00:00घर में हर टाइम खाना हम ही क्यूं बनाए, हमारे हस्बंड क्यों नहीं बना सकते
00:06मिरे पर्फशो की शिकायत आ जाती है, बोलते हैं कि
00:08मैं पहले भी बहार का काम करता था, ये घर पे रहती थी, कुछ घर का का म करती थी
00:12और आपने जो क्रांतिकारी वक्तव वे दिये हैं
00:15उसके बाद से अब मैं बाहर का और घर का दोनों का काम करता हूँ
00:22और उनकी ये शिकायत मैं सुनता हूँ
00:23मुझे फिर लज्जा आती है कि ये मैंने बैचार एक साथ क्या कर दिया
00:28घाई अगर मैं कहता हूँ कि घर का काम सबसे उचा काम नहीं है
00:32तो मैं आपको कहा रहा हूँ घर के काम से उपर का कोई काम करो और महनत का और श्रम
00:37का और साहस का काम करो
00:39मैंने ये थोड़ी कहा है कि घर का काम छोड़ करके अब कुछ मत करो
00:42सेब सेब होता है
00:43खोदी उठा के खा लो
00:45बीवी को क्यों परिशान कर रहा है
00:47उसे जंदिगी में कोई सार्थक काम करने दो
00:49और किसी बहुत विशेश विंजन की लालसा हो
00:52तो विशेशत के बैठे हुए हैं रेस्टरॉन में उनसे अमगवा लो
00:55घर का काम छोड़ा नहीं जाता है
00:58जब कोई उससे उचा काम मिल जाता है
01:00तो स्वतह छूट जाता है
01:02तो जो लोग घर का काम छोड़ रहे हों गलती कर रहे हैं
01:05कुछ उचा तलाशी है
01:07जब कुछ उचा मिल जाता है
01:08तो नीचे वाली चीज अपने आप धीरे-धीरे विदा हो जाती है, सोय में छूट जाती है
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