00:00क्या बिजेपी अब एक पत्रकार को बंगाल की सियासत का बड़ा चहरा बनाने जा रही है?
00:05एक ऐसा शक्स जो कभी अकबारों में नेताओ का विशलेशन करता था.
00:11आज कुछ सत्ता के सबसे ताकतवर कमरों में पहुँच चुका है.
00:14और सबसे बड़ी बात, पहली बार विधायक बना और सीधे मंत्री भी बन गया.
00:20नाम है स्वपन दासकुक्ता.
00:22तो क्या बिजेपी बंगाल में एक पत्रकार को अपना नया राशनितिक चहरा बना रही है?
00:28और आखिर क्यूँ पार्टी नित्र्थू का उन पर इतना भरोसा है? आईए समझते हैं.
00:34पश्चिम मंगाल में नई बिजेपी सरकार के गठन के बाद मुख्य मंत्री शुबेंदू अधिकारी की कैबिनेट का विस्तार हुआ.
00:41कई नय चहरों को जगा मिली लेकिन जिस नाम ने सबसे ज़ादा ध्यान खीचा वो है स्वपन दासकुप्ता.
00:48राज विहारी विदान सबा सीट से पहली बार विधायक बने स्वपन दासकुप्ता को सीधे कैबिनेट में शामिल कर लिया गया.
00:56ये फैसला इसले भी खास है क्योंकि स्वपन दासकुप्ता की पहचान पहले एक पत्रकार लेखक और राजनितिक विशलेशक के तौर
01:04पर रही है.
01:05लेकिन सवाल ये है कि एक पत्रकार आखिर मंत्री कैसे बना और विजेपी उसे इतनी एहमियत क्यों दे रही है?
01:12पत्रकारिता की दुनिया का बड़ा नाम स्वपन दासकुप्ता। कई दशकों तक उन्होंने देश की प्रतिष्टित अंग्रेजी मीडिया संस्थानुप में काम
01:21किया है.
01:22वे टाइम्स ओफ इंडिया समेथ कहीं बड़े प्रकाशनों से जुड़े हुए हैं। उनकी पहचान सिरफ पत्रकार के तौर पर नहीं
01:29बलकी एक प्रभाव शादी राश्नितिक तिपडी कार के रूप में भी बनी।
01:342015 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मभूशन से समानित किया। यानी राश्निति में आने से पहले ही उनकी राश्ट्र पहचान
01:42बन चुकी थी। लेकिन फिर कहानी ने एक नया मोड ले लिया।
01:462016 में ततकालीन राश्ट्र पती प्रणब मुखर जी ने स्वपन दासकुपता को राज्यसभा के लिए मनोनित किया। ये किसी भी
01:55पत्रकार के लिए बड़ी उपलब्दी मानी जाती है। राज्यसभा में रहते हुए वे राश्ट्र राश्निति के और करीब आ गये।
02:03इसी
02:13के लिए उन्हें राज्यसभा की सदस्यता तक छोड़नी पड़ी। लेकिन राश्ट्रीती का पहला चुनावी इंतिहान उनके लिए असान नहीं रहा।
02:21वे टीम सी उमीद्वा रामेंडू सिंग राय से चुनाव हार गये। अब आम तोर पर चुनाव हारने के बाद नेता
02:27का राश्नितिक कम हो जाता है लेकिन स्वपन दास्गुपता के साथ कहानी उल्टी दिखी। 2021 की हार के बावजूद बिजेपी
02:36नित्रत्व ने स्वपन दास्गुपता पर भरोसा बनाए रखा। उन्हें राश्नितिक रूप में साइड लाइन नहीं किया गया। राश्नि
02:56पूरी तरह अलग रहा। स्वपन दास्गुपता ने जीत दर्च की और पहली बार विधायक बने। लेकिन असली सप्राइज इसके बाद
03:05आया। विधायक बनने के कुछी समय बाद उन्हें सीधा कैबिनेट में शामल कर लिया गया। यानि पहली बार मेले और
03:12फिर सीधा म
03:13यही से सवाल उठने लगे कि क्या बिजेपी उन्हें बेंगाल के बड़े राजनितिक चेहरे के तौर पर तयार कर रही
03:20है।
03:43हैं एक शिक्षित, बौधिक और राश्च्र पहचान वाला चेहरा। यही वज़ा है कि चनावई हार के बाद भी पार्टी का
03:50भरोसा उन्हें पर बना रहा। हाला कि इस पर अलग-अलग राई भी है। समर्थों को कहेना है कि राशनिति
03:56में ऐसे लोगों की जरुरत है जो �
03:58राशनिति, इतिहास और समाज की समझ रखते हैं। वहीं आलोचक कहते हैं कि पत्रकारिता से राशनिति में आने वाले लोगों
04:06की निश्पक्षता पर सवाल उठ सकते हैं लेकिन एक तथिस साफ दिखाई देता है।
04:11स्वापनदास गुपता का राशनितिक कद आज पहले से कहीं जादा बड़ा हो चुका है और उनका मंत्री बनना सिरफ एक
04:18पद नहीं बल्कि बिजेपी की बंगाल रणिती का भी संकेत माना जा रहा है।
04:24कभी नेताओ पर लिखने वाला स्वापनदास गुपता आज खुछ सत्ता के केंद्र में हैं।
04:28अब देखना होगा कि क्या बिजेपी उन्हें सिरफ मंत्री तक सिवित रखती है या बंगाल में अपना बड़ा राशनितिक चहरा
04:35बनाती है।
04:35आप क्या सोचते हैं क्या एक पत्रकार सफल नेता बन सकता है।
04:39अपनी राय हमें ज़रूर बताएं।
04:41मैं हो जस्वी कौशिक आप देख रहे हैं One India Hindi
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