00:09जमी पे खड़ा पर सपने है आस्मान धूप में जलता पर हवा में उदन
00:14अंधेरों का गोस्त पर रोश्नी का सिपाही दिल में है आग जो कभी न बुझी
00:19रस्ते का पत्थर पैर के नीचे पिस्सा हर सवाल का जवाब मैंने खुच से लिखा
00:24जो रुकावत बने वो है मेरी शक्ती चत्तन के बीच पनी की रख दी सकती
00:30अगर एरिया पार कर दिखाएंगे जखमों के दाग मेडल बनाएंगे गिरने का दर खुद से मिटाएंगे जीत के गीत मिलके
00:39गाएंगे
00:40सागस के शहर जलाएंगे शोले से बिकरी हुई दुनिया बनाएंगे बोले से मैं वो कलम जो तोड़ता है रिवाज चोटा
00:48हूँ निशन बनाता हूँ अंदाज
00:50तुफण से लरता लहरों से उत्ता सपनों के पीछे खुद को भी भूलता चांद मी रात पर अंधेरा साथी मन्जिल
00:58है मेरी हर एक बात सच्ची
01:00जहां रोगे हैं वही से चलू गिर गिर के सीखा अब नहीं मैं धखू मिटी से उत्ता हूँ
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