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Buddha Purnima 2026: क्यों मनाई जाती है बुद्ध पूर्णिमा? आज क्या करें और क्या नहीं? भगवान बुद्ध के जन्म से लेकर महापरिनिर्वाण तक की वो 3 बड़ी घटनाएं जो आज के दिन को बनाती हैं साल का सबसे पवित्र दिन।

आज पूरे देश और दुनिया में शांति और करुणा का प्रतीक बुद्ध पूर्णिमा (Buddha Purnima) बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इसे “त्रिगुण पावन दिवस” भी कहा जाता है क्योंकि भगवान गौतम बुद्ध (Gautama Buddha) के जीवन की तीन सबसे महत्वपूर्ण घटनाएं—उनका जन्म, ज्ञान की प्राप्ति और महापरिनिर्वाण—आज ही के दिन (वैशाख पूर्णिमा) घटित हुई थीं।

इस रिपोर्ट में हम आपको बता रहे हैं कि आज के दिन का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व क्या है। बिहार के बोधगया (Bodh Gaya) में पीपल के पेड़ के नीचे बुद्ध को ज्ञान मिला था, जबकि कुशीनगर (Kushinagar) में उन्होंने अंतिम सांस ली। आज लुंबिनी से लेकर सारनाथ तक हर जगह दीपों की रोशनी और बुद्धम शरणम गच्छामि के मंत्र गूंज रहे हैं।

बुद्ध पूर्णिमा पर दान-पुण्य और खीर (Kheer) खिलाने का विशेष महत्व है। साथ ही, आज के दिन ध्यान (Meditation) और आत्ममंथन करना जीवन में सकारात्मकता लाता है। अगर आप भी आज के दिन का पूरा लाभ उठाना चाहते हैं, तो जानें कि आज आपको कौन से काम करने चाहिए और किन गलतियों से बचना चाहिए। देखिए ऋचा पराशर की यह विशेष प्रस्तुति।
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~HT.504~PR.514~ED.110~

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00:06आज पूरे देश और दुनिया में आस्था शांती और करुणा का प्रतीक बुद्ध पुर्णिमा श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया
00:11जा रहा है।
00:30दान और सनान को विशेश महत्व देते हैं। इसके अलावा कौतम बुद्ध को भगवान विश्नु का अवतार भी कहा जाता
00:37है। इसलिए भगवान बुद्ध से सिर्फ बहुत धर्म के लोग नहीं, हिंदु धर्म के लोग भी जूड़े रहते हैं, उन्हें
00:42आस्था का प्रत
00:57प्रति हुई। यही नहीं, उन्होंने कुशिनगर में इसी पुर्णिमा के दिन महापरिनिर्वान भी प्राप्त किया। यही कारण है कि ये
01:05दिन बौध धर्म के अनुयाईयों के लिए बेहद खास माना जाता है। देश के विभिन हिस्सों में इस अफसर पर
01:10खास कारिकरम
01:11मायोजित किये जा रहे हैं। मंदिरों और विहारों में सुबह से ही श्रधालों की भीर देखने को मिल रही है।
01:17लोग भगवान बुध की प्रतिमा के सामने दीप जला कर पूजा आर्चना कर रहे हैं, उनके उपदेशों को याद कर
01:22रहे हैं। इस दिन सिर्फ अपने दे�
01:36अहिंसा, करुणा और सत्य के मार्ग पर चलना। भगवान बुध ने मध्यम मार्ग का सिधान्त दिया, जिस मुम्नों ने जिखाया
01:43कि जीवन में न तो त्यधिक भोग होना चाहिए और नहीं अत्यधिक त्याग, बल्कि संतुलन ही सच्च्छा रास्ता है। आज
01:50के समय में
01:51जब दुनिया तनाव और संघर्ष से जूज रही है, बुध के ये विचार और भी प्रासंगीक हो जाते हैं। बुध
01:56पुणिमा के आउसर पर लोगदान पुणिय भी करते हैं। गरीबों और जरूरत मंदों को भोजन, वस्त्र और धन का दान
02:02दिया जाता है। कई जगहो
02:16इस दिन ध्यान और साधना पर भी विशेश जोर दिया जाता है। लोग सुभह जल्दी उठकर ध्यान करते हैं जिससे
02:21मान से कि शान्ती और आत्मिक संतुलन प्राप्त होता है। कई बौद अनुयाई इस दिन उपवाज भी रखते हैं और
02:27साधगी पुणिर जीवन जीने क
02:29संकल्प लेते हैं। विशेश जीवन का मानना है कि बुद पुड़ने मां सर्फ एक धार्मिक पर्व नहीं बल्कि जीवन को
02:34बहतर बनाने का अवसर भी है। यह दिन हमस सिखाता है कि सच्चे खुशी बाहरी चीजों में नहीं बल्कि हमारे
02:40भीतर ही होती है। अगर हम इप
02:54उत्सव नहीं बल्कि आत्म मन्थन और आत्म सुधार का भी अवसर है। जहां हर व्यक्ति खुद से ये सवाल कर
03:00सकता है कि क्या वो सही मार्क पर चल रहा है। उस खबर में इतरा ही। अपडेट्स के लिए देखते
03:05रहें वन इंडिया हिंदी।
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