00:01मैं मा काली के भक्तों के बीच जाता था तो संभवत हा इसलिए मा काली भी मुझे निरंतर्ण नहीं उर्जा
00:15से भरती जा रही थी
00:18साथियों आपको याद होगा जब जनवरी दोजार चोबिस में आयोध्या में राम लला की प्राण प्रतिश्टा का अजोजन हुआ था
00:33तो उससे पहले मैंने ग्यारा दिनों का अनुस्ठान किया था बुरत किया था
00:46मैं दक्षिण भारत के अनेग मंदिरों में गया था देवी देवताओं से आशिरवाद लिया था
00:56इस चुनाव में भी मुझे बैसी ही अनुभूती हुई है जैसी अनुभूती किसी देवी मंदिर के दर्शन के समय होती
01:11है
01:17इसके पीछे बंगाल के प्रति मेरा जो लगाव रहा है
01:26शक्ती की भक्ती रही है
01:30मेरे व्यक्तिक जीवन की आध्यात्मिक यात्रा का यह उर्जा केंद्र रहा है
01:39बंगाल के महान व्यक्तित्मों की प्रेरणा रही है
01:43और इश्वर रुपी आप जन्ता जनार्दन का अपार प्रेम रहा है
01:54बंगाल में जो अध्यात्मिक अनुभूती हुई है
01:59बंगाल की इस धर्ती पर मैंने जो अनुभू किया है
02:02उसे मैं स्वयम पर अपने आप पर बहुत बड़ा आशिरवात समझता
02:12साथियों बंगाल की इन रेलियों में रोड़्शों में
02:20मुझे इतने अपनत्पपरे संदेश मिले हैं
02:26भाती भाती की तस्वीरे मिली है कि मैं उन्हें कभी भी भूल नहीं सक्वा
02:35मैं रेलियां और रोड़्शों के बाद जब भी पहला मोका मिलता है
02:42रात में कितनी ही देर क्यों न हो जाए
02:47बहुत तसली से उन चित्रों को देखता हूँ
02:52और चित्रों के पीछे जो छोटे छोटे कलाकारों के भाव है
02:59उसे महसूस करने की कोशिस करता हूँ
03:02आपके संदेशों को आपके पत्रों को पढ़ता हूँ
03:10कही पर आपके दर्द भी होते हैं
03:13कही पर आपकी मेरे लिए दुआ भी होती है
03:17और बाद में मैं अपना जबाब भी लिखवाता हूँ
03:22और ये प्रक्रिया जब से चुनाव शुरू हुए तब से चल रही है
03:31बंगाल की जनता जनारदन का इतना असिम प्रेम
03:35मेरे लिए बहुत बड़ा सौफाग्य है
03:40छोटे-छोटे बच्चे युवा, महलाए, बुजूर
03:46मैं उनकी आखों में जो सनेह देखता हूँ
03:52चहरे पर जो भाव देखता हूँ
03:57वो मेरे जीवन की बहुत बड़ी पूजी है
04:04कई बार जब वो मुझे देखकर रो पड़ते हैं
04:09तो मुझे भी अपनी भावनाए नियंतित करने में
04:15बहुत मेहनत पड़ती है
04:18लेकिन जब मैं रेली स्थाल या रोड़्सों से वापस आता हूँ
04:25तो बहुत देर तक आपकी आवाज गुंजती रहती है
04:36आपके चहरे मेरी नजर के सामने से हटते नहीं है
04:44साथियों मैं कल की ही बात करूँ
04:47कल आराम बाग मैं
04:51रेली के दोरान भी मैंने देखा
04:56एक छोटी बहन
04:59जब मैं वहाँ लोगों को संबोधित कर रहा था
05:03उस समय वो बहन
05:06रेली तोड़ कर आगे आना चाहती थी
05:09और तब सिकुरिटी वालों से उस बहन की जड़ब भी हो रही थी
05:18वो बहन सुबह सुबह ही रेली स्थर पर आ गई थी
05:24बीना कुछ खाए
05:25वो बहन अपने बच्चों को भी कहकर आई थी
05:30कि वो मुझ से मिलकर ही जाएगी
05:35मैं उस अपनी बहन को छोटी बहन को प्रच्चमा प्रार्ति हूँ
05:40कि मैं उसे वहां मिलने ही पाया
05:44मैं उसकी भावना की कदर करता हूँ
05:48उसके विश्वास का मैं आदर करता हूँ
05:51और मुझे विश्वास है कभी ने कभी उस बहन से मिलना हो ही जाएगा
06:04उस बहन का अशिरवाद और आप जैसी करोरों बहनों का अशिरवाद
06:11मुझे पर सदा सरवदा बना रहेगा
06:15साथियो
06:19बंगाल की सेवा करना
06:23बंगाल को सुर्चित करना
06:27बंगाल के सामने उपस्तित
06:29एक विराठ चनवती से बंगाल को बचाना
06:34ये मेरे भाग्य में भी है
06:38और मेरा दाइत्व भी है
06:54और इस दाइत्व से
06:57मैं पीछे नहीं हटूंगा
07:08साथियो पस्तिम बंगाल के चुनाव
07:12बंगाल के साथ साथ
07:16पूरे पुर्वी भारत का
07:21हिंदुस्तान के पुर्वी हिस्से का
07:25पुर्वी भारत का भाग्य बदलने का भी जुनाव है
07:30अतीत में जब भारत सम्रुद्ध था
07:36तब उसके तीन मजबूत स्तंप्म थे
07:45अंग बंग और कलिंग
07:50अंग यानि बिहार
07:54बंग यानि बंगाल
07:58और कंग यानि कलिंग
08:01यानि उडिशा
08:03ये तीनों स्तंप कम्जोर हुए
08:09तो भारत के सामर्थ को भी जटका लगा
08:14अंग
Comments