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tootay ke chalakyan
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00:00प्यारे दोस्तों, आज हम आपको ऐसा कहानी सुनाने वाले हैं जिसे सुनकर आप हैरान रह जाएंगे। ये कहानी है एक
00:07ताजिर की हाफिज कुरान बीवी का और एक तोते का। इस कहानी को मुकमल जानने के लिए हमारे साथ आखिर
00:14तक रहिएगा।
00:15प्यारे दोस्तों, एक महले में एक ताजिर रहता था। ये बता दे कि व्यापारी को उर्दू में ताजिर कहते हैं।
00:23वह ताजिर काम के सिलसले में दूसरे शहर आया जाया करता रहता था। उसका नाम सहमत था। उसके पास एक
00:31तोता था जो की बहुत ही खुबसूरत था। �
00:34ताजीर ने उस तोते को बोलना भी सिखाया हुआ था, ताजीर के घर के बाहर एक अमरूद का पेड़ था,
00:40उस अमरूद के दरخت के उपर बैठ कर जोरोतोर से आवाज लगाया करता कि सहमत के हाफिज कुरान बीवी जानी
00:48है, सहमत के हाफिज कुरान बीवी बदकार है, इसको �
00:52पत्थर मारो, इसे यहां से निकाल दो, सुबह सुबह फजर का वक्त था, लोग नमाज पढ़कर अपने कारोबार की तरफ
00:59जा रहे थे, उस अमरूद के दरخت के उपर ये खूबसूरत सा तोता बैठा हुआ, हमेशा खामोश रहता था, मगर
01:06जैसे ही उस दरخت के पास से कोई
01:08गुजरने लगता, तो यही अलफाज बार बार दोहरा रहा था, सहमत की बीवी जानिया है, सहमत के हाफिज कुरान बीवी
01:16बदकार है, जैसे ही एक शखस ने बदकार अलफाज सुना, तो एकदम हैरान रह गया, और रुक गया, वह उस
01:24तोते को देखने लगा, जो की बहुत
01:26ही खूबसूरत नजरा रहा था, उस शखस ने आगे बढ़कर उस तोते को पकड़ना चाहा, मगर वह तोता वहां से
01:33उड़कर बहुत दूर जाकर बैठ गया, फिर तोता यही अलफाज बार बार दोहराने लगा, कि सहमत की हाफिज कुरान बीवी
01:41बदकार है, सहमत की हाफि�
01:57उस शखस को यू दरख्त के पास खड़ा देख कर कुछ लोग आकर पूछने लगे, कि भाई, तुम इस घर
02:04के पास खड़े होकर क्या कर रहे हो, उस शखस ने कहा, ये किसका घर है, तुम जानते नहीं, ये
02:11सहमत भाई का घर है, जो कि बहुत ही नेक और शरीफ इनसान है, आ
02:25वह अपनी हाफिज कुरान बीवी के साथ इस घर में रहते हैं, लेकिन आपका इस तरह किसी के घर के
02:31तरफ जहांकना अच्छी बात नहीं, सारे लोग उसको बार बार बातें सुना रहे थे, तो वह डर गया, और उसने
02:37तोते की तरफ इशारा करते हुए कहा, मैं तो इस तोत
02:54प्रे ने दोबारा फिर से कहना शुरू कर दिया, सहमत की हाफिज कुरान बीवी बदकार है, वह अपने आशिक से
03:00जीना किया करती है, ये सुनकर लोग कानों को हाथ लगाने लगे और कहने लगे, ये तोता तो बहुत ही
03:07मासूम जानवर है, ये जो कुछ देखता है, वही ब
03:24बदकार और जीना कार औरत है, लोग अब उसके घर से दूर रहना शुरू हो गए, तमाम मर्दों ने अपनी
03:31औरतों को उसके घर में जाने से मना कर दिया, क्योंकि अकसर औरतें उसके पास दीन सीखने के लिए जाया
03:37करती थी, अब बस्ती की कोई भी औरत उसके पास नहीं �
03:42सेहमत की हाफिज, कुरान बीवी इस बात को लेकर बहुत ज्यादा परेशान थी, कि आखिर मेरे पास ये औरतें कुरान
03:50सीखने क्यों नहीं आ रहीं, हर कोई उस औरत पर शक करने लगा, सुबह सुबह रोजाना वह तोता उस दरخت
03:57पर बैठ कर यही अलफास दोहराता रहता �
03:59और सारा दिन वो तोता कहां होता, किसी को कोई खबर नहीं थी, अब सब लोग कहने लगे कि ये
04:06औरत बद्द किरदार है, ये औरत नापाक किरदार की है, इसलिए तो इसका शोहर इसको छोड़ कर चला गया, सेहमत
04:14बहुत ही नेक इनसान था, तिजारत करने के लिए घर से न
04:29चार साल गुजर चुके थे, उसके बाद एक रोज एक काफिला बाजार में आया, वह काफिला आकर रुका तो उसमें
04:37सहमत भी था, चार साल बाद वह अपने घर वापस लोट रहा था, लोगों ने उसको देखा तो देखते ही
04:43पहचान लिया, और उससे मिलने लगे, कुछ �
04:46लोगों ने तो उसको तंज करना शुरू कर दिया, कि कहां रह गए थे अपने घर की, कुछ होश है
04:52या नहीं, तुम्हारे घर में तुम्हारे पीछे क्या हो रहा है, कुछ खयाल तो कर लेते, अगर इतना लंबा अर्सा
04:59के लिए जाना था, अपनी बीवी को भी साथ ले जा
05:14लेकिन जैसे ही अपने घर में दाखिल हुआ, आगे का मंजर देखकर वह हैरान रह गया, वह सारे तोहफे जो
05:22की अपनी बीवी के लिए लाया था, उसके हाथों से छूट कर जमीन पर गिर चुके थे, और जब उस
05:29तोते ने उसको देखा, तो तब भी अपनी जबान से यही
05:32अलफाज दोहरा रहा था, सारी हकीकत खुल कर सामने आ चुकी थी, उसका शोहर बहुत ही ज्यादा नेक और शरीफ
05:39इनसान था, वह एक नेक शोहर था, जब उसने तोते के मुह से अपनी बीवी की हकीकत सुनी, उससे बरदाश्ट
05:46ना हुआ, वह कहने लगा, कि अब इसका फ
06:02मैं सोचता था, मेरी बीवी अमानत में खयानत नहीं करेगी, लेकिन तुमने बता दिया कि तुम भरोसे के काबिल नहीं
06:08हो, सहमत चिलाते हुए घर से निकल चुका था, उसके चिलातने की आवाजें पूरा मोहला सुन रहा था, उस बस्ती
06:17में एक बहुत ही नेक इमाम साहब
06:19रहते थे, जो अल्ला के नेक बंदे थे, जब भी किसी कोई परेशानी होती, बस्ती के लोग मौलवी साहब के
06:25पास आते और अपनी सारी परेशानियां उनको बताते थे, इमाम साहब उस मसले का हल बड़े ही अच्छे तरीके से
06:32निकाल दिया करते थे, और लोग खुशी-ख
06:35अपने घर में वापस आ जाया करते थे, उनकी सारी परेशानियां खत्म हो जाती थी, सहमत फौरन ही इमाम साहब
06:43के घर चला गया, सहमत बहुत ज्यादा परेशान था, उसके साथ वह तोता भी मौजूद था, वहां इमाम साहब के
06:51पास दो-तीन लोग बैठे हुए थे, उस �
06:56कैसा बतमीज दोता है कि मालकिन के बारे में अजीब सी बातें करता है, इमाम साहब उन लोगों की बातें
07:03सुनकर गले को खखारने लगे, उनको अपनी तरफ तवज्जो कर रहे थे, जैसे ही सब लोगों ने मौलाना की जानिब
07:10देखा तो, वह अल्लाह के वली लोगों को कह
07:13लगे, कोई हक नहीं पहचानता, तुम किसी की इज़्जत पर यूँ पीठ पीछे हमले क्यों कर रहे हो, अल्लाह की
07:21जात हर इनसान का पता रखता है, ये बातें करने से पहले जहन में रखना कि तोहमत इंतहा बुरा काम
07:27समझा जाता है, अगर तुम किसी पर तोहमत लगाओ
07:31तो याद रखना, खुदा तुम्हें कभी भी माफ नहीं करेगा, वह लोग घबरा गए, और सर जुका कर हाथ जोड़
07:38कर कहने लगे, कि इमाम साहब गुस्ताखी माफ कीजिएगा, लेकिन हमने जो कुछ सुना, बस वही कह रहे हैं, फिर
07:46आखिर माजरा क्या है, इमाम साहब
07:48बहुत गुस्से में दिखाई दे रहे थे, कहने लगे, कि तुम एक अफवाह सुनकर दो कानों को बताते हो, वो
07:54दो कान आगे बताते हैं, और फिर वह दो लोग आगे चार लोगों को बताते हैं, और इसी तरह गुनाह
08:01पहल जाता है, और इसी तरह इंसान गुनाहों की दल-
08:18मुझे बहुत खुशी हुई आपसे मिलकर, वह तोता बार-बार यह अलफाज दोहरा रहा था।
08:23इमाम साहब ने एक पल तोते को देखा, तो हैरान हो चुके थे।
08:27उनके चेहरे पर एक मुस्कुराहट सी छा गई।
08:30अपना हाथ आगे बढ़ाया, तो वह तोता उड़ता हुआ इमाम साहब के हाथ पर आकर बैठ गया।
08:36बार-बार अपनी चोंच से उनके हाथ को चूम रहा था।
08:40इमाम साहब मुस्कुराकर उस तोते की जानिब देख रहे थे।
08:44आज से पहले किसी भी तोते को उन्होंने इतना ज्यादा बोलते नहीं देखा था।
08:49इमाम साहब उस तोते की बातों में इस कदर खो गए कि उनके सामने खड़ा शखस जो था वह भूल
08:55चुका था।
08:56एकदम उनकी नजर सामने खड़े शखस पर उठी तो फर्माने लगे। बताओ किसलिए आए हो तुम्हारा।
09:03ये तोता बहुत खुबसूरत है। अगर मैं तुमसे ये तोता खरीदना चाहूं तो मुझसे कितनी कीमत लोगे।
09:09वह शखस शायद उनके पास अपना मसला लेकर उनकी खिदमत में आया था। जब उसने तोते की खरीदारी की बात
09:15सुनी तो अगले ही पल गहरी सांस खारिज करके सर जुका कर कहने लगा।
09:21अल्ला के वली ऐसे कई तोते आप पर कुर्बान ये मेरा पाला हुआ तोता है इसे हमेशा अपने साथ रखता
09:28हूँ अपने साय की तरह रखता हूँ मैं हर बात इसे बताता हूँ लेकिन जिस मसले को लेकर आपके पास
09:34आया हूँ बस यही दुआ है कि वह मसला आप तक पहु
09:51which was the result of the situation.
09:52and the situation was the same.
09:55But Imam Sahib was telling her,
09:57that what she said,
09:58what's happened to her situation?
10:00What happened to her with you?
10:02That it was the same situation.
10:03But she said,
10:03that I had to go on the same way.
10:07But she said,
10:09that I was going on the same day.
10:11And the situation was the same.
10:46।
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14:32जबसे मेरी बीवी इस घर में आई थी।
14:37जब मैं कारोबार के सिलसिले में जाने लगा तो अपने तोते को अपने घर छोड़ गया और तोते को ये
14:44कह कर गया कि मेरे पीछे से घर का ध्यान रखना, मेरी बीवी पर नजर रखना और कोई भी दीवार
14:50पार करके घर आने की कोशिश करें या किसी भी किस्म का कोई हमला करे
14:55to showr macha deyna
14:56taaki jald se jald
14:58koi na koi loog aasakye
14:59میra toota bhoot wafadar tha
15:01کہnay laga
15:03ki thik hai mitr
15:04tum jaisa kaoge
15:05wiesa hi hoga
15:06mein aapki bievi ka khayal rakhunga
15:08mein aapni nek bievi ko chhoed kar chala gaya
15:11aur vakt badei teizhi se guzarnay laga
15:13yaha taak ki 4 saal mukammal ho gaya
15:15aur phir jab mein ghar waapas loota
15:17to joh manjar meinne dekha
15:19itna keha kar vah shaks khámosh ho gaya
15:21uska chahra to abhi se lal ho gaya tha
15:24na jane usne aisa koon sa manjar dekha tha
15:26joh usne dekha hoga
15:28to us per kya biti hogi
15:29waha is qadr bikhra hua dikhai dhenne laga tha
15:32ki joh usne manjar
15:33apni aankhon se dekha hoga
15:35tib uska kya hal hoga
15:36imam sahab ne jub usse khámosh dekha
15:39to usse sawal karne lagay
15:41tumne aisa kya dekh liya
15:43lekin us shaks ne
15:45ghehri sans kharij karke kaha
15:47aasil bati yeh hai ki
15:49mayri bievi us vakt kمرay mein bilkul
15:51biejaan mوجود thi
15:52wistar per leeti siskiyan
15:54aur aah bhar rahi thi
15:55apne vajud pere lapeta hua kapda
15:58usne utar rakha tha
15:59lekin jaise hii darwaze ki aawaz ái
16:02to foraan apna vajud lapeta ne lagi
16:04jab yeh manjar meinne dekha
16:06merhe liye hiran khun manjar tha
16:08meri bievi us vakt
16:10is halat mein mوجود thi
16:11koi bhi shaks agar dekhta
16:14to na jane kya kerta
16:16woe rote huye bata raha tha
16:18ki mujhe meri bievi ke kمرay se
16:19kisi or ki bhi aawazen á rahi thi
16:21bahaar andhera pheel chuka tha
16:23is tarhe ki aawazen
16:26sunkar mein ghabra gya
16:27meinne darwaze par dastak di
16:29aur phir jaise hii darwaza khol kar
16:31anndar dاخil hua
16:32meri bievi ghabraate huye
16:34apna vajud lapeta rahi thi
16:36uski halat is tarhe ki thi
16:38ki koi bhi mrd dekh leta
16:40to kuch bhi kar sakta tha
16:41صرف itna hii nahi
16:43merah tota
16:44jis se mein aapni bievi se bhi
16:46zyada mohabbat kerta tha
16:48meri bievi ne usse
16:49pinjre mei band kar rakhha tha
16:51aur uske moohu pa
16:52tape mar diya tha
16:53aur وہ pharphara raha tha
16:54merah ghabraate huye
16:56kمرay mei dاخil hua
16:58besak
16:58وہa meri bievi thi
17:00lekin merah tota
17:01mujhe apni bievi se zyada
17:03aziz tha
17:04merah sabse pehle
17:05pinjra kholla
17:06apne totae ke muhse
17:08tape ko hattaya
17:09mujhe dhe kar
17:10وہa chillanne laga
17:11phir mujhe wohu
17:12joh boolne laga
17:13merah tota
17:16jis se mein aapna
17:17satcha dost
17:17semajta tha
17:18woha aisa bhi
17:19bool saktta hai
17:20kehnne laga ki
17:21sehmad
17:22tumhari bievi
17:23apne aashik ke saath
17:24rata guzarti hai
17:25ye rata ko
17:26chirag bujha kar
17:27apne aashik ke saath
17:28gunah kerti hai
17:29tumhari bievi
17:30janiya hai
17:31badkar hai
17:32bar bar
17:33woha yehi
17:33alfaz dhora raha
17:34tha
17:35jubki
17:35meeri bievi
17:36achanak
17:37mujhe waapas
17:37sata
17:37dhekkar
17:38khush
17:38honne ki
17:39bajay
17:39ghabra
17:39chukyi
17:40thi
17:40اور
17:41phir
17:41kehnne lagi
17:41ki
17:42aap
17:42aisee
17:43aajayenge
17:43mujhe
17:44yakin
17:44naihi
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17:46mujhe
17:46khat
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20:02।
20:06वह शखस सर जुकाए खड़ा था
20:09कहने लगा कि इमाम साहब
20:11बराए महरबानी करके
20:12मेरे घर का मसला हल कर दीजिए
20:14अगर ये मसला आपने हल कर दिया
20:17तो मैं ये तोता आपको तोहफे के तोर पर दे दूँगा
20:20इमाम साहब मुस्कुराए
20:21और फिर उस शखस से कहने लगे
20:24कि ये तोता अब मेरे घर में रहेगा
20:26तुम वापस चले जाओ
20:28और जाकर अपनी बीवी के साथ
20:30अपना रवया दुरुस्त रखो
20:31वह शखस कहने लगा
20:34मेरा तो मन कर रहा कि उसका गला दबा कर
20:36मौत के घाट उतार दूँ
20:38वह तो बदकार औरत है
20:40और आप कह रहे हैं कि मैं अपनी बीवी के पास
20:42जाकर रवया दुरुस्त करूँ
20:44इमाम साहब उसको गहरी नजरों से देख रहे थे
20:48फर्माने लगे कि मैं जो कह रहा हूँ
20:49तुम उस पर अमल करो
20:51हकीकत बहुत जल्द खुल कर सामने आ जाएगी
20:53तुम जाओ अपनी बीवी के साथ
20:55अपना बात विचार ठीक रखो
20:57अपने इस रवये से नफरत करो
21:00और आज की रात उसके साथ तालुक जोडो
21:03वह बहुत ज्यादा परेशान लग रहा था
21:05लेकिन मौलाना साहब का हुक्म था
21:08इसलिए उसने यह हुक्म मान लिया
21:10और कहने लगा कि जो आपका हुक्म इमाम साहब
21:13मगर इतने में वह तोता उड़कर
21:16अपने मालिक के कंधे पर बैठने लगा था
21:19कि इमाम साहब ने फोरण उस तोते को पकड़ लिया
21:22and they had one job at a place and keptителей.
21:25He joined in the pipeline of the soybeanKE name and called out the ball of a nightmare.
21:27He was absolutely wonderful to pay for searching for the ожOS in a nation.
21:31He told us that it would have
21:33been chosen for the imm cooked government that had started.
21:49ुस घर में क्या होता है
21:50तोता जो कुछ बता रहा था
21:52वह आधा सच या मुकम्मल सच है
21:55अब वह बहुत जल्द खुल कर
21:57सामने आने वाला था
21:58इमाम साहब भेश बदल कर
22:00उसके घर की तरफ जाने लगे थे
22:02उस घर के बारे में सहमद ने
22:04निशान देही की थी
22:05वह एक एक लफ़ इमाम साहब के
22:08जहन में नक्ष हो चुका था
22:10जब वह तोता बिलकुल
22:12बोलना बंद नहीं कर रहा था
22:14ज्यादा शोर मचाता रहा था
22:16तो मौलाना ने उस तोते को
22:18अपने घर ले गए और जाकर बीवी को
22:20दिया और कहने लगे कि
22:22इसको मेरे कमरे में रख दो
22:24इमाम साहब सोच रहे थे
22:26कि ये तोता बेहद शातिर लगता है
22:28और ध्यान रखना कि इससे
22:30पिंजरे से निकल ना सके
22:31और नहीं देख सके कि मेरे घर से
22:34सहमत के घर तक का रास्ता कौन सा है
22:36क्योंकि मुझे इस पर शक है
22:38कि ये कहीं उड़कर वापस ना चला जाए
22:41मौलाना की बीवी ने
22:42वैसे ही किया था
22:43मौलाना उसके घर चले गए
22:45दरवाजे के पास जाकर खड़े हो गए
22:47और जायजा लिया
22:48ये घर वाक्य ही अपने जमाने का
22:51एक आलिशान घर था
22:52साफ जाहिर था
22:54कि ताजीर सहमद ने अपनी कमाई का
22:56एक बहुत बड़ा हिस्सा
22:57इस घर में लगा दिया था
22:59इमाम सहब आस पास देखने लगे
23:02फिर उन्होंने दीवार फलांग कर
23:04घर के अंदर जाना ही मुनासिब समझा
23:07वह जो कुछ करने वाले थे
23:09वह जानते थे कि मिया
23:11बीवी की बातें सुनना
23:12या किसी के घर में इस तरह आना
23:14बिलकुल गलत बात है
23:16और ये गुनाह के जिम्मे में आता है
23:18मगर उनके लिए एक ताज्जुब की बात सुनकर
23:21उन दोनों मिया बीवी के दर्मियान
23:23फैसला सुनाना सही नहीं था
23:25उन्हें उस ताजिर की बीवी की
23:27हकीकत जानी थी
23:29दीवार फान कर अंदर दाखिल हो चुके थे
23:32घर में बिलकुल खामोशी थी
23:34ऐसा लग रहा था
23:35जैसे घर में कोई मौजूद ना हो
23:37लेकिन फिर अचानक सरगोशी की
23:40आवाज आनी शुरू हो गई
23:41ये सहमत था
23:43शायद अपनी बीवी से बातें कर रहा था
23:45वह उन दोनों मियां बीवी की
23:48बातें कान लगा कर सुनते रहे
23:49क्योंकि दर्वाजे में खिडकी मौजूद थी
23:52और खिडकी के अंदर
23:53एक दरार बनी हुई थी
23:55जिससे आसानी से अंदर देखा जा सकता था
23:58और आवाज भी सुनाई दे जा सकती थी
24:00उन्होंने दोनों मियां बीवी की बातें सुनी
24:03इससे पहले की किसी को शक होता
24:06कि इस घर में कोई तीसरा इंसान मौजूद है
24:09इमाम साहब वापस अपने घर आ गए
24:11सुबह हुई मौलाना साहब
24:13फजर की नमाज अदा करके
24:15अपने घर से बाहर बैठे हुए थे
24:17कुरान पाक की तिलावत कर रहे थे
24:19वह शखस हाजिर हुआ
24:21और कहने लगा
24:22इमाम साहब आपके कहने पर
24:25मैंने अपनी बीवी से अपना रवया
24:27दुरस्त किया
24:28और उसको यही महसूस करवाया
24:30कि मुझे गलत फहमी हो गई थी
24:32और मैं उसकी हर खता को
24:33माफ कर दिया है
24:34ये सुनकर इमाम साहब हलका सा सर हिलाया
24:37और फिर एक 80 साला बुजर्ग
24:39वहाँ पर आया
24:40जिस तरह के कपड़े उसने पहने हुए थे
24:42वह बुजर्ग देखने में भी बड़े अजीब लग रहे थे
24:45सहमद ने अचानक मुड़कर उसको देखा
24:48और पूछने लगा
24:49कि इमाम साहब ये कौन है
24:50इमाम साहब ने बताया
24:52ये परिंदों के शहर तबीब है
24:54ये परिंदों की हर जबान
24:56हर हमराज को समझते हैं
24:58उनके जहन में क्या चल रहा है
25:00हर चीज को समझ सकते हैं
25:02दरसल उनको खास तुम्हारे तोते के लिए
25:05मंगाया गया है
25:06ताकि हकीकत को अच्छी तरह जान सकूँ
25:08फिर सहमद ने कहा कि
25:10इमाम साहब मैं क्या करूँ
25:11मुझे कैसे पता चलेगा
25:13कि मेरी बीवी का आशिक कौन है
25:15जिसके साथ उसके गलत तालुकात है
25:17इतने में इमाम साहब की बीवी
25:20उस तोते को लेकर आई
25:21और उस तोते के उपर
25:22पिंजरे में उसको बंद किया हुआ था
25:25उसके उपर एक कपड़ा डाला हुआ था
25:27जैसे ही कपड़ा हटाया
25:28तो उस तोते ने बोलना शुरू कर दिया
25:30कहने लगा कि सहमत की बीवी
25:32बहुत ही गंदी और बदकार है
25:34वह हमेशा हर रोज
25:35अपने नए आशिक के साथ रात गुजारती है
25:38ये सुनकर सहमत फिर गुस्से से आग बबूला हो गया
25:41और कहने लगा कि इमाम साहब ये तोता क्या कह रहा है
25:45बातें आने लगी
25:46क्योंकि रात का मंजर कुछ ऐसा था
25:49कि उसकी बीवी एक जगह खामोश घबराई हुई बैठी हुई थी
25:53और वो उसको कह रही थी
25:54कि मैंने तुम्हारी अमानत में कोई खयानत नहीं की
25:57मुझे कोई सजा मत देना
26:00सहमत ने बड़े ही प्यार और नरम से उससे बात की
26:03जिस तरह की मौलाना सहब ने कहा था
26:06फिर सहमत ने कहा
26:07कि मैं तुम्हारी सारी गलतियों को दर गुजर करता हूँ
26:10اور فی الحال چار سال بعد واپس آیا ہوں
26:13اسی لیے تمہارے ساتھ وقت گزارنا چاہتا ہوں
26:16اس کے بعد مولانا صاحب اپنے گھر واپس آ چکے تھے
26:20مولانا صاحب سحمد کی بیوی کو دیکھ چکے تھے
26:24وہ کس انداز کی مالک ہے
26:25امام صاحب اس کی بیوی کو بلا کر اس سے بات کرنا چاہتے تھے
26:29سحمد تو اس قدر غصے کا مظاہر کر رہا تھا
26:33کہ امام صاحب کو ڈر تھا
26:34کہیں یہ پاگل ہی نہ ہو جائے
26:36اور وہاں ایک بزرگ کتنی دیر بیٹھ کر اس توتے سے باتیں کرتے رہے
26:41وہ توتہ جو کچھ بتا رہا تھا وہ سنتا جا رہا تھا
26:45پھر اس بزرگ نے امام صاحب کو اکیلے کمرے میں بلا کر
26:49اس توتے کے بارے میں بتایا
26:50پھر انہوں نے کہا
26:52کہ کچھ دن کے لیے تم اس توتے کو اپنی حفاظت میں رکھو
26:55پھر میں تمہیں بلاوں گا
26:57اس نے کہا کہ ٹھیک ہے
26:59وہ بزرگ اس کو اپنے ساتھ لے گیا
27:01اور امام صاحب نے اپنی بیوی کو کہا
27:03کہ تم جا کر سحمد کی بیوی کو بلا کر لاؤ
27:07تھوڑی ہی دیر بعد
27:08امام صاحب کی بیوی ان کو آ کر کہنے لگی
27:11سحمد کی بیوی نے تو آنے سے انکار کر دیا ہے
27:13اس نے کہا
27:14کہ میں اپنے شوہر کی اجازت کے بغیر
27:17گھر سے نہیں نکل سکتی
27:18میں اس کی امانت میں خیانت نہیں کر سکتی
27:21اگر امام صاحب کو کوئی کام ہے
27:23تو وہ خود مجھ سے آ کر بات کر لے
27:26امام صاحب نے ایک فقیر کا روپ بدلا
27:28اور اس کے دروازے پر پہنچ گئے
27:30جا کر دروازہ بجایا
27:32مگر اس نے دروازہ نہ کھولا
27:34پھر انہوں نے دروازہ بجایا
27:35اور اندر سے آواز آئی
27:37کہ کون
27:38جب انہوں نے آواز دی
27:40کہ وہ عورت کہنے لگی
27:41کہ میرا شوہر اس وقت گھر میں نہیں ہے
27:44آپ یہاں سے چلے جائیں
27:46امام صاحب نے اپنے بارے میں بتایا
27:48تو اس نے دروازہ کھولا
27:50اور امام صاحب کو اپنے گھر میں لے آئی
27:52پھر امام صاحب نے اس کو کہا
27:54کہ جو بھی بات سچ ہے
27:56مجھے صاف صاف بتا دو
27:57تاکہ میں تم دونوں میاں بیوی کے بیچ فیصلہ کر سکوں
28:01یہ سنتے ہی وہ عورت گھبرا گئی
28:03اور کہنے لگی
28:04امام صاحب
28:05وہ توتہ ایک پرندہ ہے
28:07کچھ بھی بول سکتا ہے
28:09آپ اس کی باتوں میں آ کر
28:11مجھ پر شک کر رہے ہیں
28:12اس سے تو اچھا ہے
28:14کہ میں مر ہی جاتی
28:15امام صاحب کہنے لگے
28:17کہ ان سب باتوں کا وقت نہیں ہے
28:19مجھے سچ بتاؤ
28:20کہ شادی سے پہلے
28:22تم کسی کو پسند کرتی تھی
28:23یا تمہارے شوہر کے جانے کے بعد
28:27ساتھ رات گزاری
28:28کیونکہ ایک بے زبان جانور جھوٹ نہیں بول سکتا
28:32جو دیکھتے ہیں
28:33وہ وہی بولتے ہیں
28:34یہ سن کر وہ عورت گھبرا گئی
28:37اور رونے لگی
28:38کہنے لگی
28:39کہ خدا کے لیے مجھ پر شک مت کی
28:41اور مجھ پر الزام مت لگائیے
28:43پہلے ہی میرا شوہر
28:45میرے کردار کو لے کر مشہور ہے
28:47امام صاحب نے کہا
28:48کہ تمہارا شوہر میرے پاس بھی آیا تھا
28:51وہ تمہارا سر دھڑ سے جدہ کرنا چاہتا تھا
28:53لیکن میرے کہنے پر خاموش ہو گیا
28:56اس لیے مجھے سچ سچ بتاؤ
28:58کہ میرے سامنے کسی قسم کا
28:59کوئی جھوٹ یا مکاری نہیں چلے گی
29:01وہ یہ سن کر خاموش ہو گئی
29:04اور رونے لگی
29:05امام صاحب کو وہاں سے واپس آنا پڑا
29:08کیونکہ وہ سمجھ چکے تھے
29:09کہ یہ عورت جو ہے
29:11وہ بے بس ہو چکی ہے
29:13یا پھر وہ سوچ رہے تھے
29:14کہ اس کو اپنے حسن پر بہت گرور ہے
29:17جو شادی کے بعد استعمال کر رہی ہے
29:20وہ سوچ رہے تھے
29:21ہو سکتا ہے کہ اس کی شادی
29:23زبردستی سہمت کے ساتھ کی گئی ہو
29:25جو کی عام سی شکل کا مالک ہے
29:28اور پھر اس کے اتنا دیر غائب رہنے پر
29:31اس نے اپنے جذبات پر قابو نہ رکھا پایا
29:34تو اپنے پرانے عاشق سے
29:36اپنا رشتہ بحال کر لیا
29:37اس طرح کے کئی برشوں سے
29:39ان کے ذہن میں آ رہے تھے
29:41جب انہوں نے یہ بات اپنی بیوی کو بتائی
29:43ان کی بیوی بھی ان کو کئی طرح کے
29:45مشورے دے رہی تھی
29:47لیکن حقیقت کیا تھی
29:48یہ ابھی کوئی نہیں جانتا تھا
29:51اب بھلا روزانہ امام صاحب کے گھر
29:53چکر لگانے لگا ان کو کہنے لگا
29:55کہ امام صاحب میری جان
29:57اس عورت سے چھڑوا دیں
29:58میں اس عورت کو ایک منٹ بھی برداشت
30:01نہیں کر سکتا
30:02آپ میرے سبر کا امتحان لے رہے ہیں
30:05بھلا ایسی عورت کو کیسے برداشت کر سکوں
30:08جو میری امانت میں خیانت کر چکی ہے
30:10جس کا گواہ ایک پرندہ ہے
30:12پھر ایک ہفتے بعد امام صاحب نے
30:15اس بزرگ کو بلائیا
30:16جو کی پرندوں کا طبیب تھا
30:18انہوں نے اس کو کہا تھا
30:20کہ جمعے والے دن اس توتے کو لے کر آ جانا
30:23جمعے کی نماز ادا کر کے
30:25مولانا صاحب مسجد سے باہر نکلے
30:27وہ بزرگ توتے کو لے کر وہاں آ چکا تھا
30:30مولانا صاحب نے ان دونوں میاں
30:33بیوی کو وہاں پر بلائیا
30:34وہ دونوں میاں بیوی بھی آ چکے تھے
30:37وہ توتہ اس طبیب کے پنجرے میں تھا
30:40جس کے اوپر ابھی کپڑا ڈالا ہوا تھا
30:43اب وہاں موجود کئی لوگ
30:45اس بات کا انتظار کر رہے تھے
30:47اب یہ توتہ
30:48اس کی بیوی کی پردہ پوشی
30:50ظاہر کرے گا
30:51مگر ایسا نہ ہوا
30:53جیسے ہی پنجرہ نیچے رکھا گیا
30:55اس کے اوپر سے کپڑا اٹھایا گیا تو
30:58وہ توتہ
30:59اس وقت بولنے لگا
31:01اور کہنے لگا
31:02سہمد کی بیوی اب اس کی بیوی نہیں
31:04بلکہ میری بیوی ہے
31:05سہمد میرا دشمن ہے
31:07سہمد اپنی بیوی کو میرے حوالے کر دے
31:09ورنہ میں تجھے جان سے مار دوں گا
31:11آخر تو ہوتا کون ہے
31:13میری بیوی کے ساتھ کھڑا ہونے والا
31:14ایک توتے کے موہ سے ایسی باتیں سن کر
31:17وہاں کھڑے تمام لوگ حیران رہ گئے
31:19اور احمد گصے سے آگ ببولہ ہو گیا
31:23کہنے لگا کہ کیا بکواس کر رہے ہو
31:24تم ایک پرندے ہو
31:26یہ میری بیوی ہے
31:27تو وہ کہنے لگا کہ خاموش رہو
31:30میں کہہ رہا ہوں
31:31کہ اس کا نکاح میرے ساتھ ہوا ہے
31:32یہ امام صاحب نے
31:34خود میرا نکاح اس کے ساتھ پڑھوایا تھا
31:36تم میری بیوی سے دور رہو
31:39سہمد یہ سب سن کر حیران ہو رہا تھا
31:42آہستہ آہستہ
31:43سہمد کے محلے کے لوگ بھی
31:45وہاں جمع ہو چکے تھے
31:46جو کہ امام صاحب کے حکم پر آئے تھے
31:49سہمد کبھی مولانا صاحب کو دیکھتا
31:51کبھی ان لوگوں کو دیکھتا
31:54سہمد ایک دم بولنے لگا
31:55کہ امام صاحب
31:56میں کب سے آپ کے گھر کے چکر لگا لگا کر تھک چکا ہوں
31:59مگر آپ سے تو میرا ایک بھی فیصلہ نہیں ہو رہا
32:02سہمد تو جیسے گصے سے پاگل ہوتا جا رہا تھا
32:06امام صاحب نے اس کے محلے کے لوگوں سے پوچھا
32:09بتاؤ تمہارے ساتھ
32:11ایسے کون سا مسئلے پیش آئے ہیں
32:13مجھے اپنے اپنے مسئلے بتاؤ
32:15یہ سن کر سبھی لوگ کہنے لگے
32:17کہ امام صاحب کچھ سال پہلے کی بات ہے
32:20کہ ایک عجیبوں غریب چور
32:22ہمارے محلے میں آ چکا تھا
32:24ہم رات کو سوتے
32:25تو ہماری کوئی نہ کوئی چیز چوری ہو جاتی
32:28ہم یہی سوچ رہے تھے
32:30کہ کوئی ڈاکو ہے
32:31اس نے ہمارے محلے میں چوری کرنا شروع کر دی
32:34پھر ہم نے چوکی داروں کو کھڑا کیا
32:36مگر کوئی بھی چور یا ڈاکو
32:38ہمارے ہاتھ نہیں آیا
32:40وہ لوگوں کی بہت سی قیمتی چیزیں
32:42چوری کرنے لگا تھا
32:44نہ جانے کس طرح وہ چپکے سے
32:46کمرے میں داخل ہوتا
32:47اور صرف سونے کی انگوٹھیاں
32:49اور سونے کی اشرفیاں چوری کرتا
32:52آہستہ آہستہ لوگ
32:54راتوں کو جاگنے لگے
32:55صبح ہونے لگے
32:56پھر یہ حال ہو گیا
32:58کہ ہماری چیزیں
32:59صبح کے وقت بھی چوری ہونے لگی
33:01اور پھر ایک دفعہ ایسا ہوا
33:03فضر کے وقت
33:04ہمارے دروازے پر دستک ہوئی
33:06اور جو جو ہماری چیزیں تھیں
33:08کچھ عرصے بعد
33:10وہ سب ہمارے دروازے کے سامنے پڑی ہوئی تھی
33:12ہم اس واقعہ کو بھول چکے تھے
33:15اور اس وقت
33:16جب یہ باتیں ہو رہی تھی
33:17تو سحمد کی بیوی
33:19یہ باتیں سن کر
33:20تھر تھر کانپ رہی تھی
33:21اور اپنے چہرے پر آئے ہوئے پسینے کو
33:24صاف کر رہی تھی
33:25امام صاحب نے
33:26اس کے چہرے کے رنگ بدلتے ہوئے دیکھے
33:28تو اس کو کہنے لگے
33:29کہ سحمد کی بیوی
33:31یہ سب لوگ
33:32اپنے حصے کی حقیقت بتا چکے ہیں
33:33اب آگے کی حقیقت آپ بتاؤگی
33:36یا میں بتاؤں
33:37وہاں گھبرائی ہوئی
33:38تھر تھر کانپ رہی تھی
33:39حالانکہ ان لوگوں کی چوری سے
33:41سحمد کی بیوی کا کیا تعلق تھا
33:43مگر سحمد کچھ بھی
33:45سمجھ نہیں پا رہا تھا
33:47اس کے دل میں
33:47الٹے سیدھے خیال آ رہے تھے
33:49کہنے لگا
33:50کہ امام صاحب
33:52کہیں ایسا تو نہیں
33:53کہ میری بیوی بدکار کے ساتھ ساتھ
33:55چور بھی تھی
33:56امام صاحب نے
33:57ہاتھ کے اشارے کے ساتھ
33:59اس کو خاموش کروا دیا
34:00اور کہا
34:01کہ آگے کی حقیقت
34:02تمہاری بیوی خود بتائے گی
34:04وہ رونے لگی
34:06اور روتے ہوئے
34:07اس نے توتے کی طرف اشارہ کیا
34:09اور کہنے لگی
34:10کہ مولانا صاحب میرا شوہر
34:12کام کے سلسلے میں
34:14شہر سے باہر چلا گیا تھا
34:16اور یہ توتہ میرے پاس چھوڑ گیا تھا
34:18میں بہت گھبرا گئی
34:20اور بہت زیادہ رونے لگی
34:21میں سوچ رہی تھی
34:22کہ اتنا وقت
34:23اکیلے کیسے گزارا ہوں گی
34:25نہ جانے میرا شوہر کب آئے گا
34:27پھر آہستہ آہستہ
34:32میرا دل بہلانے لگا
34:34پھر آہستہ آہستہ
34:36اس توتے کے ساتھ
34:38میری دوستی ہو گئی
34:39پھر دھیرے دھیرے یہ توتہ
34:41مجھے کہنا شروع ہو گیا
34:42کہ مجھے پنجرے سے باہر نکال دو
34:44اس کے کہنے پر
34:46اس کو پنجرے سے باہر نکال دیا کرتی تھی
34:48میں نے اس کو قرآن پاک کی
34:50بہت زیادہ آیتیں بھی سکھا دی تھی
34:52لیکن پھر اچانک سارا سارا دن
34:54گھر سے غائب رہتا
34:56پھر یہ واپس آ جاتا
34:57اور پھر یہ ساری ساری رات غائب رہنے لگا
35:01مجھے کچھ علم نہیں تھا
35:02کہ یہاں سے کہاں جاتا ہے
35:04کیا کرتا ہے
35:05پھر جب میں نے ایک دن محسوس کیا
35:08کہ یہ توتہ گھر کے سہن میں
35:10مٹی کھوڈتا ہے
35:11اور اس میں کئی چیزیں چھپا کر
35:13واپس اڑ جاتا ہے
35:14میں نے اس کے اڑنے کے بعد
35:16اس مٹی کو کھوڈ کر دیکھا
35:18تو اس میں بہت ساری سونے کی
35:20اشرفیاں اور انگوٹھیاں تھی
35:21یہ دیکھ کر میں گھبرا گئی
35:23کہ یہ کیا ہے
35:24اور پھر اس توتے پر نظر رکھنا شروع کر دی
35:27میرے سامنے اس کی حقیقت کھل چکی تھی
35:29یہ لوگوں کی چیزیں چوری کر کے
35:32یہاں پر دفن کر دیتا تھا
35:33میں نے اس توتے کو بہت زیادہ ڈانٹا
35:36اور پھر پنجرے میں بند کر دیا
35:38اور سزا کے طور پر
35:40اس کو کھانا نہیں دیا تھا
35:42یہ توتہ اس قدر شاتر ذہن کا تھا
35:45اس نے خود کو پنجرے سے کھول لیا
35:47پھر اڑ کر درخت کے اوپر بیٹھ کر
35:50میرے اوپر جھوم جھوم کر کہنے لگا
35:53کہ میں چور ہوں لوگوں کو دیکھ کر
35:55اور بولتا کہ میں چور ہوں
35:57میرا شوہر تو دوسرے شہر چلا گیا تھا
36:00مگر پھر اس نے مجھے دینار دینے بند کر دیے
36:03کچھ دن تو میں اپنا گزارہ کرتی رہی
36:05مگر پھر بہت زیادہ مشکل ہو چکی تھی
36:08میں نے اپنے ہاتھوں سے مالا بنانی شروع کر دی
36:11اور ان کو بیچنا شروع کر دیا
36:12اس کام کے لیے میں نے ایک گلام رکھا ہوا تھا
36:15جو کی میرے والد صاحب کا ہی بھیجا ہوا تھا
36:18وہ بہت ہی شریف انسان تھا
36:20دروازے پر آتا اس کو میں سارا سامان دے دیتی
36:23اور پھر جو نفع مجھے ملتا
36:25وہ دے کر چلا جاتا
36:26اس طرح میں اپنا گزر بسر کر رہی تھی
36:29میں نے وہ ساری اشرفیاں جو اس نے چوری کی تھی
36:32لوگوں کے گھروں پر رکھ دی تھی
36:34اور ان کو واپس کر دی تھی
36:36جب میں لوگوں کی چیزیں رکھ کر واپس آئی
36:39تو اس توتے نے مجھ پر حملہ کر دیا
36:41اس نے مجھے اپنی چونچ کے ساتھ اتنا مارا
36:44کہ میرا پورا جسم زخمی ہو چکا تھا
36:47میرے جسم پر کٹ کے نشان بن چکے تھے
36:50پھر میں نے اس کو باندھ دیا
36:52اور پنجرے میں بند کر دیا
36:53میرے جسم پر اس طرح کے کٹ کے نشان لگ چکے تھے
36:57کہ مجھے بہت زیادہ تکلیف اور جلن ہوتی تھی
37:00اس لیے میں بے لباس ہو کر سویا کرتی تھی
37:04کوئی بھی کپڑا میرے وجود کے ساتھ لگتا
37:07تو مجھے بہت زیادہ تکلیف ہوتی
37:09اس طرح میں درد کے ساتھ دن گزارتی رہی
37:12اور میرا شوہر نا جانے کیا سمجھ چکا تھا
37:15اب ساری حقیقت کھل کر سامنے آ چکی تھی
37:19ساری کی سارے فساد کی جڑ یہ توتا تھا
37:23وہ بزرگ جو کی پرندوں کا طبیب تھا
37:26وہ بھی وہاں موجود تھا
37:28اس بزرگ نے کہا کہ یہ پرندہ
37:30ایک عالی قسم کی ذہن نیت رکھتا ہے
37:33یہ بہت ہی شاتر قسم کا توتا ہے
37:35اس کا مزید انسانوں میں رہنا خطرے سے خالی نہیں ہے
37:39یہ بہت ہی شیطانی دماغ کا توتا ہے
37:42یہاں تک کہ یہ لوگوں کے گھر اجار سکتا ہے
37:45جب یہ ساری حقیقت سحمد کے سامنے کھولی
37:48تو وہاں سر پکڑ کر بیٹھ گیا
37:50اور کہنے لگا
37:51میرے لیے یہ سب مان بہت ہی مشکل ہے
37:53سحمد کی بیوی ایک طرف بیٹھی ہوئی رو رہی تھی
37:56اس نے کوئی گناہ نہیں کیا تھا
37:58جتنا قصور تھا اس توتے کا تھا
38:01سحمد نے اپنے توتے کو پکڑ کر اس کی گردن مروڑ دی
38:04اور وہ توتا وہیں پر تڑپ تڑپ کر مر گیا
38:07وہ توتا اتنا شاتر تھا
38:09کہ اس نے دونوں میاں بیوی کے درمیان جدائی ڈال دی تھی
38:13سحمد بہت زیادہ شرمندہ تھا
38:15اس نے اپنی بیوی سے مافی مانگی
38:17مولانا صاحب کا شکریہ آدھا کر کے
38:19اپنی بیوی کو اپنے گھر لے کر چلا گیا
38:22پیارے دوستوں
38:23اس کہانی سے ہمیں یہ سیکھ ملتا ہے
38:26کہ لوگ دوسروں کی باتوں میں آ کر
38:28بیوی پر شک کرنے لگتا ہے
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