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देश की राजधानी दिल्ली के दिल कहे जाने वाले ITO से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है जो दावों और हकीकत के अंतर को साफ़ बयां कर रही है!
​एक तरफ सरकारें वीआईपी कल्चर खत्म करने की बात करती हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस का यह चेहरा देखिये। एक एंबुलेंस जीवन और मौत के बीच जूझ रहे मरीज़ को लेकर सायरन बजाती रही, लेकिन पुलिस के जवान रास्ता रोककर खड़े रहे।
​वजह: किसी रसूखदार 'नेता जी' का काफिला वहां से गुजरने वाला था।
​बड़ा सवाल: क्या लोकतंत्र में किसी का काफिला किसी की जान बचाने से ज़्यादा जरूरी हो सकता है? एंबुलेंस को 'प्रायोरिटी' देने के नियम सिर्फ कागजों तक ही क्यों सीमित हैं?
​ट्रैफिक जाम: इस वीआईपी मूमेंट के चक्कर में घंटों आम जनता जाम में फंसी रही और एंबुलेंस बेबस खड़ी रही।
​Zyro News 24 के मैनेजिंग एडिटर शुभम त्रिपाठी का सवाल— @DelhiPolice और @dtptraffic क्या आप इस घटना की जिम्मेदारी लेंगे? अगर उस एंबुलेंस में आपके परिवार का कोई सदस्य होता, तो क्या तब भी 'काफिला' ही जरूरी होता?
​रिपोर्ट: शुभम त्रिपाठी (Managing Editor, Zyro News 24)
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Transcript
00:00And this is the idea of the CHOC in the UK and here is the ambulance.
00:06But there is a vote for you.
00:08There is a negative one at the end of the UK.
00:12There is no difference here.
00:15But it is the same duty as the negative one.
00:17The negative one is the negative one.
00:20And the negative one is the negative one.
00:23foreign
00:51But Neta Ji will go here first.
00:53Their security is fast.
00:55Let's go, okay?
00:57You guys are dumb and dumb.
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