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  • 18 hours ago
नेचुरलिस्ट रणधीर सिंह ने घना में हजारों पक्षियों की रिंगिग करने के अपने अनुभव साझा किए. पढ़िए श्यामवीर सिंह की रिपोर्ट...

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00:05केवला देव रास्ट्रे उद्ध्यान के शांत आद्रभूमी छेत्र में दशकों पहले शुरू हुआ एक वैज्यानिक प्रयोग आज एक विरासत बन
00:14चुका है
00:14वर्ष 1989 में भारत के प्रसिद्ध पक्षी विज्यानी डॉक्टर सलीम अली के मार्दर्शन में यहां पहली बार पक्षियों की रिंगिंग
00:23शुरू हुई थी
00:23इसी दोर में इस अभ्यान से जुड़े नेचरलिस्ट रंधीर सिंग ने हजारों पक्षियों को पहचान देने का काम किया
00:30साइबेरियन क्रेन के सुनहरे दौर से लेकर आज बदलते पर्यावरं तक उन्हें पक्षियों की दुनिया को बेहत करीब से देखा,
00:38समझा और वैग्यानिक रूप से दर्ज किया
00:41अब भालका होता है बहुत सव क्राम का इतना नेच होता है वह जापान से आता है उसको मिस नेट
00:47बोलते हैं
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01:17is
01:41naturalist raradhir singh
01:43बताते हैं कि पांच सालों के दौरान हजारों पक्षियों की रिंगिंग की गई जिन में वेटलैंड बर्ड्स रैप्टर्स इगल जैसी
01:51कई प्रजातियां शामिल थी हर रिंग एक डेटा पॉइंट थी एक वैग्यानिक जानकारी जो यह बताती थी कि पक्षि कहां
01:58से आए कि
01:59अपनी दूरी तै की और उनका जीवन चक्र कैसा रहा उन्होंने अपने लंबे करियर में कई दुरलब और महत्वपूर्ण पक्षियों
02:07की रिंगिंग की हैं इनमें साइबेरियन क्रेन वल्चर हॉक और इगल जैसी प्रजातियां शामिल हैं वे पताते हैं कि यह
02:14काम जितना
02:15रोमांचक लगता है उतना ही जोखिम भरा है उनको पकड़ने में बहुत साबदानी से इनको पकड़ा जाता उनके जो पंजे
02:23ना उनको सरजाके और उनको इस तरह से पकड़ते हैं कि वह कुछ मार ना करें हम लोगों के उपर
02:29और हम लोगों के वह ऐसे भी जो टेटनिस ब�
02:45जीवलादेव में साइबेरियन क्रेन का स्वर्णिम दौर देखा है वे बताते हैं कि एक समय ऐसा था जब घना में
02:52बड़ी संख्या में साइबेरियन क्रेन आते थे यह एक ऐसा दृष्य है जो आज दुर्लब हो चुका है यह संकेत
02:59है कि समय के साथ प्रकृति में कितना ब�
03:03प्रतपूर से एटीवी भारत के लिए श्यामवेर सिंग की रिपोर्ट
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