00:00हमें नोबल प्राइज से ही है, हमारी क्यूरी निकालेंगे, जिनको दो-दो नोबल प्राइज मिले थे, हम कैसे निकालेंगे, हमारी
00:05लड़कियां तो प्राइमिरी में निकल जाती है
00:09मेरा बैचमेट वो यूएस गया, वहाँ उसका मास्टर्स कम पीच्डी प्रोग्राम था, तो वहाँ से बोलता है, कि जिस फ्लोर
00:15पर मेरे गाइड बैठते हैं, उस फ्लोर पर चार नोबल प्राइज विनर्स बैठे हुए हैं, फोर नोबल लॉरियेट्स, ओन अ
00:22सिंगल फ्लो
00:37कि नोबल प्राइज पाना है, तो सबसे पहले तो शिक्षा विवस्था, किसी लायक होनी चाहिए, हमारे याँ तो शिक्षा का
00:43ये हाल, कि उत्तर प्रदेश में अभी एक-दो दशक पहले तक, खुद सरकारे बोर्ड पर इक्षाओं में नकल कराया
00:49करती थी, यह हो गया, द
00:51यह दो, कि दस्वी पास है, कहाई के लिए पर इसान करते हो गरीब के लड़के को, भाय को बोला
00:55मैंने गरीब के लड़का, क्योंकि गरीब की लड़की तो दस्वी तक पहुचती नहीं है, गरीब की लड़की तो प्राइमरी मेरी
01:02ड्रॉप आउट कर जाती है, दस्वी तक
01:04कैसे पहुचेगी।
01:05हमें नोबल प्राइज से यह हमारी क्योरी निकालेंगे।
01:08जिनको दो-दो नोबल प्राइज मिले थे।
01:09हम कैसे निकालेंगे।
01:11यह चीजे दिन रात देखता हूँ और बहुत बुरी लगती है।
01:14बड़ी चोट लगती है कि क्या हमारी संभावना थी और क्या हम बनकर रह गए है।
01:18लाज हमको लेकिन नहीं आती, गुरूर नहीं तूटका।
01:20अब मैं हमसे कह रहा हूँ जब तक हमारे यह खोखला आत्मविश्वास तूटेगा नहीं ना।
01:24जब तक राश्ट्रिय स्वाभिमान के नाम पर हम बस अतीत की धूल फाकते रहेंगे, तब तक हमारे वर्तमान में कोई
01:30प्रगति नहीं हो सकती।
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