Skip to playerSkip to main content
Kailash Mansarovar Yatra पर Nepal की कड़ी आपत्ति, क्या रुक जाएगी यात्रा? आस्था के इस सबसे बड़े सफर पर कूटनीतिक विवाद का साया गहरा गया है, जिससे हजारों श्रद्धालुओं की उम्मीदों पर संकट मंडरा रहा है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा 2026 को लेकर दक्षिण एशिया में एक नया कूटनीतिक तूफान खड़ा हो गया है। भारत और चीन द्वारा लिपुलेख दर्रे (Lipulekh Pass) के रास्ते यात्रा फिर से शुरू करने की योजना पर नेपाल (Nepal) ने कड़ा ऐतराज जताया है। काठमांडू स्थित विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक तौर पर बयान जारी कर कहा है कि लिपुलेख क्षेत्र उसकी संप्रभुता का हिस्सा है और यहाँ किसी भी देश की गतिविधि उसकी अनुमति के बिना "अस्वीकार्य" है।
दरअसल, भारत सरकार ने हाल ही में घोषणा की थी कि जून से अगस्त 2026 के बीच करीब 1000 श्रद्धालु नाथू ला और लिपुलेख के रास्ते कैलाश दर्शन करेंगे। इसके लिए ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। लेकिन नेपाल का दावा है कि 1816 की सुगौली संधि (Treaty of Sugauli) के आधार पर कालापानी, लिम्पियाधुरा और लिपुलेख उसके अभिन्न अंग हैं। यह विवाद 2020 में उस समय और गहरा गया था जब भारत ने धारचूला से लिपुलेख तक सड़क निर्माण किया था, जिसके जवाब में नेपाल ने अपना नया राजनीतिक नक्शा जारी किया था।
इस पूरे विवाद में चीन (China) की भूमिका भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भारत और चीन ने 2015 और फिर 2025 में इस रूट को व्यापार और तीर्थयात्रा के लिए सक्रिय करने पर सहमति जताई थी। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली (K.P. Sharma Oli) और वर्तमान नेतृत्व इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने की बात कह रहे हैं। इस वीडियो में हम विस्तार से समझेंगे कि लिपुलेख विवाद का इतिहास क्या है और क्या इस तनाव के बीच श्रद्धालु सुरक्षित रूप से अपनी यात्रा पूरी कर पाएंगे।

Nepal has officially lodged a protest against the joint plan of India and China to conduct the Kailash Mansarovar Yatra through the Lipulekh Pass in 2026. Citing the 1816 Treaty of Sugauli, Nepal claims the Lipulekh, Kalapani, and Limpiyadhura regions as its sovereign territory. This video analyzes the diplomatic fallout, the historical border dispute, and the impact on thousands of pilgrims scheduled to travel between June and August 2026.

#KailashMansarovarYatra #LipulekhDispute #IndiaNepal #BreakingNews #OneindiaHindi #Diplomacy #Kalapani #Mansarovar2026 #InternationalRelations

~HT.318~ED.106~PR.514~GR.122~

Category

🗞
News
Transcript
00:00निपाल का कैलाश मानसरवर यात्रा में अडंगा
00:04लिपुलेक पर बाले ने भारत को लिखा प्रोटेस्ट नोट
00:08कैलाश मानसरवर यात्रा आस्था, आध्यात्म और हिमाले की कठिन राहों से जुड़ी एक ऐसी परंपरा है
00:14जुसे हर साल हजारो श्रधालू पूरा करने का सपना देखते हैं
00:17लेकिन इस बार ये पवित्र यात्रा एक नए कूट नितिक विवाद में घिर गई है
00:21नेपाल ने लिपुलेक दर्रे के रास्ते यात्रा कराने की भरत की और चीन की योजना पर कड़ाय तराज जताया है
00:27नेपाल ने इसे अपनी संप्रबुधा से जोड़ा मुद्धा बताया है
00:30निपाल के विदेश मंत्राले ने साफ कहा है कि लिपुलेक शेतर उसके अधिकार शेतर में आता है और यहां किसी
00:36भी तरह की गतिवी थी उसके अनुमती के बिना नहीं होनी चाहिए
00:39कठमांडू से जारिस बयान को दक्षिन एशिया के लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवाद का नया ध्याय माना
00:45जा रहा है
00:46निपाल ने ये आपत्ते सिर्फ इंडिया ही नहीं बलकि चाइना के सामने भी आधिकारिक तोर पर दर्ज कराई है
00:51दरसल भारत ने हाल ही में घोशना की थी कि 2026 में कैलाश मानसरवर यात्रा जून से अगस्त के बीच
00:57आयोजित की जाएगी
00:58इस दोरान करीब 1000 स्रधालू दो प्रमुकरास्तों नाथुला और लिपुलेक दर्रे के जरीए यात्रा करेंगे
01:05इसके लिए ओनलाइन रेजिस्ट्रेशन भी शुरू हो चुका है लेकिन जैसे ही लेपुलेक रूट का जिकराया नेपाल ने तुरंत विरोध
01:11दर्ज कर दिया
01:12नेपाल का कहना है कि इसी ओजना के बारे में उसे न तो पहले से जानकारी दी गई और नहीं
01:17उसकी सहमती ली गई
01:18विदेश मंत्राले ने अपने बयान में दो टुक कहा कि लेपुलेक उसका अभिन हिस्सा है और वहां किसी भी तरह
01:23की धार्मिक व्यापारी के अभुनियादी धाचागाति विधी से पहले उसको किसी की अनुमती की जरूरत नहीं है
01:29इस विवाद की जड़ इतिहास में चुपी है नेपाल 1816 में ट्रीटी ओफ सुगौली का हवाला देता है जिसके नुसार
01:36काली नदी को भारत नेपाल सीमा माना लिया था
01:39नेपाल का दावा है किस नदी की उत्पत्ती लिम्पया धूरा से होती है और इसलिए काला पानी और लिपुलेग जैसे
01:45हिससे उसके अंतरगत आते हैं वहीं भारत का नजरिया इससे अलग है
01:49भारत का कहना है कि काली नदी का सोर्ज इससे पूर्व में है और उसे आधार पर ये शेतर भारत
01:53का हिस्सा बनता है
01:541962 के भारत चीन युद के बाद से भारत ने काला पानी इलाके में अपनी सेन और पुशासनिक मौजूदगी मजबूत
02:02कर दी तब से ये शेतर उसके नियंतरण में है
02:04ये विवाद 2020 में उस समय और बढ़ गया जब भारत ने उत्राखंड के धार चूला से लिपुलेक तक सड़क
02:10का नर्मान किया
02:11इसके जवाब में नेपाल ने एक नए राजुनितिक नक्षा जारी किया जिसमें कारा पानी लिपुलेक और लिम्पिया धुरा को अपने
02:17शेतर के रूप में दिखाए
02:18इसे दोनों देशों के रिष्टों में तनाव बढ़ गया था
02:20इस पूरे मामले में चीन की भूमी का भी एहम है
02:232015 में भारत और चीन ने लिपुलेक दर्रे को विपार और यात्रा के लिए खोलने पर सहमती बनाई थी
02:29जिसमें नेपाल को भी शामिल नहीं किया गया था
02:322025 में भी दोनों देशों ने इस रूट को फर से सक्रिय करने की दिश्वा में कदम बढ़ाए
02:36जिसके बाद नेपाल ने एक बार फिर विरोध तरच कराया
02:39नेपाल के नेताव जिन में पुरोप्रधान मंतरी के एपी शर्माओली भी शामिल है
02:43इस मुद्दे को उंतराष्ट्य मंचों पर उठा चुके हैं
02:45लेकिन अब तक कोई स्थाई समधान नहीं निकल पाया है
02:48कुल मिला कर कैला आश्मान सरोवर यात्रा जैसे धार्मी कायोजन के बीच खड़ा ये विवाद
02:56अब सवाल ये है कि क्या तीन देश आपसी समध से इस मसले का हल निकाल पाएंगे
03:01या फर ये विवाद आगे और गहराता जाएगा जुसका असर न सर्फ कूटनितिक रिष्टों पर पड़ेगा
03:06बलकि श्रद्धालों की आस्था पर भी पड़ेगा
03:08इस खबर में इतरा ही अपडेट से लिए देखते रहे हैं One India Hindi
Comments

Recommended