00:00क्यों किसों में हम इतने मशूर हो गए
00:06तेरे बिच्छरने से अंदर से छूर हो गए
00:11हमारे पास अब कोई आस्तक नहीं
00:17हमारे मिलने की कोई आस्तक नहीं
00:22तु शेहर भर को क्यों सुनसान कर गया
00:26दिल को बसाके फिर वीरान कर गया
00:34नावाजशे भी काफी तो नहीं होती
00:38घम मोहबत इजाफी तो नहीं होती
00:43मोहबतों में बस वही ठीक रहता है
00:49जो दिन रात घम के करीब रहता है
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