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34 साल पुराने मुकदमे में उम्र ने कैसे दिलाई रिहाई? देखें वारदात
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00:00नमस्कार में हूं शम्स ताहर खान और आप देख रहे हैं वारदात
00:03साड़े पांच करोड पेंडिंग केस का बोज या दबाओ क्या होता है
00:08इसकी जिन्दा तस्वीर देश की एक अदालत से सामने आई है
00:12पचासी साल का एक बज़र्ग जो अपने पैरों पर खुद से चलना छोड़ी है
00:17कमर से उपर खुद को उठा भी नहीं पा रहा है
00:21उसे अदालत में पेश किया जाता है
00:2334 साल पुराने एक मुकदमे के सिलसले में
00:27सच मुझ गानून के हाथ बहुत लंबे है
00:30आदमी मर जाता है पर केस नहीं मरता
00:46की नाम है अपने के?
00:48जी प्रया है
00:54कानून तखान को इस रुखा
00:56ब्यक्ति मर जाता है येस नहीं मरता है
01:02सच मुझ गानून के हाथ बहुत लंबे होते है
01:06आदमी मर जाता है पर केस नहीं
01:09पर कानून के उसी लंबे हाथ को कबर में पाउं लटका है
01:13इस बुजर्ग तक पहुँचने में इतना वक्त लग गया
01:17कि अब खुद कानून को लगता है
01:19के इसे सजा देना शायद खुद कानून को सजा देना है
01:27लहाजा इसे पकड़ा कोट तक लाएं
01:30सजा सुनाएं जेल भेज़ां और फिर छोड़ दिया
01:42कानून के लंबे हाथ को फिलहाल किनारे रख दे
01:45आदमी मर जाता है पर केस नहीं
01:48ये लाइन इस बुजर्ग के जरीए एक सवाल बनकर उचल रहा
01:52एक ऐसा सवाल जो सिस्टम के लिए है
01:55कोट और इनसाफ के लिए है
01:58कानून के ऐसे लंबे हाथ का क्या फायदा
02:01जो किसी के ग्रेबान तक तब और उस अम्रे में पहुचे
02:04जब ना उसे अपना केस याद हो नचरू
02:07और यहां तक क्या अपना नाम पता ला
02:14कानून के ऐसे लंबे हाथ का क्या फायदा हो
02:16जो किसी को तब सजा दे जब वो खुद मौत का इंतिजार कर रहा हो
02:22कानून के ऐसे लंबे हाथ का क्या फायदा
02:25जो इस मुल्जम या मुजरिम को खुद उसके पहरों पर बिना किसी सहारे चला कर
02:30कोट की तहलीज तक ला सके
02:33कानून के ऐसे लंबे हाथ का क्या फायदा जो तब सजा दे
02:38जब सजा पाने वाले को इस बात का एहसास ही न हो
02:41कि पुलिस क्या होती है अदालत क्या या जेल और घर में क्या फर्क होता है
02:47पर सचमुच कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं
02:51आदमी मर जाता है पर केस नहीं
02:57कंकाल में तब्दील हो चुके इस बुजर्ग का नाम दीप राए है
03:01उम्र बताना जरूरी है
03:03क्योंकि दीप राए के इसी उम्र से आपको कानून के लंबे हाथ की असलियत समझ में आएगी
03:09दीप राए इस वक्त 85 साल के है
03:12अब दीप राए की कहानी सुनाओ
03:14उससे पहले इनकी चंद तस्वीरे दिखाना चाहता हूँ
03:18वह इसलिये क्योंकि इन तस्वीरों को देखते ही आप भी कह उठेंगे
03:22सक मुच गानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं
03:31बिहार के वैशाली जिले में मौझूद यहाजीपूर की एक अदालत है
03:35रोजाना की तरह अदालत में भीड़ थी
03:38पर तभी लोगों की नजर एक ऐसी तस्वीर पर पड़ती है
03:42कि वो उसे देखने से खुद को रोक नहीं पाते
03:45दो लोग दीपराय को सहारा देकर कोट के अंदर ला रहे हैं
03:49पर दीपराय शायद पांच कदम भी एक बार में नहीं चल पार है
03:53ठक कर बैट जाते हैं
03:59फिर उटते हैं फिर सहारा मिलता है फिर कुछ कदम चल पड़ते हैं
04:04दीप राए के आगे आगे दो तीन पुलिस वाले चल रहे हैं
04:08यानि कायदे से इस वक्त दीप राए पुलिस का स्टडी में अदालत में पेश किये जा रहे हैं
04:14काईदे से होना तो ये चाहिए कि इनी पुलिस वालों को दीप राय को शिगंजे में लेकर कोट तक ले
04:20जाना चाहिए
04:20पर क्या कीजेगा पुलिस वालों को भी लगा कि जो शक्स पूरी तरह खाड़ा भी नहीं हो पा रहा है
04:26जो कमर तक छुक कर चल रहा है उसे पकड़कर सो दो सो कदम भी कैसे ले जाया जाए
04:32इसलिए पुलिस वाले आगे आगे चल दिये और दीप राय के रिष्टेदाद खुद ही उन्हें पकड़कर पुलिस वालों का काम
04:40करने लगे
04:41उम्र का बोज इतना कि जब दीप राय ठक कर बैठते हैं तो घुटने में उनका सिर आ जाता है
04:47खैर किसी तरह बड़ी मशक्कत के बाद दीप राय अब कोट के अंदर पहुंच जाते हैं
04:53जाहर है कोट रूम की तस्वीरे होती नहीं क्योंकि अंदर कैमरा जाता नहीं
05:10शीशे भी जाए और फिर गोलियां चलाएं पर आपको एक बात तो बताना भूली गया
05:15ये सब कुछ 34 साल पहले हुआ था साल था 1992 बेशक कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं
05:24पर इतने लंबे भी नहीं कि बुढ़ापे में आने वाली मौत को डंडा दिखा कर रोक ले अब 92 का
05:30मामला था
05:3134 लंबे साल हो चुके थे तो हुआ ये कि 9 आरोपियों में से 4 मर गए पर जाहिर है
05:38केस थोड़ी मरेगा
05:40तो केस चलता रहा और उनी में से एक ये दी प्राइबी थे
05:45ये 1992 का मामला है गुराबं को ठाना अच्छे तुम्हर से एक अडालत रहा है और अपनी पक्ति के साथ
05:55बहचे थे
05:55इसको जन्कारी मिलि कुँनके घर के जाने वाले रास्ते में ये अभित्यों द्वारा शिशा कर्थोग्रा बिछा जा रहा है इसके
06:05जन्कारी मिलते हुआ के बिलोत गिया इतना ही बात को लेकर अभित्योंने उन्टा धोली चला गया गया तो हमसंदान हुआ
06:14अरोपबत समर
06:24तो कोट्रूम के अंदर 34 साल बाद वकील दलील सब कुछ हुआ, फिर अपना फैसला सुनाया, 51 की उम्र में
06:33आरोपी बने दीप राय को, 34 साल बाद 85 की उम्र में दोशी करार दिया गया,
06:39उनके साथ के बागी चार लोगों को भी अदालत में दोशी माना, सभी को 10-10 साल की सजा सुनाई
06:45गई, अब साहिर है, सजा कार्टने के लिए जेल ही जाना था।
07:34अदालत ने जैसे ही दीप राय को गुनहगार ठराया, कोट रूम से दीप राय,
07:39फिर सहारे के सहारे वापस बाहर आए, दीप राय के केस का फैसला आते ही, अब मीडिया दीप राय के
07:46सामने थी,
07:47माइक उनके मूँ पर था और दीप राय कुछ इस अंदाज में मीडिया के सामने बैठे थे,
07:53तभी एक सवाल गूँजा, क्या हुआ, आज जट सहब क्या फैसला सुनाए, कोई जानकारी है, कोई जानकारी मिला है?
08:20जाहिर दीप राय कुछ समझते बूचते, तभी तो जवाब देते, मीडिया वाले भी समझ गए, तो सब निकल लिये,
08:27इसके बाद अब कोट से इसी आलम में उन्हें इस जेल तक पहुँचाया जाता है, खबर तो ये भी है,
08:32कि खुद जेल स्टाफ ने जब दीप राय की शकल में अपने नए कैदी को पहली बार देखा, तो वो
08:39भी हैरान कम, परेशान ज्यादा नज़र आए, हैरान इसलिए थ
08:43कि इसने इस उम्र में क्या कर डाला, और परेशान ये सोच कर, कि इसकी देखभाल कैसे करेंगे, पर शायद
08:51दीप राय और उनके बुढ़ापे को देखकर खुद कोट को लगा, कि जो ठीक से खड़ा नहीं हो पा रहा
08:57है, जो सहारे की बिना चल नहीं सकता, जिसके मुझ तक
09:12कि सजा का एक अलग मजा है, तीन साल की सजा पाने वाला कोई भी मुجरिम आसानी से जमानक पर
09:18बहर आ सकता है, लहाजा दीप रायको तीन साल की सजा देकर अदालत में एक साथ, दो काम किया, जेल
09:25वालों की परेशानी दूर कर दीप रायको बहार निकाल कर, आखरी घड़ी
09:31में उसकी देख भाल के लिए उसे उसके परिवार को सौंप दिया
09:35जो दीपार आए हैं उनकी उमर आज के तिती में पचासी वरस थी
09:39तो नियाले ने उनकी उमर और बीमारी को देखते हुए
09:45नियाले में अज देखते हुए नियाले ने उनको तीन परस की सजा दिया
09:56यहाजेपुर की वही जेल है यह मोटर साइकल उसी जेल से बाहर आ रही है
10:02आला कि बाइग पर तीन लोगों का बैठना ट्रैफिक नियम का उलंगन है
10:06लेकिन यहाँ एक मजबूरी है
10:08क्योंकि जेल से घर तक की दूरी काफी दूर है
10:11लेहाद एक रिष्टेदार बाइक चला रहा है
10:13बीच में दीप राए बैठे हैं
10:15और पीछे दूसरा रिष्टेदार उन्हें पकड़ कर बैठा है
10:24जेल से दीप राए अपने घर आ चुके है
10:26चारपाई पर लेटे है
10:28परिवार के लोग उनकी सेवा में लगे
10:30शायद इस वक्त उन्हें खाना खिलाया जा रहा है
10:33एक रिष्टेदार उन्हें खाना खिला रहा है
10:35बाकि दो लोटा पकड़े सामने खड़े
10:38पचासी साल पहले दीप राए जब पैदा हुए होंगे
10:41तब शायद उन्होंने उस वक्त वाइरल या वाइरल बुखार तक के बारे में नहीं सुना होगा
10:46अब उम्र के इस पड़ाओ पर
10:48मीडिया उन्हीं दीप राए से उनके वाइरल होने की बात पूछ रही है
10:52सत्मुच यह वाली अजीब बात जीत है
11:25कहां थे आपका लले पिए जेल में क्यों डाल दिया था आपको
11:33सरकर डाला था तो सरकार आपने कोई घटना किया था कि सरकार आपको जेल में डाल दिया
11:43करिए और को याप नहीं थे ढ infinat
11:49को
11:50बबाव आपको गटना में नहीं नथे तल्ट पिर आपकोड़ हो Don 동enow पने साथ को करए नहीं है हम को
12:00क fidelity मैंने अधिमें नहीं त हमको कहला जेल भेज रहे
12:04जाब प counseling was कि नहीं सुनता है कहने सुनता जाअब का वकील था भाको मत्या यह कै किर से
12:16जो जो जो जो हम पहला बत्यागे हम तो आपके पास आए हैं आपका बात सुनने आए हैं हमारा बात
12:22कर तो
12:31अच्छा ठीक है आप सेहत के सेहत ठीक हो मन मिजाज खुश हो घर आगे लगाई छो खर परिवार के
12:40बीच में आगे ते ठीक लग रहा है ठीक लग रहा है अच्छा कुछ खाना हुना खाय थे कल कुछ
12:49खाना हुना खलू रहा कल है
12:53अब दीपराय के बाद मीडिया का रुख उस घर की तरफ था जिस घर के लोगों पर
12:5834 साल पहले दीपराय और उनके साथी यह रिष्टेदारों ने गोलिया चलाई थी
13:03उनसे भी पूछा गया कि कोट के इस फैसले पर वो क्या कहते हैं क्या उन्हें कानून के लंबे हाथ
13:10में इंसाथ दिलाया
13:1234 साल के लंबे इंतजार के बाद में आखिरकार आप लोगों को कोट ने नयाय देही दिया
13:18लेकिन सब लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिरकार 34 साल पहले 1992 में क्या हुआ था कि उससा भी
13:26शाने आए घर के बगल दूरा पर आगए वह वह क्यों सिसा अपना बदमासी से और क्या पतलब वो दिखाना
13:36चाहते थे हां हम बदमास हैं रंगार हैं और क्या इनको घर से नह
13:42अपना जाये अँगर अधिसके बार उसको बार लोग और सिसा को भी शाता है इसको पर जुद गोली बोली चलाया
13:53है चाहर्ब
13:54अदालत रहा है, संभूर रहा है, उदेश रहा है, राम उदेश रहा है, राम उदेश, राम सक्षी देविचारगों के लगा,
14:01उसको बाद प्राइब खाना गिया, ठाना भी यहां, डाक्टर के भेजे, अप लोग कोट का जो फैसला है, उससे संतूश्च
14:13है, अब जो साब ज
14:23चाहिए था, हर उपी जो से, उस सब उनको सजा में दोलत बात रहती, चौटीस साल बात चीजे बदल गई,
14:29अब सरकार का जो कानून अनियम है, वही लग होगा, हम लोग के हाथ में हैं, तीन गोली खाने वाले
14:38राम सिंग को क्या इंसाफ मिला, चौटीस साल पहले गोली चल
14:53चाहिए में अच्छा लगता है कि खानून के हाथ बहुत लंबे है, भले ही आदमी मर जाए, केस नहीं मरता,
15:01विकास कुमार वैशालिव आज तक
15:08कतल के एक मुझरिम को अदालत, अमर कैद की सजा सुनाती है, मगर वो सजा के बीची पेरोल पर जेल
15:15से भाग जाता है, इसके बाद पूरे बारा साल बीच जाते हैं, वो पुलिस के हाथ नहीं लगता हाला कि
15:21इस दौरान वो छुपता नहीं है, बलकि मुंबे में बड़े ब
15:392018 में एक फिल्म आई थी, ठक्स ओफ हिंदुस्तान, बड़े बजट की इस फिल्म में अमिताब बच्चन और आमिर खान
15:46जैसे बड़े सितारे थी, हाला कि ये फिल्म बॉक्स आफिस पर कोई कमाल नहीं कर पाई, पर जब ये फिल्म
15:53बनी, तब खुद इस फिल्म के डारेक्
16:07इस फिल्म के चार साल बात, रनवीर सिंग और बोमन इरानी स्टारर एक और फिल्म, जैश भाई जोरदार आई, 2022
16:15में आई इस फिल्म में भी वो ठक काम कर रहा था, पर किसी को उसके बारे में जरा भी
16:20भनग नहीं लगए
16:242025 में एक और फिल्म आई, मिट्रो इंदिन, आदित तरोय कपूर, सारा अली खान और पंकच त्रिपाठी जैसे स्टार के
16:32साथ बनी, इस फिल्म के गाने काफी मश्यूर है, डारेक्टर अनुराग बासू की इस फिल्म में भी वो ठक काम
16:38कर रहा था, पर क्या मजान जो कोई �
16:41उसकी असलियत जान पाता, उसी साल यानि 2025 में साथ के दिगच सुपरस्टार मोहनलाल की एक फिल्म आई, एल्टू एमपुराना,
16:53इस फिल्म में भी वो ठक मौजूद था, पर कोई उसकी असलियत पहचान नहीं पाए, यकीन मानिए, नट्रलाल जिन्दा होता,
17:04तो खुद �
17:05उसका फैन हो जाता, फिल्मी पर्द्य और वेब स्रीज के जरिये इस अदाकार को देश भर में करोणों लोगों ने
17:11देखा होगा, पर इन करोणों निगाहों से गुजरने के बावजूद, गुरुवार एक किसमई से पहले, खुद एहम्दाबाद पुलिस की नजरे
17:19कभी �
17:20इस बहचान नहीं पाई, इस ठग अदाकार की तारीफ तो बहुत हो गए, अब तारुफ भी करा देते हैं
17:30इनका पहला नाम है हेमंत नगीन दास प्रशुत्तम दास मोदी
17:34इनका दूसरा और छोटा नाम है हेमंत मोदी
17:38तीसरा नाम है स्पंदन मोदी
17:40और इनका फिल्मी नाम है ट्विंकल दवे
17:44इतने नामों वाला ये शक्स इतने फिल्मी चेहरों वाला ये शक्स
17:49जानते है कौन
17:50एक कातिल जिसे कतल के इल्जाम में 18 साल पहले उम्र कैट की सजा हुई थी
17:56लेकिन सजा पूरी करने से पहले ही
17:58वो जेल से ऐसा भागा
18:00कि हम्दाबाद पुलिस उसे ढूंड ही नहीं पाए
18:03और कमाल ये कि वो छुपा भी नहीं
18:05बलके फिल्मी पर्दों और टीवी के पर्दों पर बार-बार अपना चेहरा
18:09अलग-अलग किरदारों में दिखाता रहा
18:12पर कोई उसे पहचान ही नहीं पाया
18:17कल एम्दाबाद क्राइम ब्रांच ने एक हेमन दंगितास मोधी करके
18:23बारा साल से पर्दो जब परोप को अम्दाब से पकड़ा डाला है
18:46तो डिसीबी साहब से स्ठक ती जिन्दगी की जल्कियां तो आपने सुने अब चलिए
18:51पूरी फिल्म दिखाता है
18:53बात 2005 की है
18:55तब हेमंत मोदी एहंदाबाद में रहा करता था
18:58कॉलेज में पढ़ रहा था
18:59जनरिस्ट बनना चाहता था
19:01कुछ दिक्कतें आई तो वकील बनने की सोची
19:04पर इत्फाक से इसी दोरान
19:06नरिंदर उफ नानो यश्वंद कामले नाम के एक शक से जगड़ा हो गया
19:10इस जगड़े के दौरान हेमंत मोदी
19:12उसके भाई सचिन मोदी
19:14और पाँच दूसरे लोगों ने
19:16नरिंदर का कतल कर दिया
19:18बाद में सातों पकड़े गए
19:1927 अगस्ट 2008 को अहम्दाबाद की एक अदालत ने
19:23नरिंदर कामले के कतल के इलजाम में
19:25हेमंत समयत सभी साथ आरोपियों को
19:28उम्र कैद की सजा सुना दी
19:30इन सभी को अहम्दाबाद के ही सावरमती जेल भेज दिया गया
19:33बाद में वहां से
19:35इनको महसाना जेल में ट्रांसफर कर दिया गया
19:37सजा सुनाय जाने के बाद हेमंत मोदी कैदी नंबर 311-46 बन गया
19:43जेल गए हुए अब सभी आरोपी को 9 साल हो चुके थी
19:509 साल जेल में रहने के बाद 25 जुलाई 2014 को
19:55गुजरात हाई कोट ने हेमंत मोदी को 30 दिनों की पेरोल पर रिहा कर दी
19:59बस यहीं से हेमंत की असरी कहानी शुरू होती
20:0324 अगस 2014 को पेरोल खत्म होते ही हेमंत को वापस जेल लोटना था
20:08लेकिन वो जेल लोटा ही नहीं
20:10उसकी तलाश के बाद एहमंदाबाद पुलिस ने हेमंत को जेल जमपर करार देते हुए
20:15उसे भगोडा घोशित कर दिया
20:17अब हेमंत की तलाश शुरू हुई लेकिन वो पुलिस को मिला ही नहीं
20:21धीरे धीरे वक्त बीता गया और पुलिस भी उसे भुलाती गए
20:25हेमत को जेल से पेरोल पर भागे अब 12 साल हो चुके थे
20:302026 आ चुका था
20:32तब ही 2026 यानि ग्रोवार के दिन
20:35एहंदाबाद क्राइम ब्रांच को एक मुख्बिर से एक खबर बीटी है
20:38खबर ये कि पिछले 12 साल से फरार उम्रकैत की सजा पाया एक कैदी
20:44एहंदाबाद में एक घर में छुपा है
20:45मुख्बिर की खबर पर पुलिस ने उस घर में दबिश दी
20:49और घर में मौझूद एक शक्स को हिरासत में ले लिया
20:53शुरवाती पूचताच और उसकी पुरानी तस्वीरों से
20:55उसके नए हुलिये का जब मिलान किया गया
20:58तो सारी सच्चाई सामने आ गए
21:00हिरासत में लिया गया शक्स कोई और नहीं
21:03बारा साल पहले जेल से भागा
21:05उम्रकैद की सजा पाने वाला हेमंत मोधी था
21:08जिसका अब नया नाम था ट्रिंकल दवे
21:14ट्रिंकल दवे करके उसमें अपना नाम रखा था
21:17उसके बाद उसने मुंबई में और अमदावत में अलग-अलग सीरियल और फिल्म में काम किया था
21:22जेल से भागने के बाद हेमंत ने अपना पूरा हुलिया बदल लिया था
21:26ताकि कोई उसे पहचान न पाए
21:28धीरे धीरे उसे फिल्में मिलने लगी
21:31और फिल्मों के साथ साथ अब वो वेब स्रीज में भी काम करने लगा।
22:04अब चुकी 12 साल बीच चुके थे, नाम, हुलिया, शक्री, सब कुछ बदल चुका था, लियाज आहेमंत को लगा कि
22:10अब पुलिस उसे कभी पकड़ नहीं पाई, इसी के बाद वो कुछ दिन पहले एहमदाबाद आये, लेकिन एहमदाबाद में जहां
22:17वो रुका, वहां एक श
22:31कहाने का एक दूसरा पहलू ये है, कि हेमंत के भाई समेट बाकि चिन छे लोगों को उम्रकैद की सजा
22:37मिली थी, वो सभी अपनी अपनी सजा पूरी कर अब एक आजाद जिंदगी जी रहे, लेकिन हेमंत को अब अपनी
22:44बाकि की सजा काटने के लिए वापस जेल जाना होगा
22:48क्या पता, इतनी फिल्मों और वेफ स्रीज में काम कर चुके हेमंत मोदी बड़े, अब कोई फिल्म बन जा है
22:58अतुल्ति वारी, एहम्दाबाद आज तक
23:04तो वारदात में फिलाल इतना ही, मगर देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए आप देखते रही आज तक
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