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Transcript
00:00कभी गर्मियों में जा करके छट पे लेटें आप में से कितने लोग जो कभी खुली छट पे सोयें तो
00:04गर्मियां चल रही है मानली जून का महिना है मौनसून आने वाले तो बादल चाही रहते हैं ठीक चांद क्या
00:09करता है कभी छुपता है कभी प्रकट होता है कभी आधा सा �
00:12दिखता है जैसे कोई बच्चा लुका चिपी खेल रहा है और दीवाल के पीछे से ऐसे मूह निकाल के और
00:17उनको न ढूंड़ो बहुत देर तक फिर अपने आप निकल करके आते और कैते इधर हूं इधर हूं मुझे पकड़ो
00:20तो चांद भी जैसे वैसे कर रहा हो कभी-कभी �
00:22बादल के पीछे पूरा छुप जाता है बस उसकी परिदी दिखाई देती है और फिर बादल वह एकदम चमक उठता
00:27है उसमें ऐसे कोने में देखा सिल्वर लाइनिंग आ जाती है अब चांद का दिखना भी सुख है ना दिखना
00:32भी सुख है क्योंकि सभागिवश अभी तक
00:34आपने चांद से कोई व्यक्तिकत रिष्टा नहीं बनाया है और वह हो जाए तो फिर देखिए दिल कैसे टूटेगा एक
00:39रात में डेड़ सो बार टूटेगा जितनी बार वह छुपेगा उतनी बार आप कहेंगे हो गई बेवफाई पूरे रहो ना
00:43अपने आपने फिर पू
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