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Somnath temple: 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहले सोमनाथ मंदिर में पुनर्निर्माण के बाद पहली बार कुंभाभिषेक हुआ है। इसमें पीएम मोदी भी शामिल हुआ। आइए जानते हैं कि कुंभाभिषेक क्या है और यह क्यों खास है।

Somnath Temple: The Kumbhabhishekam ceremony has been performed for the first time since its reconstruction at the Somnath Temple—the first among the 12 Jyotirlingas. PM Modi also participated in the event. Let us understand what Kumbhabhishekam is and why it holds special significance.

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Transcript
00:06गुजरात का प्रसिद और भगवान शिव के 12 जोति लोंगों में सबसे पहले सोमनात मंदिर एक बार फिर एतिहासिक योजना
00:13का साक्षी बन गया है
00:14सोमनात अमरित पर्व 2026 के तहर 11 मैं 2026 को पहली बार मंदिर के करी 90 मीटर उचे शिखर पर
00:22विशेश कुम्भा अभिशेक किया गया इस भवे योजना में प्रधान मंत्री नरेंद मोदी भी शामिल हुए
00:28सोमनात मंदिर के पुर्व निर्मान को 75 वर्ष पूरे हो चुके हैं
00:3211 पवित तीर्थों के जल से मंदिर के शिखर का अभिशेक किया गया 51 वैदिक ब्रामाण ने अतीर रुद्रपाट किया
00:45महा रुद्रियग में डेर लाख अहुतिया दी गए
00:47लेकिन क्या आप जानते हैं कि कुम्भा अभिशेक क्या होता है
00:51मंदिर में इसे इतना महत्वपुन क्यों माना चाता है
00:54चलिए बताते हैं आपको इस वीडियो में
00:56सबसे पहले बात करते हैं कि कुम्भा अभिशेक क्या होता है
00:59संस्कृत में कुंब का अर्थ होता है कलश और अभिशेक का मतलब पवित्रिस्ना ये देवे शक्ती का संचार होता है
01:07यानि कि जब विशेश वैदिक विधियों से अभी मंतृत जल को मंदिर के शिखर कलश और देव विग्रहूं पर चढ़ाया
01:16जाता है
01:16तो उसे कुंबा विशेक कहा जाता है ये कोई सामाने पूचा नहीं होती ये कई दिनों तक चलने वाला विशाल
01:23वैदिक अनुस्ठान होता है
01:24जिसमें यग्य, हवर, मंत्रोचारण, रुद्रपाट और अगरी अनुस्ठानों के माध्यम से जल को आध्यात्मिक रूप से उर्जवान बनाया जाता है
01:34इसके बाद उसी जल को मंदिर के शिखरों और देव विग्रों पर चढ़ाया जाता है
01:39सनातन परंपरा में माना जाता है कि इससे मंदिर के देव्य शक्ति दोबारा चागरित होती है
01:45और मंदिर में मौजुत कैसी भी नकारात्मक उर्जव हो समाप्त हो जाती है
01:49वहीं आगमशास्त्रों के अनुसार अधिकांश मंदिरों में हर बारा साल में पुना कुमबा विशे किया जाता है
01:57इसके पीछे धार्मेक और अथापत्ते दोनों कारण बताए जाते हैं
02:01देव विग्रहों को जिस आधार यानि की पीठम पर इस्थापित किया जाता है
02:05उसे जोडने के लिए अस्ट बंधनम नामक विशेश जड़ी बूटियों अप्राकरतिक पदार्थों का मिश्रण उपियोग किया जाता है
02:13माना जाता है कि इसकी प्रभाव अधिक लगभग 12 साल तक होती है
02:17इसके बाद ये कमजोर होने लगता है
02:19यही कारण है कि हर 12 साल बाद मंदिर की मरमत, शुद्धी करण और पुना औरजा इस्थापित की जाती है
02:26उमीद करती हूँ आपको जानकारी पसंद आई होगी
02:28फिलाल हमारे इस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक शेर और चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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