00:00औसत से ज़्यादा तापमान है दिल्ली में
00:06चलो कि दारनाथ चलते हैं मज़ा आएगा
00:07मेरा तीर्थ है न तो बिल्कुल फाइव स्टार तीर्थ होना चाहिए
00:11खट से गाड़ी निकले दिल्ली से और खट से जाकर के सीधे कि दारनाथ में खड़ी हो जाए
00:15ये मत करो कि सड़क इतनी चौड़ी कर दी है कि ज़वाने भर की गाड़ियां परवत पे चड़ जाए
00:20सड़क तो और पतली रखो ताकि वही जाए जो सचमुच जाने लायक है
00:251976 में भी एक कमिटी गठित की गई थी
00:30मिश्रा कमिटी मेरे ख्यास उसका नाम था
00:32उसने 1976 में बोल दिया था कि ये सब यहां जो तुम विकास के नाम पर कर रहे हो
00:36रोक दो बिल्कुल इन पहाडों में ये सामर्थे नहीं है कि तुमारे विकास को बरदाश्ट कर पाएं
00:41लेकिन हमको विकास चाहिए
00:43जाधातर लोगों को तो शिवत्तु का कुछ पता भी नहीं है
00:46ये तो वहां पर जाते हैं बॉक्स को टिक करने
00:49कि हाँ वही तीरत भी कर लिया तीरत भी कर लिया उसकी फोटो लेंगे फेस्बुक पर लगाएंगे
00:53और शेखी बखारेंगे कि मैं तो होके आया हूँ अभी अभी बद्री के दार
00:57वहां तो भी आवशकता ये है कि जो रिलीजियस टूरिजम भी होता है उसको भी रिगुलेट किया जाए
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