00:16यहाँ लोग भगवान से ज्यादा बेताल से डरते थे
00:20गाउ के किनारे जंगल के पास एक पुराना बेताल मंदिर था
00:25ना कोई शिकार ना घंटी बस एक काला पत्थर जिसमें हमेशा सिंदूर और खून के दाग मिले रहते
00:34गाउवाले कहते थे भगवान माफ कर देते हैं पर वेताल याद रखता है
00:40अमावस की रात कोई उस जंगल के पास नहीं जाता और जो जाता वो वापस आता भी तो था पर
00:48पहले जैसा नहीं होता
00:49इसी गाउव में रहता था विक्रम नार्वेकर बच्पन के एक हाथसे ने उसका एक पैर शीन दिया था
00:56तब से बैसाखी उसके जिन्दगी का हिस्सा बन गई
01:01सुबह उठकर वो अपनी बैसाखी के सहारे आंगन साफ करता जल्दी जल्दी काम निप्टा लेता
01:07जैसे गाउव को दिखाना चाहता हो कि वो बेकार नहीं है
01:11लोग उसे दया की नजरों से देखते हैं
01:14बेचारा किसमत फूटी
01:17परविक्रम के मन में सिर्फ एक ही बात चुपती
01:19वो कमजोर नहीं था सिर्फ अपाहिश था
01:22उसके पुर्खे नार्वेकर थे
01:25गाउं के पुराने लोग
01:27वेताल के भगत
01:29परविक्रम ने कभी इस बात का घमंड नहीं किया
01:31उसके जिन्दगी शांत थी
01:33जब तक राधा उसके जिन्दगी में नहीं आई
01:36राधा विक्रम के बाईकों थी
01:38खुबसूरत पर गाउं की सीधी साधी लड़कियों जैसी नहीं
01:42उसकी आँखों में समुद्र जैसा रंग था
01:45गहरा बेचैन और थोड़ा खतरनाक
01:50जब राधा अंगन में पानी भर दी
01:52तो गाउं के मर्द जान बूच कर उस रास्ते से निकलते
01:55राधा को ये सब पता था
01:58वो अंजान नहीं बद्दी थी
02:00कभी बाल सभाते हुए शीशे में अपनी परचाई देखती
02:03कभी हलकी सी मुस्कान दे देती
02:05और सामने वाला समझ ही नहीं पाता
02:08कि ये मुस्कान महसूम है या जहर
02:12विक्रम ये सब देखता था
02:13और समझता भी था
02:15उसे राधा पर भरोसा था
02:17पर दुनिया पर नहीं
02:19गाउं के बजर्ग कहते थे
02:21जो औरत अपनी खुबसूरती से वाकिफ हो
02:24उसका मन हमेशा शांत नहीं रहता
02:27और राधा का मन समुद्र की तरह था
02:29कभी शांत, कभी तूफानी
02:32इसी मन को देखकर गाउं की नजर
02:34धीरे धीरे उस घर की तरफ पढ़ने लगी
02:37गाउं का मुखिया का बेटा
02:39शेखर
02:40शेखर को गाउं वाले इज़त से कम
02:42डर से ज्यादा जानते थे
02:44लगभग 35 बरस का था वो
02:46शादी हो चुकी थी
02:48तो बच्चे भी थे
02:49पर शेखर के लिए
02:50ये सब सिर्फ नाम के रिष्टे थे
02:53जब उसकी नजर राधा पर पड़ी
02:55तो वो नजर फिर कभी वापस नहीं गई
02:59वो अक्सर बहाने से
03:00विक्रम के घर आने लगा
03:01कभी कहकर विक्रम काम है
03:04कभी चाई पीने आया हो
03:06पर उसके आखे राधा को ढूंती रहती
03:08राधा ये सब पहसूस करती थी
03:11वो आखे जो देर तक ठिक जाती है
03:13उन्हें औरत पहचान लेती है
03:16कभी कभी वो जान बूच कर
03:18शेखर के सामने आंगन में पानी भरती
03:20और शेखर अपनी जुबान को काट कर
03:22खुद को रोकता विकरम ये सब देखता था
03:25और हर बार उसके सीने में कुछ चुपता था
03:28एक शाम शेखर ने विकरम को दारू पीने के लिए बुड़ाया
03:32काओ के किनारे नदी के पास
03:34दो गिलास और एक बोतल
03:36शेखर ने पहले नॉर्मल बाते की
03:39फसल, गर्जा, गाउं के जगडे
03:41फिर अचानक से बात पतल गई
03:43शेखर ने हसी के साथ कहा
03:45विकरम तुँ आपाहीच है
03:47कितना ही कमा लेगा
03:49विकरम का हाथ गिलास पर जब गया
03:51शेखर आके जोकाया
03:53मेरे पिताजी के तेरे उपर
03:55पाश लाग का गर्जा है
03:56पर तु फिकर मत कर
03:59एक रात के लिए राधा को मेरे पास छुड़ते
04:01गर्जा माफ
04:03उसका विकरम के कान बजने लगी
04:05उसका मन हुआ उसे गिलास से
04:07शेखर का सर्प फोड़ते
04:08पर सच ये था, वो एक पैर पर
04:11खड़ा आत्मी था
04:12और सामने ताकत और पैसा दोनों खड़े थे
04:16शेखर ने आखरी वार किया
04:18सोच ले, वरना कर्जा और बढ़ेगा
04:22विकरम बिना एक शब्द बोले उठ खड़ा हुआ
04:24पैसा की उठाई और वहां से चल दिया
04:28अंधेरा घना हो चुपा था
04:30विकरम चलते चलते सीधा गाओ के किनारे
04:32विताल मंदिर पहुँच गया
04:34मंदिर के बाहर
04:35वो काले पत्थर पर बैठ गया
04:37उसके आसू चुपचाप बह रहे थे
04:39वो अपनी लाचारी पर रो रहा था
04:42अपने पैर पर
04:43अपनी मजबूरी पर
04:45और इस बात पर के वो राधा को कैसे बचाएगा
04:47तब उसे अपनी आजी की आवाज यादा है
04:50विताल देव न्याए करता है
04:52पर याद रख
04:53उसका न्याए हमेशा
04:56खून मागता है
04:57विकरम ने मंदिर के अंधेरे अंदर ज्छाक कर देखा
05:00काला पत्थर
05:01सिंदूर
05:02और पुराना खून
05:04उस पल विकरम के मन में एक घ्यानक फैसला जन ले चुका था
05:07अगर दुनिया उसकी नहीं सुनती
05:09तो वो वेताल से बोलेगा
05:11बैसाखी के साहरे वो उठा
05:13और बिना पीछे देखे घर की तरफ चल दिया
05:16विकरम घर पहुशते ही
05:31जिस पर कभी ना खुलने वाला ताला
05:34अब सिर्फ आदत के भरों से टिका हुआ था
05:37विकरम ने काप की उंगलियों से पेटी खुली
05:40अंदर सूखे भूल
05:41तूटे हुए नारियल के चिलके
05:43और एक मुटी पुरानी किताब थी
05:45उस पर लिखा था
05:47नार्वे कराची बाखर
05:49ये बाखर उसकी पर दादी ने लिखी थे
05:52उसमें लिखा था
05:53वेताल कैसे आता है
05:55कैसे बांधा जाता है
05:56और कैसे बदले में कुछ ले जाता है
05:59विकरम पढ़ते पढ़ते रुका
06:00एक जगा लाल स्याही में लिखा था
06:03वेताल से मांगना आसान है पर जो दिया वो हमेशा कम लगता है
06:08विक्रम ने किताब बन की उसने फैसला कर लिया था
06:11अगली रात अमावस थी गाओं में किसी के घर दिया नहीं चला
06:15विक्रम काला मुर्गा लेकर चुपचाब वेताल मंदिर प्या
06:19उसने बाखर के मताबिक सब तैयारियां की चारो तरफ चावल की रेखा बीच में मुर्गा
06:26विक्रम ने मंत्र शुरू किया पहले उसकी आवाज कहां पर रही थी
06:30फिर जैसे जैसे गिनिती पड़ी सो पान्सो नौसो उसका डर किसी और चीज़ में बदलने लगा
06:40एक हजार एकवी बार मंत्र के बाद उसने मुर्गे की बली दी
06:45खून जमीन पर गिरते ही हवा एकदम घूम गई
06:49पेडों की पत्या उल्टा चलने लगी
06:51और फिर धूम के तू उठा
06:53विक्रम समझ गया बेताल आ चुका है
06:58विक्रम ने कापती आवाज में कहा
07:00बेताल बाबा मेरी बाईकों पर गंदी नज़र डालने वाले शेखर को मार
07:04बदले मैं मैं अपनी छोटी उंगली का रक्त चड़ाऊंगा
07:09धूम के तो किसी जीवित चीज की तरह हिलने लगा
07:12और फिर गाउं की तरह पड़ गया
07:14शेखर उस वक्त अपने घर में था
07:17अचानक घर के बर्दन गिरने लगे
07:19दीवार काप उठी
07:20शेखर हवा में उड़ गया
07:22बचाओ बचाओ
07:24पर आवाज बहार नहीं नहीं
07:26धूम के तो से खसीट कर वेताल मंदिर तक ले आया
07:29विक्रम के सामने ही
07:30शेखर का शरीर दो तुकडों में चीर दिया गया
07:33खून मिटी में समा गया
07:36धूम के तो वापस विक्रम के सामने आया
07:39अब वचन पूरा हो चुका था
07:41और अब विक्रम की बारी थी
07:44शेखर का शरीर अब भी मंदिर के सामने पड़ा था
07:47Mitty, Khoon سے Gieli ہو چکی تھی
07:50Dhum ke tu, Vikram کے بالکل سامنے منڈرا رہا تھا
07:54Hava bhari تھی, sans لینا مشکل لک رہا تھا
07:58Vikram جانتا تھا, اب تیچھے ہٹنے کا کوئی راستہ نہیں
08:02اس نے زمین پر رکھی کھڑک اٹھائی
08:04اس کے ہاتھ کام رہے تھے
08:06پر آنکھوں میں اب کوئی شنکہ نہیں تھی
08:09آجی کی آواز اس کے کان میں گونجی
08:12Vitaal سے جھوٹ نہیں بولتے
08:15Vikram نے اپنے بائے ہاتھ کی انگلی کو پکڑا
08:18ایک پل کے لیے اس نے رادہ کا چہرہ سوچا
08:22پھر کھڑک چلی
08:23درد اس کے جسم میں بجلے کی درہ روندھا
08:26وہ چیکھا اور اس کی چیک جنگل میں ہی کھل گئی
08:30خون اور کٹی ہوئی انگلی
08:32زمین پر گرنے سے پہلے ہی دھوم کے دنے نگل لی
08:36ہوا اچانک سے شانت ہو گئی
08:38Vitaal گائب ہو چکا تھا
08:40مندر کے آس پاس صرف خون
08:43ایک لاش اور ایک ادھورا آدمی بچا تھا
08:47Vikram بیساکھی کے سہارے گھر لوٹا
08:50اس کے ہاتھ سے اب بھی خون ٹپک رہا تھا
08:54رادہ نے جیسے ہی اس کی کٹی انگلی دیکھی
08:56اس کا رنگ اڑ گیا
08:58Vikram یہ کائے
09:01Vikram چپ رہا
09:03پھر دھیرے دھیرے اس نے سب کچھ بتا دیا
09:05شیکھر، بیتال، باکھر، بلی اور اپنی انگلی
09:11رادہ بینا بولے سنتی رہی
09:13اس کی آنکھوں میں ڈر تھا
09:15پر صرف ڈر نہیں
09:17اس میں چمک بھی تھی
09:19اس راد دونوں نے زیادہ بات نہیں کی
09:22Vikram تھک کر بستر پر لیٹ گیا
09:24رادہ اندھیرے میں بیٹھی رہی
09:27اس کا من شانت نہیں تھا
09:29اگلی صبح
09:30Vikram گہری نیم میں تھا
09:32رادہ چپ چاپ
09:34اسی کمرے میں گئی جہاں پرانی پیٹی رکھی تھی
09:37اس نے پیٹی کھولی
09:39ناروے کا رانچی باکھر
09:41اب اس کے ہاتھ میں تھی
09:44وہ پڑھنے لگی
09:45منتر، ویدھی
09:47اور سب سے زیادہ
09:49بلیدان کا حساب
09:50اس کے دماغ میں ایک خوفناک سوچ
09:53دھیرے دھیرے شیپ لینے لگی
09:55صرف ایک انگلی
09:56اور ایک آدمی مر گیا
09:59اگر پورا انسان
10:01اس کی نظر Vikram کے
10:03اپاہیچ پیر پر پڑی
10:04اس کے مند میں
10:05کرونا نہیں اُتر
10:06صرف ایک سوال تھا
10:08مجھے اس زندگی میں کیا ملا
10:10گریبی
10:12تنہائی
10:13ایک ایسا پتی
10:14جو نہ کما سکتا ہے
10:16نہ دنیا سے لڑ سکتا ہے
10:17رادہ نے باکھر
10:19بند کر دی
10:20پر اس کا فیصلہ
10:21کھل چکا تھا
10:22اماوس پھر آنے والی تھی
10:24اور اس بار
10:26ویتال کو بلانے والی
10:27رادہ تھی
10:29اگلی کچھ راتوں تک
10:31رادہ بلکل
10:32بدری ہوئی لگتی تھی
10:33وہ Vikram سے کم بولتی
10:35زیادہ مسکراتی
10:36پر وہ مسکراہت
10:38پہرے جیسی نہیں تھی
10:39اس کی آنکھوں میں
10:41کچھ گھوم رہا تھا
10:42جیسے وہ ہر چیز
10:44کا حساب لگا رہی ہو
10:45کبھی Vikram کے لیے
10:47کھانا لاتے ہوئے
10:48رک جاتی
10:48کبھی اس کے
10:49اپاہیچ پیر
10:50کو گھور کر دیکھتی
10:52اس کے مند میں
10:53صرف ایک ہی سوچ تھی
10:55اگر ویتال نے
10:56شیکھر کو چھر دیا
10:57تو یہ آدمی
10:59کیا چیز ہے
11:00اماوس پاس آ رہے تھے
11:02رادہ نے
11:03Vikram کے لیے
11:04اس رات
11:04خاص کھانا بنایا
11:05اس میں کچھ
11:07ایسا ملا دیا
11:07جو اس کی آجی بھی
11:09پہچان لیتی
11:10پر Vikram نہیں
11:11کھانا کھاتے ہی
11:12Vikram کی آنکھیں
11:14بوجھل ہو گئیں
11:15وہ بے ہوش ہو گیا
11:16رادہ نے ایک پل کے لیے
11:18اس کے چہرے کو دیکھا
11:19نہ آسو
11:20نہ ہج کے چاہت
11:21صرف
11:22فیصلہ
11:24راد کا اندھیرہ
11:25اس بار
11:25زیادہ گہرا تھا
11:27رادہ نے
11:28جیسے تیسے
11:28بگرم کو
11:29ویتال مندر کے پیچھے
11:30گھسیت کر پہنچایا
11:31اس بار
11:33کالا مرگا نہیں
11:33کالا بکرا تھا
11:35رادہ نے
11:36باکھر
11:37یاد سے پڑھنی تھی
11:38چاول کی ریکھا
11:39منتر کا
11:40اچارن
11:41اس کی آواز
11:43بلکل نہیں کھاپی
11:44سو
11:45پانچ سو
11:47نو سو
11:48ایک ہزار ایک وی بار
11:50منتر کے ساتھ
11:51بکرے کی بلی تھی گئی
11:52خون زمین پر گرتے ہی
11:55ہوا پھر سے گھن گئی
11:56اور پھر دھن گئی
11:58رادہ نے
11:59بنا ڈرے کہا
12:00ویتال دیوہ
12:01مجھے سونا چاہیے
12:03اتنا سونا
12:04کہ میری زندگی
12:06کبھی کھالی نہ رہے
12:08بدلے میں
12:09نربلی
12:10دھوم کے
12:11تو پل بھر کے لیے
12:12ستھت ہو گیا
12:13جیسے سوچ رہا ہو
12:15پھر گاؤں کی طرف
12:16پڑ گیا
12:18دھوم کے تو
12:18گاؤں میں کھس گیا
12:19گھروں کے دروازے
12:21اپنے آپ کھل گئے
12:22اور دھوم کے گلے سے
12:23منگل سوتر
12:24کھینچ لیے گئے
12:25کانوں سے پھالی
12:26بھاتوں سے چوڑیا
12:28گاؤں میں
12:29چیک پکار مچ گئی
12:30پر کوئی باہر نہیں نکلا
12:33سب جانتے تھے
12:34یہ ویتال کا کام ہے
12:35کچھ ہی پلوں میں
12:37دھوم کی تو
12:38واپس
12:38رادہ کے سامنے تھا
12:40زمین پر سونے کا
12:42ڈھیر لگ گیا
12:42رادہ کی آنکھیں
12:44چمک اٹھی
12:45اس نے پہلی بار
12:46زندگی میں
12:47اتنا سونا دیکھا تھا
12:48وہ سونے کو
12:50چھونے ہی والی تھی
12:51کہ تب ہی پیچھے سے
12:52ایک آواز آئی
12:53رادہ
12:54بکرم کو ہوش آ چکا تھا
12:57اس کی نظر
12:58سونا
12:58مندر
12:59باخر
13:00اور رادہ کے چہرے پر
13:02اٹھ گئی
13:02اسے سمجھنے میں
13:03ایک پل بھی نہیں لگا
13:05رادہ اسے
13:06یہاں بلی کیلئے
13:07اس کے دل میں
13:08گصہ نہیں اٹھا
13:09صرف
13:10وہ ٹوٹ گیا تھا
13:13بکرم نے
13:13زمین پر پڑی
13:14کھڑک اٹھائی
13:15رادہ کچھ کہ پاتی
13:16اس سے پہلے ہی
13:17بکرم نے بار کر دیا
13:18ایک ہی بار میں
13:20رادہ زمین پر گر پڑی
13:22اس کا خون
13:23بیتال نے چوس لیا
13:24اور اسی پل
13:26بیتال نے
13:26رادہ کے شریف
13:27کو پوری طرح
13:28نکل دیا
13:29نہ چیخ
13:30نہ لاش
13:31صرف خاموشی
13:33بکرم بہیں بیٹ گیا
13:35روتا رہا
13:36جس عورت کے لیے
13:38بیتال کو جگایا تھا
13:39اسی نے اسے بیچ دیا
13:41بیساکی اٹھائی
13:43اور بینا پیچھے دیکھے
13:44گاؤں چھوڑ کر
13:45اندھیرے میں کھو گیا
13:49یہ کہانی اگر آپ کو
13:50اچھی لگی ہو
13:51تو ہمیں سبسکرائب کریں
13:52ہمارا انسٹیگرام
13:53اور فیس بک پیچ
13:54ضرور فالو کریں
13:57بیساکی اٹھائی
13:59بیساکی اٹھائی
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