00:00अजादी के 78 साल पीत जाने के बाद भी गाउं में आवागमन के लिए पूल और पक्की सड़क ना हो
00:07तो सावाल खड़ा होना भी लाजमी है
00:09जब दो साल पहले टेंडर हो चुका हो और पूल कर निर्मान ना हो तो ये राज सरकार और जिला
00:15प्रसासन के भी फलता कहलाईगी
00:17ऐसा ही कुछ इस्थिती हजारी बाद के इचाग प्रकंड के आरा गाउं की है जहां ना तो पक्की सड़क है
00:23और नहीं नदी पार करने के लिए पूल
00:25गरामिनों ने सरम दान कर लखड़ी का अस्थाई पूल तयार किया है
00:30मौनसूल के वक्त ये गाउं टापू में परिवर्तित हो जाता है
00:34यहां के लोग गाउं से सहर या प्रकंड मुख्याले नहीं पहुँच पाते हैं
00:38सबसे अधिक परिशानी अस्थ लोगों की होती है जिनें खटिया या फिर कंडाय में लाद कर अस्पताल लाना पड़ता है
00:45गाउं की मुख्या भी कहती है कि दो साल पहले पूल का टेंडर हो चुका है
00:49लेकि सरकार और प्रसास्निक उपितलता के कारण पूल का निर्मा नहीं हो पाया
00:54जिस कारण पूरा गाउं का संपर्क तूड़ जाता है
00:57विकास योजना भी धरातल पर उतारना चुनावती से कम नहीं है
01:01अंचायत के अंतरगत मेरा एक आरा गराम है जिसमें पोखरिया से आरा जाने के लिए रास्ता बहुत ही खराब है
01:09जिसमें लकड़ी का फूल बनाया गया उसी से आवागमन अभी हो रहा है
01:13मगर यहां पे टेंडर लगभग दो साल पहले हो चुकी है
01:18जो अभी तक कार्य को आराम भी उसके स्टार्ट भी नहीं किया गया है
01:23बलकि यह कारी को तो दो साल पहले ही सुरू कर देना चाहिए जो अभी बहुत बिलम हो रहा है
01:29और वहां के जनता को काफी परिसानी का जहिनना पड़ रहा है
01:55इसा तो नहीं होना चाहिए पर उनका समयदन का यही कथन है
02:01ग्रामीनों का कहना है कि अजादी के साथ दसक से अधिक समय बीत जाने के बावजूद
02:06गाउं को ना तो सड़क मिली और नहीं अस्थाई पूल कर निर्मान हो सका
02:10बरसाद के दिनों में गाउं का संपर्ख मुक सड़क से लगभख कर जाता है
02:22किसी के बीमार होने या गर्वती महिला को अस्पताल ले जाने की सिति में काफी परिसानी होता है
02:28कई बार खाट के सहरे मरीजों को मुक सड़क लाना पड़ता है
02:32देखिए मेरा डाढ़ा पंचाद सबसे सुदूर छितर है
02:36और डाढ़ा पंचाद के अंतरगर ग्राम आरा टू पोखरिया
02:40ये पत्र निर्मान के लिए बहुत परियासरत गाढ़ा पंचाद की मुक्या जी रही है
02:45और वहाँ दो साल पहले ही स्विक्रित हुआ है
02:48टेंडर हो चुकी है लेकिन अभी तक ये कार सुरू नहीं हो पाई है
02:52या खेद की बात है
02:53बहुत सारा दिकत है
02:55वहाँ देखा जाये तो अम्बूलेंस आज तक इतिहास में आज तक अम्बूलेंस वहाँ नहीं पहुंची है
03:00उन लोग अपने अपने ब्यावस्था से या खटिया पे किसी तरह से टांग करके ले लाय जाता है
03:07आज तक बेच्में अब देखेंगे नदी पड़ता है और कुछ जंगल भी पड़ता है और बहुत ऐसा जगह है जहां
03:12भी काम किया जा सकता है
03:13लेकिन तक द्वरा अभी काम नहीं सुरू किया गया है यहां बहुत खेदबी बात है
03:18I was very lucky.
03:19The road was not used to be made,
03:21there was no pool of water,
03:23and the people went to the road.
03:25The people who went to the village,
03:25gave them the village,
03:28but when the village saved the village,
03:31the people went away.
03:32The couple left,
03:33they were not used to be made by the village.
03:36This is a huge road,
03:38the road has never been made.
03:40The road has not been made,
03:42so we need to be made to the village,
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