00:00आचारे जे, आजकल पेरंट्स छोटे बच्चों के साथ बहुत ही दुर वैवार करते हैं
00:04तुमसे बोला था ना कोई शरारत मत करना
00:07उनको मारते पीटते हैं ये बोल कर कि इसमें उनकी भलाई है
00:10मारने की जरूरत क्यों पड़ रही है?
00:27या तो उसको जानवर समझो या उसको इनसान समझो
00:41जानवर क्या होता है देह मात्र
00:43उसके पास कोई ज्यान नहीं है उसके बस शरीर है
00:46शरीर है और शरीर से उठती हुई भावनाई है
00:51मनुष्य वो होता है जिसके पास देह और भावनाओं से आगे
00:55जिसके पास ज्यान होता है चीतना होती है वो मनुष्य होता है
00:59आप अगर उसको पीट रहे हो इसका मतलब आप उसको मनुष्य नहीं मान रहे है क्योंकि चेतना को परिवर्थित करनी
01:08के लिए तो बात करनी बढ़ती है
01:10बच्चे का व्योहार ही तो बदलना चाहते हो न आप तो व्योहार तो तब भी बदल जाएगा अगर बच्चे की
01:15आप चेतना बदल दो
01:17आप बच्चे का विवहार
01:19बच्चे की चेतना को बदल कर क्यों नहीं बदल पा रहे
01:23तो आप एक ही तरीका जानते हो
01:24देह का
01:25उसी देह के तरीके से आपने बच्चा जन दिया है
01:29तो आगे भी आप देह का तरीका ही जानते हो
01:31कि इसकी पिटाई लगा दो
01:33बच्चे का व्योहार बदल जाएगा
01:34आप उससे बात करो न
01:36आपको बात करनी लेकिन आती नहीं क्यों
01:38आपको बद ये पता है कि बात नहीं
01:40लात काम करती है तो आप लात लगाते रहते हैं
01:43अपने बच्चों को
01:44बात भी तो काम कर सकती है ना
01:46बशर्ते आपको बात करना आता हो
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