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  • 11 hours ago
दृढ़ संकल्प से ही कर्म की पूर्णता

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00:01नमस्कार, मैं श्वेता तिवारी आप सभी का अविनंदन करती हूँ, आईए आज आपको सुनाती हूँ राजस्थान पत्रिका के प्रधान संपादत
00:10विद्या वाचसपती गुलाब कुठारी जी का स्पंदन में प्रकाशित आलेख, जिसका शुरिशक है द्रिण संकल्प से
00:19ही कर्म की पूर्मता, हमारे रिश्यों ने जीवन के कुछ सिध्धान प्रतिपादित किये, जिनको जानने के बाद जीवन के प्रती
00:28एक निश्यत रिष्टी का स्वतह ही विकास होने लगता है, यहां विकास का अर्थ मात्र भौतिक विकास नहीं है, यहां
00:37विकास का अर्थ
00:37पुर्शार्स चतुष्टय के रूप में देखा जाएगा
00:41वर्ण एवं आश्रम के अनुकूल देखा जाएगा
00:44अविद्या और विद्या के परिप्रेट्षय में देखा जाएगा
00:48प्रक्रति के साथ जो व्यक्ति का तादात में है उस रूप में देखा जाएगा
00:53उस व्यक्ति के व्यष्टी और समष्टी दृष्टी कोन के संदर्भू में देखा जाएगा
00:58शारिरिक, पौधिक और मानसिक विकास तो आत्मिक विकास में सहायक बनते हैं
01:04विकास का अर्थ प्रान उर्जाओं का उर्ध्वगामी होना है
01:08अर्थात, शरीर में प्रतिष्ठित आत्मा का संसकारित होकर मानव मूल्यों को आचरण का अंग बना लेना
01:17इसके लिए संकल्प चाहिए द्रण संकल्प
01:20स्वयम के प्रती कठोर प्रतिबधता का संकल्प
01:24संकल्प मन की अवस्था को कहते हैं
01:28ुपूर्ण प्रति पूर्ण प्रतिबद्ध होता है।
01:58पूर्ण प्रतिबद्ध होता है।
02:28આદીકાર है ફલો મે કભી નહી કરમણ્ય વાધ કારસે માં ફલેશુ કદાચન માં કરમ ફલ હીતુર ભૂર માતે સંગો�
02:51કા આધાર બદલતા રહતાય સ્વાપ્ણ ભી બદલતે રહતે હેતે અધીતર વ્યકતી આપણે જ્યાણ અનુભ્વ એવમ
03:15પીદી કા પીતીતલ કરનિણ્ળ ખાદ્ય તી પીતુતે ખીતુત્તી
04:12ुच्छा होती है।
04:14इसके बिना संकल्प की पूर्णता कैसे हो सकती है।
04:18इसके लिए व्यक्ति सानिथ्य ढूंडता है।
04:21अच्छा सानिथ्य व्यक्ति के मन में संकल्प के प्रती सकारात्नक बातावरन बनाये रगता है।
04:28प्रेडणा देने का कारे करता है।
04:31मनोबल बनाये रगता है।
04:33vyachty, sanasia ke maadhyam se sankalpa ke putin ekagri bana raha hai.
04:39sataysay aoashyake aur vishwasnniya substitute unique easutvara ka maana jata hai.
04:44Yahaan kisihi prakarakit koyishnaka nahi ho sakti.
04:47Surabh ofhin ho sakti hai kiandu shaktimahan alamban ka bada srot ba san Like cái about water
04:53Как teraz, the vнд насhta, bez ito nga t pergunti.
04:54Vyachty, siri jhukane mane sangkoj bhi nahi grahtta.
04:57Arshtha ke saath sanaitya bada jata hai.
05:00संकल्प की और गती बनी रहती है
05:04व्यक्ति अद्रिष्ट शक्ति के साथ
05:07अपने मनों भावों का आदान प्रदान करता रहता है
05:10खरी खोटी सुनाता रहता है
05:12आलंबन नहीं छूटता बल्कि मजबूत होता जाता है
05:16यही एकागरता को शने शने तनमेता में बदल दिता है
05:21तनमेता में व्यक्ति इस्थिर भावापन हो जाता है
05:24उसकी स्वाभाविक तथा वातावरन जन्य चंचलता समाप्त हो जाती है
05:30व्यक्ति अपने लक्षय के साथ एकाकार हो जाता है
05:34उसकी सारी शक्तियां, सारा समय केवल लक्षय के लिए प्रेरित रहते हैं, अन्यथा कुछ होता ही नहीं, फिर क्यों करिच्छा
05:43पून नहीं हो।
05:44तर्मेता का ही दूसरा नाम ध्यान है, अपने लक्षय में खो जाना ही ध्यान है।
05:50व्यगृता के कारण जो चंचलता थी, वह एकागृता के कारण समाप्त हो गई, परिवर्दित हो गई, सानिध्य भी डुड़कर एक
05:59हो गया, उसकी शक्ति का व्यक्ति में अवतरन हो गया, कार्यक कुशलता पूर्वक संपन हो गया, सफल हो गया, जिस
06:08इच्छा शक्ति के मू
06:20होती चली रहती हैं, और सफलता उसकी जूली में होती है, नमस्कार
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