00:00आपको क्या लगता है जो आप दूध पी लेते हो चाय पी लेते हो उसकी कुल कीमत उतनी है जितनी
00:05आप अगा करते हो के आराम से आपको 15 रुपे, 20 रुपे, 50 रुपे में चाय मिल जाती है
00:10नहीं जो फूड इंडस्ट्री है विशेशकर जो एनिमल फ्लेश प्रोड़क्ट्स हैं यह हेविली सब्सिडाइजड होते हैं वो कर रहा है
00:17सब्सिडाइज जंगल
00:19जो हम कंसप्शन की बात कर रहे हैं सर जो सस्ते खाने की बात कर रहे हैं तो ये करीब
00:25-करीब तीन गुना है जो हम पे करते हैं और जो इसकी एक्ट्वल इंवार्मेंटर्ल डैमिज कॉस्ट आती है असली कीमत
00:34कोई नहीं चुका रहा है आपको नहीं पता कि आप जो खाना खा �
00:37रहे हो वो subsidized है और वो subsidy कोई इंसान नहीं चुका रहा है वो subsidy प्रक्रति चुका रही है
00:44आप प्रक्रति से चुरा-चुरा कर खा रहे हो आपका पेट भर रहा है कंपनियों का मुनाफ़ा बढ़ रहा है
00:51और तबाह प्रत्वी हो रही है
00:54energy subsidy है food subsidy है fertilizer subsidy है हर वो चीज जो प्रत्वी को तबाह कर रही है उसको
01:03राष्ट्रों ने subsidized कर रखा है
01:06ताकि आपको पता ही न चले कि आपके consumption की असली कीमत क्या है तो pricing भी आखरी समधान नहीं
01:12है green tax भी आखरी समधान नहीं है आखरी समधान तो वही है जो गौतम बुद्ध ने करा था
01:18क्यों काट रहा है इस बकरे को बोल रहा है मास मिलेगा बोल रहा है कितने किलो मास मिलेगा छोटा
01:24ऐसा मेमना बोल रहा है इतना बोलते है अच्छा आ यह मेरी जांग का मास ले जा क्योंकि मेरे देखे
01:29वो मेमना कटेगा या मैं कटूंगा बात एक ही है सिर्फ तब होता है �
01:34जब जंगल कटने और पशु कटने बंदोते हैं, मैं और वो एक हैं, तुम उसको नहीं काट रहे हैं, तुम
01:41मुझे काट रहे हैं।
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