00:28बेंगलोर में जब शिविर हुआ था तो वहां मैं भी तीन-चार दिन रात में दू बजे आता था बैडमिंटन
00:29खेलने
00:29उसे इनकार नहीं कर रहा है। लेकिन उससे कहीं कहीं कहीं ज्यादा महत होता है।
01:02लाखो करोडो साल तक जंगल में ही था तो उसको भी अभ्यास इसी बात का है कि सूरज धले सो
01:06जाओ और सूरज उगने वाला तुम भी उग जाओ आप जब उसके विपरीद जाते हो तो उस शरीर पर उस
01:11बात का बोज तो पढ़ता ही है लेकिन मैं ये भी कहा रहा हूं कि शरी
01:27लूप देखो और धूल देखो और अगर मैं अकेले हो करके कुछ पढ़ना भी चाहूं चुपचाप ध्यान में बैठना भी
01:32चाहूं तो कामकाजी आदमी हूं पूरी एक संस्था है लोग आते हैं दिन भर कोई ये पूछरा है कोई वह
01:38पूछरा है बारा एक बज़े तक त
01:39बसा ती मिंगे
Comments