00:11हम अभी खड़े हैं पहलगा में जहां पर ये उन शहीदों के लिए एक मेमोरियल बनाया गए जो इसी दिन
00:19बाइस एपरेल के दिन बाइसरेन के वादियों में जिनकी जान चले गई थी एक आतंकिवादी हमले में
00:25आज सुबा से ही यहां पर लोग और कहीं नेता जो बाहर से भी आए हैं जो मुकिश्मिट से बाहर
00:31भी आई वो इस जगा पर आए इस मेमोरियल पर आए और उन लोगों को शरदान दे लिए उन 26
00:39लोगों को शरदान दे लिए जो 22 एपरेल के दिन आतंक वादियों द्वारा ब
00:55जलते जो भी आज यहां आ रहा है कई लोग हमने देखे उनने पहले गाड़ी रोकी और पहले उन शहीदों
01:02के प्रती शर्टान जली अर्बिद की जो लोग पिछले साल आज ही के दिन इस पहलगाम की बैसरन वादी में
01:10आतंक वादियों द्वारा मारे गे थे यह जो मेरे प
01:25खूब सूरत वादियों में मेरा नाम अशोक है मैं चन्ने से आया हूँ तो यहां पर मैं कश्मे टूर पैकेज
01:35के लिए था बट अनफर्टुनेटली आज का दिन होई है जो लास्ट टेरिस्ट अटक पे अराउंड 26 लोग मारे गए
01:42थे तो उनको श्रदान जली देने का मेर
01:45मेरे तरफ सी एक मौका था तो हम पहलगाम आये ते आज तो इसा नहीं होना चाहिए था यहां पर
01:52बट मैं कल सी यहां पर हूँ था पपलिकर वेरी गूड यह तो सपोर्टिव और हमने पूरा पहलगाम घुमा है
01:59तो कोई डरग की बात नहीं है तो अबर्टिंग इस गूड
02:17प्रिवाग के साथ वादा किया था कि उनके परिवाग के साथ शिपसेना खड़ी है उसके तेहत हमने उनको एक घर
02:23बना की दिया पिकस उनके घर की हालत परी खराब थी जब शेहिद आदिल आप सब को मालूँ होगा कि
02:28वो यहां का लोकल लडगा था जिसने अपनी जान दे
02:42हुए और आज हम लोग यहां पे आए थे उज़ेदों को शर्दाज़ी देने के लिए आज वक्त आ गया है
02:49कि हम लोग सब देशवासी साथ में आए और किश्मीर की तरह भी रुक करें और जैसे अब आने वाली
02:55अमना जात्रा है उसमें सब लोग तमाम लोग शिरकत करें आए
03:10कि देशवासी यहां पे एटलिस एक अफ़ता और मैं करता दो चार दिन तो पहल गाम में वितीत करें पहल
03:15गाम एक अपने अपने अद्बुत जगे है एक ऐसा एक मैमरी है कि जो हमें संजोगे रखनी है और पूरे
03:24देश को पता चलना चाहिए कि यहां पे दो हजार पच्�
03:39हैं वो जब यहां आते हैं उनको इस जगे को एक आइटनरी में डालना चाहिए ताकि लोगों को पता चले
03:44कि यहां पे लोगों ने कैसे अपनी जान दी देश के लिए और यह पहल गाम अपने आप में का
03:50दुद जगे है बहुत अच्छी जगे है खुबसुर जगे है यहां
04:09अच्छी का नाम लिखा है और साथी साथ अन आदिल का भी नाम लिखा है आदिल जो एक गुडसवार था
04:17और उसका काम था यहां पर जो टूरिस्त आते थे देश विदेश से उनको इन पहल काम की खुबसूरत वादियों
04:25का गुमा लेता था उनको उनको अपनी यह वादी �
04:28फकर से लेकिन बाइस एपरेल को उसकी जिन्दगी हमेशा के लिए उसकी जिन्दगी का चराग हमेशा के लिए आतंक वादू
04:38ने बुचा दिया पहल काम से वान इंडिया के लिए मैं इजहार अली
04:45कर लो बादिया कि लिए बादिया ओनुट स्थाथ दिया च्हां के लिएडिया के मैं इनको आपटे सोफ्डिया थैंडिया न Ό,
04:52आपी अप्टे साथ चाली हमेशा हूशी
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