Skip to playerSkip to main content
  • 1 hour ago
पश्चिम बंगाल में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बेंगईजोत नाम का एक छोटा सा गांव दार्जिलिंग के पास होने के बावजूद पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र नहीं है. लेकिन ये गांव पश्चिम बंगाल के राजनीतिक अतीत की याद दिलाता है। खास तौर पर नक्सलबाड़ी आंदोलन की, जो देश के दूसरे हिस्सों में भी फैल गया था.माना जाता है कि 1967 में नक्सली आंदोलन की शुरुआत बेंगईजोत से ही हुई थी. इसे मुख्य रूप से कृषि संबंधी असंतोष और क्रांतिकारी कम्युनिस्ट विचारधारा पर आधारित एक धुर वामपंथी, सशस्त्र विद्रोह के रूप में देखा जाता है. स्थानीय युवाओं का कहना है कि कानू सान्याल जैसे नेताओं के नेतृत्व वाले इस आंदोलन का अब इस क्षेत्र में कोई प्रभाव नहीं है.  हालांकि इस गांव में मौजूद कार्ल मार्क्स और चारू मजूमदार की प्रतिमाएं इस बात का संकेत देती हैं कि आंदोलन को पूरी तरह से भुलाया नहीं गया है. उस आंदोलन की यादों को खेमू सिंघा जैसे बुजुर्ग आज भी याद करते हैं, वे कभी इस आंदोलन से घनिष्ठ रूप से जुड़े थे. सिंघा भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी-लेनिनवादी) के सदस्य हैं, जिसकी स्थापना चारू मजूमदार ने की थी. वामपंथी विचारधारा से उनका जुड़ाव इस बात से झलकता है कि वे आज इस आंदोलन की स्थिति का आकलन कैसे करते हैं. 

Category

🗞
News
Transcript
00:00पश्चिम बंगाल में भारत नेपाल सीमा पर इस्थित बेंगई जोत नाम का एक छोटा सा गाउं दारजिलिंग के पास होने
00:07के बावजूद पर्याचकों के आकर्शन का केंद्र नहीं है।
00:11लेकिन ये गाउं पश्चिम बंगाल के राजनीतिक अतीत के याद दिलाता है। खास तोर पर नकसल बाड़ी आंदोलन की जो
00:18देश के दूसरे हिस्सों में भी फैल गया था।
00:41अब इस शेत्र में कोई प्रभाव नहीं है।
01:11खास तो फिलाने वाला बात था। तो वह सब हमने उतना ज्यादा तो देखे नहीं है। थोड़ा बहुत सुने हुए
01:17हैं।
01:17और प्रभाव कुछ भी देखे भी हैं ऐसे भी नहीं कि एकदम नहीं देखे हैं।
01:21तो देखे हैं लेकिन उतना नहीं है। और अभी तो फिलाल ये मान लीजिए परसंटेज के हिशाब मान लीजिए।
01:47आज भी याद करते हैं। वे कभी सांदोलन से घनिष्ट रूप से जुड़े थे।
01:51सिंघा भारतिय कम्यूनिस्ट पार्टी बांक्सवादी लेनिनवादी के सदस्य हैं जिसकी स्थापना चारू मजूमदार ने की थी।
01:58वामपन्थी विचारधारा से उनका जुड़ाव इस बात से जलगता है कि वे आज इस सांदोलन की इस्तिथी का आंकलन कैसे
02:05करते हैं।
02:28आगमी दिन में आम जंता इस रास्ता पर इलो का खिलाप में अंदोलन में उत्रे गए।
02:58अँडमी तो झाल बुवड़ा गोटा ले करेकर चलता है।
03:03हमारा था हम चोटा बच्चा पंडरो दिन हुआ था॥ा।
03:07हम भोला की हम कोई घरितों
03:09एन पंदी।ों नेत्रितों देते हैं
03:13हम कोई सा Article हम के घरमें तो यही बच्चा लेकर हम चला गिया।
03:18那个人的名字是,我们的名字是 War and Niggal Gio
03:31之后和安道lan之后,他们还没有忘记了
03:47我的顾客在股的股票需要在身上
03:48foreign
04:19foreign
04:24foreign
04:54
04:56Thank you very much.
Comments

Recommended