00:00च्छत्रपती भीर सिवाजी महराज जब बहुत ठक गई युद्ध करते करते उनको लगा कि हम ठक गए तो एक दिन
00:07श्वामी समर्थ रामदास जी के पास गई और उन्होंने अपना मुकुट उतारा और कहा कि हमने बहुत लड़ाईया लड़ लिए
00:17बहुत युद्ध कर लिय
00:20अब करपा करो कि अब हमें बहुत लड़ना नहीं है अब एक बड़ी दया करो ये मुकुट समालो आप ये
00:27राजपाट आप समालो आपकी आग्या से ही हम चले अब हमसे चला नहीं जा रहा अब हमसे युद्ध लड़ा नहीं
00:34जा रहा हम बहुत ठक गए अब हम विश्राम च
00:38चाहेते हैं, अब हम कुछ दिन कुछ करना नहीं चाहेते हैं,
00:42मुश्कुराते हुए, स्वामी समर्थ रामधास भगवान ने कहा,
00:47ठीक है, हमें सुईकार है, लेकिन एक बात हम कहنا पैंट है,
00:52आप हमारे कौन हो, बोले हम आपके सिस्थे हैं,
00:54तो वो हम कौन हैं वो आप गुरू हो तो जो गुरू आग्या करे वो शिष्छ चाकर्थप ये
01:03सुष्वामी समार्थ राम-धास जी ने मूखत उठाया और उनके सिर पर रखा आज से मेरा राज्य है
01:09मैं चलाओंगा पर आग्या तुम्हें हैं तुम्हें संचालन करना है।
01:39जिनको पढ़कर हम जिनको जानकर हम जिस भूमी पर आकर जिनके स्वराज गठन की स्थापना को पढ़कर हमने हिंदू राष्ट
01:49का संकल्प लिया।
02:09मैं भी कोई निंदा करे तो हम सुन भी नहीं सकते। और हम तो क्या इस देश का प्रतेक सनातनी
02:16यदि आज जीवत है जिन्दा है।
02:19हिंदुत्य के लिए यदि वो सजग है तो सबसे बड़ा स्वे छत्रपती वीर शिवाजी महराज का है।
02:25और हमें इस बात का दुख है कि जो चत्रपती वीर शिवाजी को मानते हैं।
02:30तो संभाजी विग्रट के लोग हो अत्वा फिर मराठा सामराज में परंपरा में अपने जीवन को जीने बाले मराठा हो।
02:38वो हमारे ही लोग है। हम भी छत्रपती शिवाजी को मानते और वो भी उनको ही मानते।
02:45और हम लोग आपस में खींचातानी करेंगे तो दूसरे लोगों को मौका मिलेगा हमारा एक परशेंट भी इस परकार का
02:53कोई मत नहीं था ऐसा कोई विचार नहीं था कि हम छत्रपती हमने गुरु महिमा के प्रती कितने वो शमर्पित
03:00थे उस बक्तम्प को हमने गुरु महिमा क
03:03के प्रती गाया था कि गुरुओं के प्रती हमारे देश के राजा हमारे देश के हिंदू हिर्दय संब्राट हिंदू के
03:10सिर्मौर हिंदू के चक्रधर संब्राट चत्रपती वीर श्रिबाजी महराज संतों को मठों को महंतों को आई तुल्जा भवानी को कितना
03:19हम उस भाव
03:33पर हम ये भी कहेंगे कि हमारी बात को अनर्गल प्रस्तुत ना किया जाए क्योंकि हम जीते भी सिवाजी के
03:40छत्रपती सिवाजी के लिए हैं मरते भी उनके लिए हैं हमारा जीवन भी उनके स्वराजी की स्थापना के लिए हम
03:46हिंदु राष्ट की कल्पना या विचारधारा ह
03:49हमने जो ली है वो उनसे ही ली है तो हम भला शुप्न में उनकी कैसे आउ मानना कर शक्राइब
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