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  • 11 hours ago
आधुनिक युग में सनातन परंपराएं कहीं पीछे छूटती जा रही हैं. इसका मूल कारण और समाधान क्या है? पढ़िए अंकुर जाकड़ की रिपोर्ट...

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00:00आमेन दर्स्रिया का प्राव्यान
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00:31There are no people who can understand them, nor are they going to grow up in the future.
00:39In this time, the society and the society of these people are looking to see these people.
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01:31ुपर से आ रहे हैं लेकिन आप अपने पर समाप करना चाहते हो हरी देव जोशी पत्रकारिता विश्विद्याले के कुल
01:40गुरू प्रोफेसर नंद किशोर पांडे बताते हैं कि गुरू शिश्य परंपरा सनातन संस्कृति की आत्मा रही है
01:48धौम में रिशी और उनके शिश्य आरोणी का उदाहरंग देते हुए वे कहते हैं कि कैसे आरोणी ने गुरू के
01:54आग्या के लिए खेत की मेड रोपने के लिए स्वयम पानी में लेट कर अपना करतव निभाया
02:01लेकिन आज ये भावना कमजोर पड़ी है जिससे सिक्षा केवल जानकारी तक सीमित रह रहे हैं और संसकार नहीं बन
02:09पा रहे हैं
02:10वहीं वेदाचारे डॉक्टर प्रिशान शर्मा बताते हैं कि पहले सोलह संसकार हुआ करते थे जो अब तीन संसकारों तक सीमित
02:18हो गए हैं
02:20लिए सेनकारी और मितितं �onceकार के जातेUST हैं उसकी ब्लश्टा बुद्भी बल पॉरुष इप्रयादी के लिए सुल्च्यु जीन के लिए
02:27विकास , अब
02:29foreign
02:59नीव मजबूत होगी, हर इसकुल में संस्कत अनिवारिय होगी, शास्त्र की शिक्षा अनिवारिय होगी, तो ही वो इस विश्व को
03:05जानताएगा।
03:30यानि शक्ती होना चाहिए, ये बताता है कि केवल ग्यान ही नहीं, उसकी रक्षा के लिए शक्ती भी आविश्यक है।
03:59अभी बढ़े और समाज का भी बढ़ता जाए। यही सामर्थे राष्ट्र का सामर्थे होता है।
04:34पर्यावरन का संकट बढ़ा है।
04:36वो शकुंतला आज हमारे आश्रम से विदा हो रही है।
04:40शकुंतला जुन पौधों को लगाती थी, उनका जन्दिन मनाये जाता था, उनका वार्शी कोट्सव मनाये जाता था।
04:48हम अपने बच्चों का जन्दिन मनाते हैं, पनोश में जन्दिन मनाते हैं।
04:53लेकिन आज कौन पौधों का जन्दिन मनाता है।
04:57पौधे लग गए, बचे या नहीं बचे, उसकी चिंता कौन करता है।
05:02So the bridge becomes very positive in our craft.
05:08This is why the bridge becomes so powerful in the mountains.
05:10Thus, we have to understand the bridge and water.
05:13Bhagavan Krishna tells us that I am a wrier in marriage.
05:17So Bhagavan, Sri Krishna is a people of Wriksh.
05:21Therefore, the people of Wriksh should be further by their podcast.
05:26So the bridge comes from Hriksh.
05:45प्रोफेसर नंद किशोर पांडे बताते हैं कि वेद अध्ययन से ही वेदों की रक्षा का भाव है धीरे-धीरे संस्कृत
05:53के सूत्रों को पढ़कर ध्यान रखने की बात
05:55खत्म हो गई तो संतों की परंपरा शुरू हुई उन संतों ने उस वैदिक परंपरा को आम जनता की भाशा
06:02में यानि बोलियों में कहा वेदों को मौखिक रूप से संरक्षित किया गया तुलसिदास ने अवधी में कबीर ने साखी
06:11में मीरा ने राजस्थानी में गुरुनान
06:25ने राजस्थानी और हिंदी में इसके अलावा तुकाराम ने मराथी में नरसिन महता ने गुजराती में अक्का महादेवी ने कंणर
06:34में लालेश्वरी ने कश्मीरी में वैदिक परंपरा को आम जनता तक पहुचाया
06:43सनातन की सबसे बड़ी विशेश्था ही उसके निरंतरता है ये ठहरता नहीं बदलते समय के साथ खुद को ढालता जरूर
06:51है लेकिन समाप्त नहीं होता
06:55इतिहास गवा है कि कई बार इसकी धाराएं कमजोर पड़ी लेकिन हर बार समाज नहीं इसे फिर से मजबूत किया
07:02आज भी वही समय है जब परंपराओं को केवल अतीत की याद मान कर छोड़ देने के बजाए उन्हें समझ
07:09कर अपना कर और अगली पेरी तक पहुचाने की जिन्मिदारी निभानी होगी
07:14अगर आज प्रियास नहीं हुआ तो आने वाली पेरियां सनातन को किताबों में तो पढ़ेंगी लेकिन उसे जी नहीं पाएंगी
07:24ETV भारत के लिए जैपुर से अंकुर जाकर की रिपोर्ट
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