागों की आँखों में आँखे डाल कर रहती है यहां की वन दुरगा
03:49जहां बागों के नाम इंसानों के नाम पर रखे जाते हैं
04:15जहां घने जंगलों में स्थित है वो जगह है जहां महर्शे वालमीकी ने रामायन की रचना की
04:37जहां सनरक्षन की कहानी जितनी प्रेरणा दायक है जंगल का दूसरा चेहरा उतना ही खतरनाक
04:43क्योंकि यहां हर दिन इंसान और जंगल आमने सामने खड़े होते हैं और कभी कभी इस मुकाबले में सामने होता
04:50है
04:50जंगल का सबसे अप्रत्याशित योद्धा स्लॉथ बियर कि फालुत हम पर बहुत अटेक किया अच्छा बाच्चावला बहुत अटेक करता है
05:02कि एक और हाँ
05:07कहां से निकला जहां घास की हलकी सी सरसराहट भी दिल की धड़कने बढ़ा देती हैं क्योंकि ये सांपों के
05:19समराट किंग कोब्रा का इलाका है
05:25जहां गंड़क की धाराओं के नीचे खामोशी से अपने शिकार के तलाश में वो मौजूद है जिससे वालमीकी का राजा
05:32भी डरता है
05:37और जहां हरे पेड़ों की ओट में रहता है जंगल का सबसे खतरनाक शिकारी जिसकी आहट जितनी दबी है उसका
05:45हमला उतना ही जान लेवा
05:49वालमीकी के रॉयल बंगाल टाइगर की तलाश में हम वालमीकी के घने जंगलों में निकल पड़े
05:55जंगल खामोश है लेकिन ये खामोशी भी किसी अंजान खतरे की आहट लग दी हर जाड़ी के पीछे किसी बड़ी
06:07हलचल का आभास होता है
06:08हर मोड पर नजरें उसी एक जलक को तलाशती है जिसके लिए लोग सैक्डों किलोमीटर का सफर तै करके यहाँ
06:15आते हैं
06:18पता नहीं अगला मोड क्या दिखाएगा लेकिन इतना तय है कि इस जंगल में शिकारी हमें दिखने से पहले खुद
06:24हमें देख चुका होगा
06:28तो यहां पर बाग 45 साल पहले कितना था तो उस समय कहते हैं दो था और पचास से जादा
06:35हो गया है आप तो हो गया पहले टी टी टी पोर एंधू था आपका नाम दारहा है
06:54हम जंगल के उस शातिर शिकारी की तलाश में थे जो सबसे ताकत्वर जरूर है लेकिन बेवज़ा हमला भी नहीं
07:02करता उसकी पहली कोशिश इंसानों से दूर रहने की होती है
07:08तो बाग नहीं चाहता है कि आप उसको देखे तो आप उसको देखी नहीं सकता है अपाग अपने इलाके को
07:16लेकर बेहत सतर्क और संवेदन शील होता है इसलिए उसे खत्रा महसूस हो तो वह चेतावनी भी देता है
07:30जुढ है
07:36दवय अपन सब्सक्राइब
07:57जिस बाग की एक जलक पाने के लिए परियटक घंटों जंगल की खाक चानते हैं उसके साथ इन लोगों का
08:05सामना एक दो बार नहीं वलकि दरजनों बार हो चुका है
08:08कभी जाडियों के पीछे कभी नदी किनारे और कभी आमने सामने
08:16ये टाइगर जो बोलता है जैसे वो आप समझ जाते हैं कि आप टाइगर के आवाज इसे अगल बगल जाड़ी
08:25में रहता है था
08:35तो थोड़ा घेरा हो जाता है चाहिन पर एक बार ते नदीरहा होता है क्या जी चेतावनि देता है जैसे
08:48जैसे जाड़िंबट के अराम-चरूम करता रहें तो अवाज देता हैाएं कि एक बार ते अतना अवाज देंए लगा
09:01जंगल के सुनसान रास्तों पर हमारी गाड़ी दोड़ी जा रही थी
09:05घने जंगल जहां से सूरज की रोशनी भी छन छन कराती है
09:09उस जंगल की कच्ची पक डंडियों पर हम बड़े चले जा रहे थी
09:13चीतलों की मौजूदगी इस बात की तरफ इशारा कर रही थी
09:16कि अगर शिकार है तो शिकारी भी यकीनन होगा
09:23जो स्पोर्टिद डियर अमने दिख रहे हैं आपर वो भी थोड़े चोकन्ने दिख रहे हैं
09:26और बहु कि अचानक एक कॉल भी और वो दूसरे दिशा में भाग रहे हैं
09:40जंगल में अगर टाइगर देखना हो, तो क्यासे देखते हैं?
09:44कान बंद, आवाज एकदम बंद, एकदम धेरे धेरे चलते रही है अपना, अटमेटिक देखाई पड़ेगा, आवाज कीजिए तो जाड़े इन
09:55जोते हैं, आग खोला रहना चाहिए, आग कान और मुँ आदमी आपना में आवाज नहीं बताना नहीं, मुँ बंद काना,
10:09जो क
10:14पत्ते पे चलने में तो पैर से आवाज आएगा, आराम से चल लिए, जाड़ी है तो आराम से धीरे धीरे
10:22चलते जाएगे, तब जिखाई को रहे हैं
10:28आखें खुली, कान चोकनने और आवाज बिल्कुल बंद, वालमीकी के इन अनुभवी फॉरेस्ट गाइड्स की सलाह मानकर अब हम भी
10:36बाग की तलाश में निकल पड़े, जंगल की खामोशी किसी बड़े शिकारी की मौजूदगी का एहसास करा रही थी
10:46एक बड़ी चीज होती है कि जो आम तोर पर प्रेडिटर्स होते हैं वो जंगल के रंग में कैमोफलाज हो
10:54जाते हैं यानि कि आप गीर के शेरों को देखें तो वो पूरी तरीके से उसी रंग के जिस रंग
11:02का वो जंगल या फिर इससे पहले हमने आपको ताइगर्स और भी
11:12जंगल है एक दम हर्याली हर तरफ लेकिन जो टाइगर का रंग होता है वो इसमें से खिलकर नजर आ
11:20सकता है फिर वो शिकार कैसे करे फिर वो नजर आ सकता है अपने उन प्रे को शिकार को तो
11:29अब इसमें ये बताया जाता है कि भले ही इनसानी आखें उस रंग को देख सकती
11:35है इस हर्याली के बीच से लेकिन जो उस बाग के शिकार है यानि कि हिरन की जो प्रजातियां है
11:44उनके लिए वो रंग उसी में गुला मिला है उनकी आंखें कलर के उस स्पेक्ट्रम को नहीं देख सकते हुआ
12:00बिहार के पश्चिम चंपारण जिले में भारत नेपाल सीमा से सटा वालमी की टाइगर रिजर्व राज्यका एक मात्र टाइगर रिजर्व
12:08है
12:09साल के घने जंगलों, पहाड़ियों, घास के मैदानों और गंडक नदी से घिरा एक शेत्र तराई के सबसे समरिद्ध वन्यजीव
12:17रिजर्व में गिना जाता है
12:47वाहँ
12:48इन सब जगों पर मिल जाएगा लेकिन नौ्थ इंडिया में पूरा जो हमारा तरही बेल्ट है राइट प्रॉम
12:58इस पूरे पैच में इस इस इस इस इन पर यहां पर यह पर जाएग जहां कभी भी इस जंगल
13:17का राजा हमारी राह काट सकता था
13:19हमारी बेचैनी लगातार बढ़ रही थी लेकिन किस्मत को कुछ और ही मन्जूर था
13:28अचानक हमारी नजर एक स्लॉथ बियर यानि भालू पर पड़ी गाड़ी की रफतार धीमी हो गई और सब की निगाहें
13:36उसी पर टिक गई
13:38ये एक मादा स्लॉथ बियर थी जो अपने बच्चे के साथ थी
13:43टाइगर रिजर्व तो है लेकिन जो बाकी वन्यजीव यहां पर है वो भी बहुत दुरलब ये स्लॉथ बैर जिसमें आप
13:50मादा भालू को देख सकते हैं अपने बच्चे के साथ और कभी भी कोई मादा अगर अगर अपने बच्चे के
13:56साथ है तो बहुत खतरनाक स्थिती�
14:02हिल रहे हैं और शांती से बैट कर उसको बस उब्जर्व कर रहे हैं क्योंकि टाइगर के हमलों और भालू
14:10के हमलों का फर्क यह होता है कि भालू और ज्यादा आक्रामक्त माना जाता है यहां पर हलंकि वन्विभा की
14:18कोशिशों की वज़े से इस तरह की कॉन्फिक्ट्स बह
14:25विवे दिखती हैं उसमें बहुत ही डरावनी बहुत ही आक्रामक बहुत अग्रेसिव जब स्लॉथ बेर अगर कॉन्फिक्ट में आ जाए
14:35किसी इनसान के साथ
14:49इसी बीच हमें एक दूसरा भालू नजर आया हम अभी उसे कैमरे में कैद कर ही रहे थे कि तभी
14:55जाडियों में जोरदार सरसराहट हूँ
14:57इससे पहले कि हम कुछ समझ पाते एक दूसरा भालू हमारी गाड़ी के बिलकुल बगल से भागता हुआ निकले
15:13कुछ सेकेंड के लिए दिल की धड़कने जैसे थम गई
15:29शहद और दीमक खाने वाला ये सलॉट बियर या भालू
15:32देखने में भले ही सुस्त लगे लेकिन जंगल के जानकार कहते हैं कि अचानक सामना हो जाए तो ये भारत
15:39के सबसे खतरनाग जानवरों में से एक है
15:41कई विशेशग्या इसे बाग या तेलुए से भी अधिक अप्रत्याशित बताते हैं क्योंकि इसके ज्यादा तर हमले शिकार के लिए
15:48नहीं बलकि अचानक हुए आमने सामने में होते हैं
15:51हमारा भी सामना इस स्लॉट बियर से अचानक ही हुआ था
16:01स्लॉट बियर की पांच बातें इसको बेहद खतरनाक बनाती हैं बेहद अप्रत्याशित स्वभाव
16:08स्लॉट बियर अक्सर घनी जाडियों चट्टानों और जंगल के किनारों में रहता है
16:13जब कोई इनसान अचानक बहुत नजदीक पहुँच जाता है तो ये बिना चेतावनी के हमला कर देता है
16:20भागने की बजाए लड़ता है अधिकांश भालू खत्रा महसूस होने पर पीछे हटते हैं
16:26लेकिन स्लॉट बियर अकसर सीधे चार्ज करता है यहां तक की बागों को भी कई बार पीछे हटते देखा गया
16:32है
16:33खतरनाक पंजे
16:34स्लॉट बियर के हाथों के पंजे या नाखून 6 से 10 सेंटिमीटर तक लंबे हो सकते हैं
16:41यह पंजे बाग या शेर की तरह अंदर नहीं सिमटते दीमक के टीले तोड़ने और पेड़ों को फाड़ने के लिए
16:47विक्सित हुए है
16:48इंसानों पर हमलों में सबसे गंभीर चोटे अकसर इनहीं पंजों से होती है
16:53नुकीले लंबे दान
16:55स्लोट बियर के कैनाईन दांत आमतोर पर 4-6 सेंटिमीटर लंबे हो सकते हैं
17:00यह शेरों जितने विशाल नहीं होते फिर भी यह दांत गंभीर क्षत ही पहुँचा सकते हैं
17:06भुजाओं की ताकत
17:07स्लोट बियर की असली ताकत उसकी भुजाओं में होती है
17:11इसके कंधे और भुजाएं बेहद शक्तिशाली होती है
17:14यह बड़े-बड़े लकड़ी के लठों को पलट सकता है
17:17पेड़ों पर तेजी से चड़ सकता है
17:20हमले के दोरान एक ही बार में इंसान को मार सकता है
17:24हालां कि भारत सरकार भालू के हमले में हुई इंसानी मौतों का कोई आंकड़ा जारी नहीं करती है
17:31लेकिन अध्ययन बताते हैं कि मध्य प्रदेश के कानहा पेंच कॉरिडोर में
17:362001 से 2015 के दोरान स्लोट बियर ने 255 बार इंसानों पर हमले किये
17:43जिसमें तीन लोगों की मौत हुई
17:45मध्य भारत के एक अन्य अध्ययन में 2009 से 2017 के बीच 51 हमलों में साथ मौतें दर्ज की गई
17:54यानि लगभग 13 दशमलव 7 प्रतिशत हमले घातक साबित हुए
17:59ओडिशा के नीलगिरिक शेत्र में 19 वर्षों में यानि 2002 से 2021 के बीच
18:05261 मानव हमलों में 4 मौतें दर्ज हुई
18:09एक नर स्लोट वियर 80 से 145 किलोग्राम भारी होता है
18:13हालांकि बड़ा नर लगभग 190 किलो तक जा सकता है
18:17मादा का वजन 55 से 95 किलोग्राम होता है
18:21सिर से शरीर तक लंबाई 1.4 से 1.9 मीटर होती है
18:26कंधे तक उंचाई 60 से 90 सेंटीमीटर हो सकती है
18:31यानि करीब देड़ से 2 मीटर लंबा
18:34देड़ क्विंटल तक वजनी
18:354 इंच तक लंबे पंजों
18:37और लोहे जैसे मजबूत अगले पैरों वाला
18:40स्लोट बियर जंगल का ऐसा युद्धा है
18:42जो शिकार नहीं करता
19:09वालमीकी के जंगल की कहानी
19:10सिर्फ बाग और भाल्वों तक सीनित नहीं है
19:13इस जंगल की असली ताकत गो है
19:15जो दिन रात इसकी हिफाज़त में जुटी रहती है
19:18इनहीं में शामिल है वालमीकी की बंदुरगा
19:21यानि वो महिला बन करनी
19:22जो घने जंगलों में गश्ट करती है
19:25बागों की आँखों में आँखें डाल कर उनकी निग्रामी करती है
19:36ये वन दुरगा की टीम है
19:39जो कि यहाँ पर जंगलों में चाहे वन की रक्षा हो
19:44या फिर जो वन के प्राणी है उनकी रक्षा हो
19:47उन सब की रक्षा करने की जिम्मेदारी वैसे तो अलग-अलग तोलिया है यहाँ पर लेकिन वन दुरगा की यह
19:54टीम एक ऐसी टीम है जो की वालमी की नगर रिजर्व की एक बहुत अलग विशिष्ट पहचान है यह आपका
20:02नाम क्या है मेरा नाम मेरा सकुमारी है यह आज आ�
20:22KOSPI पहर है कि भाग देना यह आज लगता सब्सक्राइब पर पूरेस्ट में है आप बहुत सारे हम देखते हैं
20:42कि
20:43रेंजर्स में, फॉरिस्ट काद्स में, लड़कियां भी आ रही हैं, बिहार की ही रहने वाली हैं, तो यहां पर कितना
20:49हो गया duty अब, छे साल हो गया, लग हो गया, वन अच्छे से समझ में आता है जंगल, जंगल
20:55में कोई रास्ता नहीं होता है, जंगल में आप अपनी एहसास
21:00से चलते हैं, आपको पता होना चाहिए कि कहां पर क्या हो सकता है, तो धीरे-धीरे वो जंगल आपके
21:06अंदर आ जाता है, आपको कितना बरस हुआ, हमको सत्रा बरस हो गया आपको,
21:15वालमी की टाइगर रिजर्व की वन दुर्गा, बिहार वन विभाग की महिला वन सुरक्षा टीम का हिस्सा है, इनका काम
21:22जंगल में पैदल पेट्रोलिंग करना, अवैद पेडों की कटाई और शिकार पर नजर रखना, वन्य जीवों की गतिविधियों की निगरानी
21:29करना,
21:30और मानव जीव संगर्ष की स्थिती में वन विभाग की मदद करना है, घने जंगलों, उची घास, नदी नालों और
21:38बाग भालू के इलाकों में ये महिला वन करमी हर दिन पैदल गश्ट करती, हाथ में सिर्फ एक लाठी और
21:45दिल में जंगल को बचाने का जजबा लेकर ये
21:59पिछे से कुड़िस मारते हैं, अस्ते अस्ते, अगर दोड जाएंगा तो पर जाएगा, तो धिरे धिरा पिछे पिछे अस्ते अस्ते
22:08पिछाड घीचे है, तो पहली बार कब देखी थे, बुले क्या है कुकुरा क्या जी, तो पोंच उठाकर पर गया,
22:17हम लोग पिछे पि�
22:29पिणीरू को आपक sounding गुlements, अगर जाता है, तो भागने तो पर गेजेगा, तो भागने तो पिछाड झाएगा तो बस
22:35शांती से सब करना होता है, तब फिर कुछ नहीं होगा.
22:57सालों के अनुभव ने इन वन दुर्गाओं को जंगल की भाशा समझना सिखा दिया है
23:02पग मार्क देखकर जानवरों की मौजूद्गी का अंदाजा लगाना, खत्रे को भापना और मुश्किल हालात में भी शान्त रहना ये
23:09इन सब में ट्रेंड है
23:11ये बेसिक ट्रेनिंग का हिस्सा होता होगा कैसे एक बाग का व्यभार होता है
23:18तो क्या क्या उसमें सिखाया जाता है अपनों को क्या बताया जाता है बाग के बारे में दरसल में ये
23:24सिखाया जाता है
23:25अगर सिखार के मोमेंट में रहेगा तो उसका अलग मतलब की अलग ही उसका फेस रहेगा
23:33और नॉर्मल रहेगा तो एक अलग ही फेस रहेगा
23:37जैसे नुर्मल मश्डी में चल रहा है तो उसको पग्मार्ग से अम लोग पता कर लेते हैंMad
23:42मतलब कि शिकार का मूड में है या नहीं वग मार्ग में ने पठाकर लेते हैं
24:01में जयसे गुरूप में रहेंगे अलाथी धरती पर पीटेंगे जनौर पर अट्यक करनेई सकते हैं तो लाथी धरती पर उसको
24:09पीटेंगे तो साय आवास सुनके पिछे में आफ जयता है जैसे इधर से जनौर है इस जैसे मैं यहां नला
24:16में टाइगर देखिया हमको तो अब �
24:18इधर तो जाएंगे नहीं, इधर में को कभी भालू देखिया, बाइचांस मतलब कि ऐसा होता नहीं है रेकर्स में, इधर
24:24भालू है और इधर टाइगर है, तो हम इधर से कहीं से रश्ता बनाएगा, आप यह नहीं देखेंगे किया रश्ता
24:29है या नहीं है, मुझे यहां से न
24:48यह वन दुरगाएं इस जंगल की अंसुनी नाइकाएं हैं, जिनकी चौकसी ने सनरक्षण की इस कहानी को मजबूत बनाया है
24:57जिन जानवरों को देखकर, जिन हुखार जानवरों को देखकर किसी की रूह कहां पुठे, उन सब की रक्षा और इस
25:04वन की रक्षा के लिए यह वन दुरगा की टीम, हम इनको यहां पर पेट्रोलिंग करते हुए देखे, तो हम
25:11रुके, लेकिन हम जो आगे बढ़ने के लि
25:17अब हम वापस अपनी गाड़ी में सवार होने जा रहे हैं
25:47करती हुई अदीद की गहराईयों में समाने लगती हैं, तो कई ऐसे फन्ने खुलने लगते हैं, जो पौराणिक काल को
25:53वर्तमान के सामने खड़ा करते से, हमें जो चिंध मिलते चले गए, वो हमें हजारों साल पुरानी बालमीकी रामायन के
26:05अंतिम अध्थाय उत्तरकांड
26:12दो जाना जाना है, तो उसे भारत आना होगा उसके पाद बालमीकी रामायन के लिए लेकिन दोनों तरफ के जो
26:27नागरत हैं, उनके लिए यह जूप यहां पर आकर दर्शन करते हैं, तो
26:34हम पी को बीच, उस जंगल शेतर के बीच जहां पर एक तरफ जिप्वन जो नैशनल पार्क है, नेपाल के
26:43लिए लुष्री तरफ वालमीकी रामीकी रिजर्ट का, देखिया आगे लिखा गी है, नेपाल माना हार्विक स्वादर, गर दिछोंगा, यहां से
26:54नेपाल सुभी �
27:05हम जहां चल रहे थे, उस जगह के बारे में कहा जाता है कि उस मार्ग पर कभी साक्षाग पुरुषोत्तम
27:11राम चले थे, मा सीता चली थी, श्री हनुमान चले थे, यहां कभी रिशियों की वेद रचनाएं गुंजा करती थी
27:18कहा जाता है कि यहीं इसी जगह, हजारों साल पहले, रामायन का पहला अक्षर लिखा गया थे
27:28सुचिए, यह चहचे हाते हुए पक्षी, चारों और वन्यजीव, मिर जाने कहां से बाग के घूरती हुए आखे, यह आज
27:42ही नहीं, सवियों नहीं, युगों युगों पहले भी था, वाल्मी की आश्रम हम जा रहे हैं जहां पर महर्शी वाल्मी
27:53की ने, रामायन की रचना
27:55की थी, जहां पर माता सीता रही थी, जहां पर लवकुष का जन्म हुआ था, जंगल के बीच एक मंदिर
28:10था, मंदिर के आज पास छोटे-छोटे पवित्र स्थल थे, हमें बताया गया था, यहां का कण-कण तीर्थ है,
28:26यह सोचना ही कितना अद्भुत है, कि हम इस वक्त उसी जंगल में उसी जगह थे, हम हजारों वर्ष के
28:33उन पलों को सोच ही रहे थे, कि हमारी भेंट तभी वहां के मुख्य पुजारी राम शरण गिरी बाबा से
28:40ही, और इसी के साथ शुरू हो गया अद्भुत अविश्वस
28:49विश्णु चक्र मतलब सुदर्शन चक्रक है, उसी के रूप में ये पत्थर में उस समय में त्रिता यूग में यहां
28:56परभुवान विश्णु ने मानव करल्यान के लिए छोड़ के गया है, तो ये खुदाई में निकला था किया कभे, अच्छा
29:04अच्छा, बाबा राम श
29:14लवकुष ने भगवान राम के अश्वमेग यग्य का घोडा रोका, यहीं लवकुष ने हनुमान जी को बांधा, यहीं माता सीता
29:21का संपूर्ण शेश जीवन व्यतीत हुआ, और यहीं जीवन लीला पूर्ण करके माता सीता धर्ती में समा गई थी, हमने
29:29रामायन के अध्य
29:31लेकिन हमारे सामने आज उनके साक्षात प्रमान थे, हर दावा अविश्वस्निय था, हर द्रिश्य अध्भुत था, बाबाराम शरणगिरी हमें बताते
29:41जा रहे थे और हमारी आखों के सामने जैसे वो सारी कथाएं चित्र की तरह सामने आ रही थी, जो
29:47हमने रामायन में स�
29:49उनका समाधी इसकर है, वालमी की जी का, अच्छा, वो भी ऐसे ही है, इसको टच नहीं किया गया है,
29:59यह पत्थर-पत्थर क्यों ऐसे रखते हैं, इसे लोग मानते हैं कि अपनी मोनोकामनाय पूरी हो जाए, मेरे घर इतने
30:05तल्ले का हो जाए, इसलिए यात्री सब तिर्थी
30:24अच्छा, तो यह उतना प्राचीन स्थान है, यह पूरा, यह चितवन यहां का, चितवन जी, पास ही, हमें एक छोटे
30:34से खंभे जैसे आकृती दिखी, हमें वो पहले कोई साधारन सनरचना लग रहा था, लेकिन जब उसकी मान्यता सामने आई,
30:41तो पता चला, कि यह वही ख
30:43हमभा है, जहां लवकुष ने भगवान राम के अश्वमेध यग्य का घोड़ा बांधा था, अच्छा, इस खंबे में, इस खंबे
30:51में मान्या था, तो यह मान्यता है ने, कि जब राम जी यहां पर आये, और यहां पर उनका जो
30:57अश्वमेध का घोड़ा था, वो आगे गय
31:11मुझसे भी बलसाली कौन है, तो सब लोग लचमन जी, हनुमान जी, सब लोग आये, सब लोग पराजीत होकर चले
31:17गए, तो लास्ट में सिर्राम जी को आना पड़ा है, तो आये तो अपने ही पूत्र, अपने ही पूत्र निकले
31:25त्रेता युग में भगवान राम ने अश्वमेघ यग्य का आयोजन किया और विजय स्वरूब घोड़ा दोड़ाया, उत्तरकांड में वर्णन मिलता
31:33है कि घोड़ा जब बाल्मी की आश्रम पहुँचा, तो श्री राम और माता सीता के पूत्र लवकुष ने उसे बांध
31:39लिया, सूचना मिलने पर लक्षमन, भरत और शत्रुघन घोड़ा छुड़वाने आये, किन्तु लवकुष से युद्ध में पराजित हो गए, हनुमान
31:48जी आये तो उन्हें भी लवकुष ने बंधक बना लिया, बाद में खुद श्री राम को आना पड़ा, लवकुष न
31:54उनके उपर धनुष की प्रत्यंचा खींची, तो माता सीता ने उन्हें रोप दिया, श्री राम सीता समवाद के पश्चात सीता
32:02जी धरती माता की गोग में समा गई, क्या हम वाकई उसी स्थान पर खड़े थे, विश्वास नहीं हो रहा
32:10था, लेकिन जो सामने है, उसमें सं
32:13देह कैसा, कदम कदम पर आस्था का डेरा था, लगकुष गालिल, श्रद्धा और मान्यताओं ने 112 किलोमीटर फैले जंगल के
32:27बीच इस स्थान को सद्यों पुराने विश्वास का केंडर बना दिया था,
32:34यह अमरलता का पेड़ और अमरलता के इस पेड़ से बना हुआ यह जूला, जिस जूले पर कहा जाता है
32:41कि युगों पहले लवकुष जूला करते थे, आज भी लवकुष के जूले के नाम से यहाँ पर प्रसिद्ध है और
32:50पूजनिय है, लोग यहाँ पर आते हैं, इस पर �
32:53जूलते हैं, सूची की प्रकृती भी अपने आप में सनरक्षित करके रखती है, हमारे युगों पुराने पौराणिक इतिहास को, इस
33:04प्राकृतिक जूले की शाखें पेड़ों से होर्ती हुई जंगल में दूर तक फैली थी, दावा किया जाता है कि यह
33:10शाखें कई किलो म
33:12किलो मिटर तक फैली हुई है, ऐसा लग रहे है जिसे बैठनी की जगे बनी हुई है उधर, प्राकृतिक नेटरली
33:20है, ऐसे बना हुआ है, यह लोकुस जूला है, इसको अमरलता का जाता है, यह साथ किलो मिटर तक चला
33:28जाता है, अच्छा जी, ऐसे करके देखिए, वहां प
33:42बहुत सारे लोग, बच्चे, स्कूल के स्टूडेंट सब जूलते थे, अद्बुत है, यह पूरा सघन वन क्षेत्र है, चारों तरफ
33:51हिंसक जंगली जानवरों से घिरा हुआ, इन सब के बीच यह मंदिर परिसर है, हमारे मन में सवाल था, कि
33:58क्या भालू बाग जैसे जान�
34:11हम लोग तरहते हैं, यह निकल आजाता है, पता नहीं माता जी का किर्प� ATT opinion के अदेकर ग्र्पन संग्यारा
34:22कर अथा एप क्वारों से चलते रहता है, हम लोग सोर्त शाएगा पुछ सौन बीजर की जीरेंगे, पड़़ काता है,
34:35हम हम लोग कर बच्पन से नहीं पड़े हह
34:41अच्छा आदमी को सुता नहीं है एक दम मेरी क्यल है तो अद्भुत विश्वस्न और कल्पनी इस तरह का घटना
34:51होने के बाद में भी हम लोग इंसानों को सुरक्षित हैं जिसके मन में आस्था वो सुरक्षित है आंप
34:59अद्भुत था ये बात सुनना कि मंदिर परिसर में जंगली जानवर प्रवेश तो है इंसानों के सामने भी अक्सर आ
35:07जाते हैं लेकिन हमला कभी नहीं करते हैं लोग यहां पूरी श्रद्धा से आते हैं और जंगली जानवरों से पूरी
35:14तरह निडर और निश्चिंत होकर अ
35:33परिसर के बीच ही माता सीता का एक मंदिर बना हुआ हम वहां गए तो और भी अद्भुत मान्यताओं से
35:39हमारा परिचय हुआ
35:40यही अस्थान है उस समय से खुला रहता होगा उसको च्छतरी लगा दिया गया है और यहां पर सिंदूर से
35:51पूजा होती है माता सीता की तो आप कह रहे हैं कि राम जी ने मना किया कि मत जाओ
35:57सीता सीते सीते करते रह गए देकिन माता नहीं वह पाताल राम जी के हाथ में बस
36:10जो अभी प्रयोग में आता है यह डोरी बनता है उनी से अच्छा यह डोरी उस से बना हुआ है
36:17यह अच्छा हम कौतूहल से एक-एक प्रमान को देख रहे थे लेकिन अद्भुत अविश्वस्निय अकल्पनिय मान्यताओं के सिरे और
36:30लंबे होते चले गए हमने वहां अद्
36:37पर ही चल सकते हैं क्योंकि जनली जीवों का खत्रा होता है लेकिन यह एक ऐसा चूटा सा प्रांगन हो
36:44जाता है कि भले कम संख्या ही में श्रधालू क्यों नहीं जैसे अभी तो हम लुग सब हैं जिस समय
36:49नहीं भी रहेंगे जब वो अकेले या तो लोग रहेंगे तब भी �
36:53पन्यजीब बाकी हर जगे पर जाकर वहां पर वो शिकार करते हैं यहां पर आकर उनका आक्रामक जो व्यवहार है
37:01वो यहां नहीं रहता है यहां पर आकर वो दूसरे ही रूप में दिखते हैं इसके बाद फिर हम टाइगर्स
37:07की खोज में आगे बढ़ गए
37:17हम थोड़ा ही आगे बढ़े थे कि एक खिरन के अलार्म कॉल में हमको चौपा दिया
37:36टाइगर्स की जो टेरिटरी यह भी पहार जैसा है यहां पर टेरें बड़ा निकस्टा है तो गना जंगल है उपर
37:46से ऐसे पहाड बीच में चोटी पहाडियां मतलब आजाती है
37:50यह किस टाइगर की टेरिटरी है उनकी तो आइडेंटिफाइड होती है यह यहां पर अभी दिस्टेरिया में जा रहा है
37:58यह यह क्योंकि यहां पर पक्ते इतने पड़े हैं यहां पर पंग मांक्स स्पोट करना और मुश्किल होगा
38:18जो हां पर पंग मांक्स स्पोट आखना पूस्क जो किरोगा यह लुद्धा युद्धा को आख अधागर जिस्ट्री त्रेट्री मांकंता निशान
38:46घटेना परिसकी हाईट कितनी होगी कि यतना उंचाई पर उसने है ये मेडियू सभाइब कान पर यह ने के
38:56अच्छा नीचे तेट भालू का है अच्छा राइब तो ढूटेर इस चार नियुए यह आफे हवा टा है
39:15शुक्त करा यह अधित शाइव हाथ कर शाइड़न।
39:31निवीं कर खोंद कर ताइड़न।
39:35यह भी दिखराई एक भाई जिसकी बात आप कर रहे थे वहीं क्या हूंड़्य।
39:41कि अगेड केंपभी एक पिल्यों नहीं बिख रिख राइधान के लिख दिख दीज वह जा इस बैठा एंट अब दुट
39:51ज्यार एंग अब वार फापस जा रहा है
39:54और बार गाद के हैं जस्त एक तो सिकंड की बात है। debate काईगर्स यहां के बहुत खुब्सूरत
40:01बहुत है बहुत ज्यादा यहां पर इस जो सफारी आप स्टार्ट करिएगा तो यह एरिया आता है उस टाइगर का
40:09नाम है अंगद अराउंड 290 केजी का है वो मतलब चलते हो उसका देखिया उसका और आ रहता है ना
40:16गजब का अरा रहता है उसका देखने कर देखने के लिए �
40:20जमा दिया तो फिर कोई उठाड नहीं पाए तो मतलब लोकल लोग अंगद कहते हैं हम लोग ने मतलब उसका
40:25नाम ऐसे रखा क्योंकि बहुत ही बल्की दिखता हूं मतलब बहुत ही स्ट्रॉंग दिखता है वो इक तर से लगता
40:30है टाइगर की मतलब है इस टाइप पर आता ह
40:47और हवा की सरसराहट सुनाई दे रही थी तब ही जंगल के एक मोड पर गाईड अचानक गाड़ी रुखवाता है
40:57सामने जाडियों के बीच कुछ हल्चल हूदी है
41:04पहले सिर्फ एक चमकती हुई काली बुरी लकीर दिखाई देती है फिर बहुत धीरे उठने लगती है कुछ ही सेकंड
41:11में एक विशाल किंग कोब्रा हमारे सामने तो
41:17किंग कोब्रा जाधे रह रहे है या टाइगर का साइटिंग जाधे रहे है दोनों इक विशाल कोब्रा दुनिया का सबसे
41:33लंबा विशैला साम है जिसकी लंबाई 18 फीट से अधिक तक पहुंच सकते है
41:38इसका सहर सीवे नर्वस सिस्टम पर हमला करता है और मिनटों में जान जा सकती है एक बड़े किंग कोब्रा
41:47के एक ही दंश में इतना विश होता है कि कई इंसानों या एक भाथी तक को मार सकता है
41:52हालां कि इसकी एक खासियत ये भी है कि ये बिना वजह हमला नहीं करता और अपसर इंसानों से दूर
41:59रहना पसंद करता है
42:00लेकिन अगर इसे घेर लिया जाए रास्ता रोक दिया जाए या ये खुद को खत्रे में महसूस करें
42:05तो फन उठाकर सामने खड़ा ये जंगल का किंग कुछ ही पलों में मौत और जिंदगी के बीच के फासले
42:13को खत्म कर देता इससे बाग तक दूर रहते हैं
42:32टो ये सामने घड़ी आल का है
42:46तो ये भी मगरमच की तरह बाहर निकल के अभी धूप है तो ये बास्किंग कर रहा है
42:52टेंपरेचर रेगुलेशन के लिए ये लोग धूप में आते हैं
42:55तो अभी ये रिवर बैंग पे, सैंड पे बैठ जब भी बैठते हैं ये लोग तो बास्किंग करते हैं अपना
43:00टेंपरेचर रेगुलेट करने के लिए
43:01अच्छे लिए हम लोग आगे चलते हैं
43:04वालमीकी की गंडक के किनारे जब आप पानी को देखते हैं तो आपको सिर्फ शांत पानी ही नजर आता है
43:10लेकिन पानी की सतह के नीचे एक ऐसा शिकारी छिपा होता है जो घंटों बिना हिले डुले अपने शिकार का
43:17इंतजार कर सकता है
43:19ये है गंडक का मगरमच जिसको अकसर नदी का बाग भी कहा जाता है
43:25एक वयस्क मगरमच की लंबाई 10 से 13 फीट तक और वजन 200 से 300 किलोग्राम या उससे अधिक हो
43:33सकता है
43:34इसके जबडों में 60 से ज्यादा नुकीले दांथ होते हैं और काटने की ताकत 4000-1000 PSI तक पहुंच सकती
43:41है
43:41पानी में इसका शरीर किसी टॉटपीडो की तरह काम करता है जबकि इसकी पूँच इतनी शक्तिशाली होती है कि एक
43:49जटके में शिकार को संतुलन खोने पर मजबूर कर दे
43:52उपर से भले ही सुस्त दिखे लेकिन पानी के नीचे इसकी ताकत और तेजी अविश्वसनिय होती है
43:59वाल्मी की टाइगर रिजर्व की गंडक नदी में इंडियन घडियाल और मगरमच दोनों पाए जाते हैं
44:05पहली नजर में दोनों एक जैसे लगते हैं लेकिन अंतर काफी बड़ा है
44:10घडियाल की पहचान उसके लंबे बेहत पतले मुह से होती है जिससे वो मचलियां पकड़ता है
44:16इसके विपरीत मगरमच का मुह चोड़ा और ताकतवर होता है जिससे वो मचली से लेकर बड़े जानवरों तक का शिकार
44:24करता है
44:24घडियाल आम तोर पर इंसानों के लिए खतरनाक नहीं माना जाता जबकि मगरमच मौका मिलने पर बड़ा शिकार भी कर
44:31सकता है
44:33तो एक और अद्भुद सफर हमारा यहाँ पर पूरा हो रहा है और विश्वस्निय और कल्पनिय यादें यहाँ से लेकर
44:39हम आगे बढ़ रहे हैं
44:41वाल मीकी नगर के इस टाइगर रिजर्व से अभी के लिए इतना ही अभिशेक सिंग, कैमर परसन हितेश कुमार और
44:48सेयद मोसन के साथ मुझे दीज़े इजाज़त
44:50देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए आप देखते रहे है आज तक
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