00:03अज उर्दू गदब और शेरो शायरी की दुनिया की वो शामा गई जिसका डर हर चहने वाले को था
00:10अपनी मकमली अवाज और बहुत आसान लफजों से करोडों का दिल जीतने वाले
00:15महान शाय डॉक्टर बशीर बदर साहब अब हमारे बीच नहीं रहे
00:1991 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया
00:23उनके जाने से साहित्य जगत में एक ऐसा खाली पन आ गया है जिसे कभी भरान नहीं जा सकता
00:30बशीर बदर साहब ने मुपाल इस्थित अपने आवास पर अंतिम सास ली
00:34वो पिछले काफी लंबे समय से उम्र संबंधी बीमारियों और डिमेशिया से जूज रहे थे
00:40इस बीमारी का असर इतना गहरा था कि उम्र के आकरी बढ़ाव में वो अपनी ही लिखी हुई खुबसूरत गजले
00:47और अपने करीबियों तब को भूल चुके थे
00:49पिछले कुछ महीनों से उनकी तबित लगतार बिगड रही थी और आखिरकार अब वो नहीं रहे
00:56मुईचलिया बताते हैं उनके परिवार में कौन कौन है
00:59अगर बशीर बद्र साहब के परिवार की बात करे तो उनके जिन्दगी के सफर में कई उतार चड़ावाई
01:04साल 1987 के मेरट तंगे में उनका घर उनकी अनमोल किताबे और सब को जल कर खाक हो गया था
01:12जिसके सदमे में उन्होंने अपने पहली पत्नी को भी खो दिया था
01:15पहली पत्नी से उनके दो बच्चे नुसरत भद्र जो बॉलिवुड के एक मशूर गीतकार है
01:22जिन्होंने देवदास फिल्म में भी गाना गाया था
01:25और बेटी सबाव वाहिद
01:27वही इसके बाद उनके जिंदगी में डॉक्टर रहत बद्र आई जिससे उन्होंने दूसरी शादी की
01:31दूसरी पत्नी से उनका एक बेटा है जिसका नाम तैयब बद्र है
01:35बशीर बद्र साहब अपने पीछे अपनी पत्नी और बच्चों को रोता भी लगता भरिवार पीछे छोड़ गए
01:41बदा दे 15 फरवरी 1935 को यूपी के आयोध्या यानि की फैजाबाद में जन्में
01:46बशीर बद्र साहब ने अलिगड मुस्लिम यूनिवर्सिटी से पीच्डी की और वहीं प्रोफेसर भी रहे
01:52उन्हें आम बोलचाल की इतनी सरल भासा में गजले लिखने के लिए जाना जाता था कि एक आम इंसान भी
01:59उनकी शायरी से जुड़ जाता था
02:01महीं उन्हें पद्मिश्री और साहित्य अकादमी पुरसकार से भी नमाज जा चुका है लेकिन अब वो हमारे बीश नहीं रहे
02:09भगवार उनकी आत्मा को शांती दे
02:11फिलाल हमारे इस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक शेर और चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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