00:00आज तक की टीम आज उस एतिहासिक भोशाला के अंदर पहुची है जहां 11 सदी की आकरित्याम और और आशेश
00:07आज धी मौचू थे
00:18आज तक भोशाला के भीतर पहुच गया है और फैसले के अगले ही दिन क्या इस्थिटी है वो भी हम
00:25आपको बताएंगे लेकिन इससे पहले हम आपको लिखाते हैं किन चीनों को एसाइन अपने रिपोर्ट में शामिल किया तो उसमें
00:29सबसे पहले आपको बता देते हैं यह ग�
00:39रने ची बताया है कि एक डर्वाजा है जिसे बंद कर दिया गया था और साथी में यह रिद्दी और
00:44शिद्धी जो दो प्रतिमाय आपको दिख रही है लेकिन इनको अगर आप देखे तो सब के जो चहरे हैं वो
00:52घिस दिये गया है जो आकरितिया थी उन्हें घिस दिया गया
01:06और ये उपर जो आप देख रहे हैं ये गणेश जी है जो इस दर्वाजे के उपर बने वे थी
01:14बोशाला के अंदर दर्वाजे छोटी और कम उचाए के बनाए गए हैं
01:18इसके पीछे की वज़ा ये है कि देवी देवताओं के दर्वार में जब भी शर्दालू जाए तो शीर जुका कर
01:25जाए
01:25परिसर के अंदर थोड़ा और आके बढ़ने पर एक विशाल काय शीला लेख है जो प्राकृत भाशा में लिखा गया
01:33है
01:34और हम आपको लेके चलते हैं भोशाला के उस हिस्से में जहां पे बकायदा शीला लेख जो है वो लिखे
01:40हुए है
01:48अम नमस्षिवाय अम सरस्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत्वत
02:10इसे भी यहाँ पर पढ़ा गया है और इस प्राकृत लीपी में ही जो भाशा लिखी हुई है उसको भी
02:18यहाँ पर बताया गया है कि ये सनातन काल से यहाँ पर मौझूद है और ये वो 104 खंबे है
02:24जो हम आपको दिखा रहे हैं
02:26भोशाला को मुस्लिम पक्ष के लोग कमार मौला मस्जिद मानते हैं 13 और 14 शताबदी में मालवा छेत में मुस्लिम
02:33शाषकों के प्रभाव में आया जिसके बाद परिसर में इसलामी स्थापत जोणा गया
02:38कई इतिहासकार मानते हैं कि उसी तौर से जहां नमाज भी होने लगी थी समय के साथ साथ इस परिसर
02:44में हिंदू देवी देवताओं के निशान मिटाये जाने लगे लेकिन आज भी भोशाल में सरातन की छाप है
03:08केमिकल्स के चुने के भीतर ये प्लाचीन शिलालेग जो हैं सब छुपे लुए थे यह आप देख सकते हैं धनुष
03:14की आकरिती यहां पर बनी हुई है इसके जरीए भी इसे भी लेजाई ने आपने रिपोर्ट में माना विगे इन
03:20सब के अलग दिखा जाए तो जो सबसे ब
03:37भीति. cuánt भीता है धंडी होई थी आप देख सकते हैं और इससे भी आधार माना है लेकिन देखे
03:43इस तर भी आपको दिखाते हैं इस खंवे यहां पर को प्यemplocy की जवाध कि अलगता और लेकिन कि लेक्शल
03:55незाफ में जब घंभाव में उनन
04:07साफ तोर पे कि उसे कैसे घिसा गया था ऐसा माना है एसाई ने और हिंदू पक्षर साथ कहता है
04:12यहाँ पे और इसे सब को चूने से ठख दिया गया था
04:18बोशाला के अंदर 104 पिलर हैं इन खंबो में हिंदू सरातन से जुड़े और शिश आज भी मौझूद हैं
04:25केंद में बीजेपी की सरकार आने के बाद इस परिसर की कारवन डेटिंग की मांग उठी जिसके बाद एसाई ने
04:31भोशाला के अंदर की हर छोटी बड़ी चीज़ की वैग्यानिक साफ सफाई की
04:35केमिकल से इन खंबो को धोया गया तब जाकर ये कलाकृतियां सामने आई
04:40हिंदू धर्म से जुड़े इन कलाकृतियों को मिटाने के लिए खंबो में चूना भर दिया गया था
04:45कई चगों पर निशान आज भी है कि उन्हें रगण कर मिटाया गया है
05:04भोश शाला का इतिहास सदियों पुराना है
05:07ग्यारवी सदी में जब राजा भोश ने बनवाया था तो ये शिक्षा का केंदर था
05:10यहाँ संस्कृत, व्याकरण, गर्शन और शास्त्रों के शिक्षा दी जाती थी
05:15इसके अलावा से स्थान को वाग देवी यानी सरस्वती का स्थान माना जाता था
05:19हिंदू परंपरा में सरस्वती ग्यान की देवी मानी जाती है
05:22इस लिहाँ से भोश शाला उन दिनों एक ऐसा अस्थान था जो ग्यान का केंदर था
05:32भोश शाला के अंदर आज तक कैमरे पर कई प्रतीक चिन्ध मिले जो इस बात का प्रमान दे रहे हैं
05:37कि ये हिंदू स्थल ही है
05:38हाई कोट में भी इन चिन्धों को ही आधार माना
05:44भोश शाला के खम्भों पर भगवान गणीश की आकरती, घंटियां, रिद्धी सिध्धी की आकरतियां
05:53दिवारों पर ओम नमस्षिवाय और ओम सरस्वती नमह लिखा हुआ है
06:00गुंबज में कमल के फूल के आकरती है
06:03इस परिसर में हिंदों से जुड़े कई निशान या तो मिटा दिये गए या मिटाने की कोशिश की गई
06:10लेकिन इसके बावजूद भी कुछ आकरतियां आज भी है
06:13मंदिर परिसर में काल सर्प की आकरति भी है
06:16जिसे A.S.I. ने संग्रख्षित रखा है
06:25यसे हई कोट न माना है यहां पर बना हुआ था
06:34और यहां पे अगर आप देखें यह हो काल सर्पों यन्त्र है
06:38जो फिलहाल यहां पर बना हुआ है
06:40इसमें अगर आप देखें तो उसे फिलाल क�aveर करके रख दिया गया है और यह जो कवर करके रखा गया
06:44है वो इसलिए क्यूकि इसे यहाँ पे कोशिश की गई थी घिसने की लेकिन पुरी पावी पहले बिखा गया था
06:53लेकिन बाद में उसे निकाला गया विया है और यह काल सर
07:09पक्ष जो है यहां पे लगतार हिंदू पक्ष के लोग आकर के फिर्ट जन शुरू कर रहे हैं यह अगर
07:18आप देखें तो यह कमल के फूल के आकार के जो यहां पे छत बनी हुई है यह भी एसाई
07:26ने अपनी रिपोर्ट में शामिल की थी जिसके बाद इस पर भी फैसला जो है
07:30फुल्हाल हाईकोट के तरसे लिया गया है भुशाला परिसर ऐसा बनाये गया है कि इसके चारों और इमारत है बीच
07:40में खाली जगह है और इस खाली जगह को लेकर हिंदू पक्ष का मानना है कि यहां हवन कुंड था
07:45इस हवन कुंड को भी एसाई ने सर्वे के दौरान साफ
07:50प्राशी से भरा हुआ था एक सो चार खंबे हैं खंबो पर आकरितियां है उन सब के बीचों बीच इस
07:56जगह की आस्था का सबसे प्रमुख केंद्र है वह हवन कुंड वह यग्यशाला जहां पर माना जाता है कि प्राचीन
08:05समय में मा सरस्वती के उपासक के रूप में लोग
08:10पूजा करते थे यग्य करते थे उस यग्यवेदी पे भी हम इस वक्त मौझूद हैं और यह जो पूरी जगह
08:16देख रहे हैं यह वह जगह हैं जिसे यग्यवेदी कहा जाता है यहीं पर आगर आप देखें जो इसी साल
08:22सरस्वती पूजन भी हुआ था तो इसी जगह पर वह
08:24यग्य हुआता है यह यग्य कुंड है बीच और आप देखें तो यहीं पर हवन की वेदी जलाई जाती है
08:30और यहीं पर एक तरफ मा वाग्देवी यानि मा सरस्वती का फोटो जो है उसे रखा जाता है और मा
08:37वाग्देवी की प्रतिकात्मक स्वरूप की जो फोटो है उसे
08:41यहां रखा जाता और उसके बार यहां पे यह यग्य होता है यह पूरा हवन कुंड हो दिन तस्वीरों को
08:45देखें आपको स्वता ही अंदाजा लग जाएगा कि जिस तरीके का एक हवन कुंड का इलाका होता है किसी भी
08:51धार्विक स्थान पर यह पूरा वैसा ही बना हुआ ह
08:54एक तरफ से लोग आते हैं नीचे उतरते हैं यग्य करते हैं और दूसरी तरफ से सीडी चल के वो
08:59उपर चले जाते हैं और ये पूरा परिसर है हम आपको तस्वीरों में लिखाते हैं कि ये पूरा परिसर है
09:05किस तरीके का ये जो आप देख रहे हैं ये प्राचीन परिसर और �
09:09यह पूरा परिसर जो इस वक्त सुरक्षा के कड़े घेरे में रहता है
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