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हिंदी सिनेमा से एक और दिग्गज सितारा हमेशा के लिए विदा हो गया. 60 के दशक के मशहूर एक्टर Sudesh Kumar का 1 मई को 95 साल की उम्र में निधन हो गया. सांस लेने में तकलीफ के चलते उन्हें मुंबई के ब्रीच कैंडी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन अपनी अंतिम इच्छा के अनुसार वह घर लौट आए और वहीं आखिरी सांस ली. 1931 में पेशावर में जन्मे सुदेश कुमार का असली नाम सुदेश धवन था. उन्होंने एल्फिंस्टन कॉलेज से पढ़ाई की, लेकिन डॉक्टर बनने के बजाय एक्टिंग को अपना करियर चुना. उनका फिल्मी सफर Prithviraj Kapoor के थिएटर ग्रुप से शुरू हुआ. 1959 की फिल्म ‘छोटी बहन’ से उन्हें पहचान मिली, जबकि ‘सारंगा’ ने उन्हें स्टार बना दिया. इसके अलावा ‘भरोसा’, ‘गृहस्थी’ और ‘खानदान’ जैसी फिल्मों में भी उन्होंने शानदार काम किया. 70 के दशक में उन्होंने प्रोडक्शन में भी कदम रखा. आज उनके जाने से इंडस्ट्री में शोक की लहर है|

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~HT.504~PR.480~ED.482~

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00:04फिल्मी दुनिया में आज एक घहरा सन्नाटा है सब दुख में डूबे हैं वो चेहरा जो साठ की दशक में
00:10लाकों दिलों पर राज करता था आज हमारे बीच एक खामोश हो गया है एक ऐसा नाम जिसकी मुस्कान में
00:16अपना पन था और एक्टिंग में सच्चाई थी आज सिर्
00:29के उम्र में उनका निधन हो गया और उन्होंने इस दुनिया को अलविधा कह दिया उन्होंने एक मही को अपने
00:34घर में अन्तिम सांसली बताय जा रहे कि सांसले में उन्हें तकवीफ हो रही थी जिसके चलते ओनि मुनबई के
00:40ब्रीच केंडी ह�ास्पिटल में एडमिट करा�
00:46परिवार ने इसके बाद जो मेडिकल सेट अप था वो घर पर ही तयार किया लेकिन आखिरकार जिन्दिकी की जंग
00:52वो हार गए
00:53साल 1931 में पेशावर यानि की जो अब पाकिस्तान में हैं वहां उनका जन्म हुआ था और उनका असली नाम
00:59सुदेश धवन था
01:00आजादी से पहले उनका परिवार मुंबई आकर बस गया और उनोंने ही पर अपनी कॉलिज की पढ़ाई की
01:06लेकिन दिल में एक सपना था और वो सपना था एक्टर बनने का परिवार चाहता था कि वो डॉक्टर बने
01:12लेकिन उन्होंने अपना पैशन फालू किया
01:15उनका फिल्मी सफर शुरू हुआ पृत्री राज कपूर के थेटर गुरूप के साथ शुरू आती द्रों में उन्होंने बहुत छोटे
01:21छोटे रोल किये लेकिन साथ के आसपास उनकी फिल्म आई छोटी भेन उससे उन्हें असली पहचान मिली इसके बाद उन्होंने
01:28भरूसा
01:29ग्रस्ती और खांदान जैसी फिल्मों में शांदार एक्टिंग कर अपना जादू भिखे रहा था लेकिन उनकी जिंदकी में असली टर्निंग
01:36पॉइंट जब आया जब साल 1961 में फिल्म सारंगा में उन्हें रात उरात इस्टार वाली फील कराई और रात उरात
01:43वो सभी के �
01:44दिलों पर छा गए सतर के दशक में उन्होंने अक्टिंग के साथ साथ प्रोडिक्शन में भी अपना हाथ अजमाया और
01:50वहां भी सफल था हासिल की मन मंदिर उल्जन बदलते रिष्टे और जान हतेली पे जैसी फिल्मों में उन्हें एक
01:57अलग ही पहचान मिली थी आज अब
02:10भी अपनी टीम की तरफ से उन्हें शद धांचली अर्पित करते हैं
02:40क्कुम एं भी खते हैं
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