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  • 8 hours ago
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00:03प्रदेश की खुब्सूरत वादियों में इस्तित बिजली महादेव टेमपल एक ऐसा रहस्मय और आस्था से भरा मंदिर है जो अपनी
00:12अनोखी परंपरा के लिए जाना जाता है।
00:15यहां हर कुस वर्सों में शिवलिंग पर आस्मान से बिजली गिरती है और फिर पुजारी उसे दुबारा जोडते हैं। यह
00:24द्रिश्ट बग्टों के लिए किसी चमतकार से कम नहीं।
00:28यह मंदिर कुलू वैली की उची पहारियों पर करीब 2460 मीटर की उचाई पर इस्थित है। यहां से पूरी घाटी
00:37का मनोरम द्रिश्ट दिखाई देता है जो इस स्थान को अध्यात्मिक के साथ साथ प्रकृतिक रूप से भी खास बनाता
00:46है।
00:46तो मैं अभी बिजली महादे हूं मंदिर में हो। इस मंदिर की खास्यत है कि यहां पर जो भूले बाबा
01:01है वो मखन के बने हुए है।
01:08मंदिर के नाम के पीछे एक अद्बुत मानिता है। कहा जाता है कि हर 12 साल में यहां इस्तिर श्रिलिंग
01:15पर आसमान से बिजली गिरती है जिससे वह तूट जाता है।
01:20इसके बाद मंदिर के पुजारी मखन से श्रिलिंग को जोडते हैं। कुछ समय बाद फिर से वह अपने मूल रूप
01:28में आ जाता है। इसी कारण इसे बिजली महादेव कहा जाता है।
01:32मानिता है कि यहां कभी एक विशाल दैत्ते का वास्था जिससे शेत्र के लोग परिशान थे। तब भगवान शिव ने
01:40उस दैत्ते का अंत किया। लेकिन उसकी उर्जा इतनी प्रबल थी कि उससे सांथ करने के लिए भगवान ने खुद
01:48बिजली के रूप में उस अस्था
01:50पर गिरने का वर्दान दिया ताकि पूरा शेत्र सुरक्षित रहे। विजली महादेव मंदीर तक पहुचने की दो रास्ते हैं एक
02:00रास्ता थोड़ा सुगम है जबकि दूसरा काफी सुनौति पूर्ण करीब 3 किलोमेटर का ट्रेक यहां पहुचने के लिए करना पड़ता
02:19तो महादेव के मंदीर जरूर आए और इस जगों को आत्म साथ करें बहुत ही खुपसूरत जगह है और मखन
02:28से बने भुले वापा जो पिघलते नहीं है सालों ऐसे ही रहते हैं तो उनके दर्शन आप पा सकते हैं
02:36और कहते कि जो भी मनो कामना आप यहां पर मांगते हैं वो
02:39पूरी भी होती है
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