00:00इलहाबाद हाई कोट का फैसला सर्वर्जिक जगापर नमाज पढ़ने की सिसले में आया है
00:06और ये फैसला बिल्कुल सही है और दुरूस्त है
00:10इसलिए कि शरीयत इसलामिया की रोशनी में भी ये बात इस्पष्ट है
00:16कि ऐसी जगा पर नमाज न पढ़ी जाए जहां पर कोई विवात खड़ा हो या कोई तनाजा हो
00:22या किसी को कोई आपती हो या कोई एतराज हो
00:27ऐसी जगा पर नमाज पढ़ने से बचना चाहिए
00:30और सरवजनी जगा ऐसी जगा होती है जहां पर ट्रेफिक करी और लोगों की आमदो रफ्त भी बहुत होती है
00:40नमाज पढ़ना वाला भी दिश्टब होगा
00:43अब गाड़िया है लोगों को जाना है अपने आफिसस जाना है इंबुलेंस है उसको हस्पिटल लेकर जाना है मरीज है
00:51तो इन तमाम चीजों के सिसले में इसलाम ये कहता है कि इसलाम किसी को तकलीफ देना नहीं चाहता
00:58इसलाम सब को सब के लिए रह्म का नजरिया रखता है
01:06इसलिए सरवजनी जगा पर नमाज नपढ़के बलकि अपनी दुकान है मकान है मस्जिदों में नमाज पढ़ें
01:14ताकि मस्जिद में नमाज पढ़ने से दुकान मकान में महफूज जगा पर नमाज पढ़ने से
01:21ये कि नमाज की अहमियत नमाज की इफादियत उसकी ताजीम और उसका विकार बाकी रहता है
01:27मानिय उच्छ नियाले इलहवाद का जो फैसला आया है
01:31कि सरवजनिक जगों पर नमाज नहीं पढ़ी जाएगी इस पर रोग लगाई है सफ्टी से
01:38तो ये मानिय नियाले का फैसला सरहनिय है
01:42क्योंकि देखिए इसलाम में भी यही बात कही गई है
01:47कि नमाज पढ़ने के लिए अपनी जाती जमीन का होना
01:52और पाक साफ जमीन का होना और निर्विवाद होना
01:56ये जरूरी होता है अब जहां पर सरवजनिक इस्थान है
02:00और जिस देश में कई धर्मों के लोग रहते हैं उनके अधिकार निकलते हैं सरवजनिक जमीनों में
02:07तो ऐसे सरवजनिक इस्थानों पर अगर किसी एक विशेश धर्म के लोग
02:12वहां अपनी पूजा अर्चना करनी का प्रियास करते हैं या करते हैं
02:17ये एक खानून की नजर में भी ठीक नहीं है और इसलाम की नजर में भी ठीक नहीं है जहां
02:23भी कोई विवाद उत्पन होता है इस तरह का किसी गैर मुस्लिम के द्वारा तो फिर वो नमाज ठीक नहीं
02:31है वहां होनी तो मानने नियाले का जो फैसला है ये इसलामिक नजर से भी
02:35सही है और खानून की मिज़द में भी बिल्कु सही है इसका स्वागत और खैर मक्दल हुआ जाए है हाँ
02:41लोगों से भी हम यही अपील करते हैं कि मानने नियाले के फैसले का अनुपालन करें और फिर हम तो
02:47यह चाहते हैं कि यह इस तरहा का के फैसले जो है पूरे देश में प
03:05हैं और सद्भावना सरह हैं ने लाबाद हाई कोट का जो यह डिसिशन आया है कि पॉब्लिक प्रॉपर्टी पे बिदाओड
03:14दी पर्मिशन अब दी कॉंपिटेंट अथॉरिटी नमाज नहीं अदा की जा सकती जाए जाए बात है यह फैसला इस पर
03:23दा लाव दा लैंड है �
03:25और हम लोगे समझते हैं कि यही रूल और यही गानून तमाम रिलिजिस अक्टिविटीज पर नाफिज होगा और रिलिजिस के
03:34अलावा भी जो भी अक्टिविटीज हैं उन पर भी पब्लिक प्रेसिस पर इस तरीके के अक्टिविटीज पर यह फैसला लागू
03:43होना चाहि�
03:55एस बेदात बिलिजिस अख़ ल
03:57फही पर इस झासर लागू पर रिलिजिस अcanसली प्रेसिद के अधिया सतूर के क्लिजिस अगू है
04:25झाल झाल
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