00:00मैंने UPSC और CAT दोनों एक ही साल में दिये और CAT की तरफ मेरा ज़्यादा कोई रुजान नहीं था
00:07UPSC की परिक्षा मेंस उस साल तन 2000 में 18 नवंबर को खत्म हुई और CAT था 10 दिसंबर को
00:16तो मेरे पास समय कुछ था नहीं 20 दिन थे मुश्किल से
00:19उसके पहले मैंने फॉर्मैट और देखा हुआ था और जानता था कैसा है
00:23लेकिन तयारी नहीं करी थी क्योंकि UPSC की तयारी के साथ साथ कैट की तयारी करना लगभगा संभव है
00:29तो ये 20 दिन थे तो मैं इसमें अब क्या जानना चाहता था मैं किस स्थर पर खड़ा हूं तो
00:34एक टेस्ट सिरीज चलती थी
00:36कंपेरिटिव टेस्ट सिरीज वो जाकर जॉइन कर ली उसमें और भी सब बैच के लोग थे
00:41वो लोग भी थे उन्होंने ज्यादा लंबे समय तक टैरी करी थी और ये वो लोग थे जिनको
00:45MBA ही करना था मैं तो यूँ ही दे रहा था अब परिक्षा के दिन आया 10 दिसंबर
00:51तो मैंने सब कर दिया और मैंने देखा कि जितने मेरे आमतोर पर आते थे उतने ही आज भी आ
00:57जाएंगे
00:57उतना करके बाहर निकला तो एक्जाम सेंटर के बाहर देखता हूं तो मातम फैला हुआ है
01:03अपने वो सब पुराने साथी भी खड़े हुए थे तो उन्होंने पूछा तुम्हारा कैसा रहा
01:07मैंने का वैसे हीरा जैसा रहता है 110-120 तो वहां सब खड़े हुए हैं पता चलता है कोई 80,
01:12कोई 90, आसू गिर रहे हैं
01:14प्यों वहां फिर जब बात हुई तो मुझे पता चला कि चार सेक्शन होते थे तीन कर दिये गा एक्जाम
01:21में
01:21और 180 सवाल होते थे वो 165 कर दिये गए
01:25सेक्शन भी मर्ज हो गया तो जिस फॉर्माइट की तयारी थी वो डिस्रप्ट हो गया तो जो मेंटल पैटर्न था
01:29उसको जटका लग गया
01:31उन मेंसे कई बेचारों का तो चैन भी नहीं हुआ
01:33और जो वहां बस यूही चला गया था खेलने खूदने उसको पता चल रहा है कि वो शायद आल इंडिया
01:40कैट टॉपर है
01:40हमारी एक आदित इविरला स्कॉलर्शिप होती है जिसमें शॉटलिस्ट ही वही होते हैं जो कैट में सबसे उपर रैंक वाले
01:47होते हैं तो उस शॉटलिस्ट मेरा नाम आ गया
01:49जिसको कैंपस की भाषा में यहते हैं अगर मैं गंदी फाइट नहीं मचाऊंगा तो रिजल्ट कैसे आएगा रिजल्ट उससे नहीं
01:57आता
01:57जो भी काम तुम इतना ज्यादा जोर लागा करोगे हो तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा
02:02जीवन एक सहज प्रवाह है उसमें इतनी जोर जबरदस्ती की कोई जरूरत होती नहीं है
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