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भाई ने घर के बाथरूम में ही कर दिया बहन का अंतिम संस्कार, देखें वारदात

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00:00नवसकार में हुशम स्ताहरखान और आप देख रहे हैं वारदात
00:0335 साल की एक लड़की की अपने ही घर के अंदर मौत हो जाती है बीमारी की वज़ा से
00:10इसके बाद अगले 5 दिनों तक उसकी लाश उसी घर में पड़ी रहती है
00:15जब लाश से बद्बू आने लगती है तब लड़की का बड़ा भाई लड़की की लाश को बाथरूम में ले जाता
00:22है
00:22और वहीं उसका अंतिम संसकार कर देता है
00:2634 साल की एक दूसरी लड़की की भी घर के अंदर ही मौत हो जाती है बीमारी के चलते है
00:32इसके बाद लड़की का पिता अपनी बेटी की लाश के साथ खुद को अगले पांच दिनों के लिए उसी घर
00:39में बंद कर लेता है
00:40पांच दिन बाद वो घर का दरवाजा बंद करता है और अगले पांच महीनों के लिए कहीं गाइब हो जाता
00:47है
00:47बिना बेटी का अंतिम संस्कार की
00:50ये दो कहानी सिर्फ इन दो लड़कियों की कहानी नहीं है
00:55बल्कि ये हमारे समाच के अकेले पन की भी कहानी है
01:14ये दो तस्वीरे एक ऐसे समाच का जग छोड़ देने वारा सच है
01:19जिसकी सचाई उसी समाच में रहने वाले हर इनसान का कलेजा चाक करते
01:30हमने अपने इसी समाच के इर्दकिर्द बड़े बड़े चमकदार शहर
01:35शहरों की रंगीनिया उंची नीची इमारते शानदार कॉलोनिया
01:44खरीदी जाने वाली तमाम खुशिया
01:49खरस ये कि जिन्दगी को गुल्जार और खुशकवार बनाने वाली हर चीज़ खरीद ली हासिल कर ली
01:57पर इन तमाम चीज़ों को हासिल करने के बाद भी हम इनसान कितने अकेले हैं
02:04कितने तन्हा हैं
02:08ये दो तस्वीरें बाहर से चमकदार और खुश दिखने वाले हमारे इसी समाज के उस अकेले पन की मुर्दा दास्तान
02:18है
02:18जो इस वक्त भी नजाने कितने ही घरों में तस्तकते रही होंगी
02:23नजाने कितने ही घर इस वक्त भी अकेले पन की आहोश में होगे
02:30जिनें कोई नहीं सुनता, जिनें कोई नहीं बूचता, जिनसे कोई नहीं बात करता
02:45ये 34 साल की प्रियंका की तस्वीर है, भरे पूरे समाज में रहकर भी प्रियंका इतनी अकेली थी
02:53कि पूरे पांच महीने तक उसकी मौत की खबर उसके घर के बाहर ही नहीं आई
03:00अपने ही घर में इन पांच महीनों में पहले वो मरती है, फिर धीरे धीरे लाश से कंकाल में तब्दील
03:08हो जाती है
03:09अपनी लाश से उठती बदबू से इशारों में पडोसियों को खुद के मर जाने का इशारा भी देती है
03:16पर कोई उसकी खबर लेने उसके बंद दर्वाजे तक नहीं आता
03:26ये तीस साल की लिपिका है बलकि धीन
03:30चुकि अभी आठ अपरेल को ही तो इसने आखरी सांस ली थी
03:34अपने ही घर के अंदर, घर के बिस्तर पर
03:37बीमार थी शायद ये लिपिका का बड़ा भाई है
03:46इसे मरती देखा, छोटे भाई को अबर दी, भाई आया चला गया
03:51पड़ोसी आजकल कहां किसी के घर में जांकते ही
03:55भरा पूरा समाच था, पर शम्षान ले जाने के लिए चार कांधे नहीं मिले
04:01पांच दिन तक लिपिका की लाश घर में ही पड़ी रही
04:05फिर बड़े भाई ने बड़े भाई होने का अजीब फर्ज निभाया
04:09घर के अंदर बाथरूम में ही रजाई कंबल की चिता सजाए और मुखागमी दे दी
04:16हाला कि कायदे से यहां इसे लाश को जराना बोले लिए
04:22ये दोनों तस्वीरे देश के दो अलग-अलग शहरों की है
04:26प्रियंका यूपी के मेरट की थी तो लिपिका जारखंड के धनबात की
04:32पर दोनों की कहानी एक जैसी थी
04:34कहान इनके अकेले पन और समाच से कट जाने की
04:40दोनों का ही परिवार हर परिवार से दूर था
04:43पडोसी पास होकर भी बहुत दूर
04:46और हिस्से में सिर्फ तनहाई और अकेला पन
04:53ये धर्मात की एक कॉलोनी है
04:55ठीक ठाक घर है
04:57घर के नेम प्लेट पर लिखा है
05:03घर के अंदर एक गाड़ी भी खड़ी है
05:05घर गाड़ी देख कर कहा जा सकता है
05:08कि इनकी माली हालत भी ठीक ठाक होगी
05:11इस घर में कुल तीन लोग रहा करते थे
05:14बड़ा भाई, परने राज्यवर्धन, छोटा भाई, प्रबुध राज्यवर्धन
05:19और सबसे छोटी बहन लिपिका
05:21इनके पिता साइंटिस्ट है
05:23पर माबाब दोनों की मौत हो चुकी है
05:26मा की मौत पहले हुई
05:28फिर 2003 में पिता भी चल बसे
05:31मरने से पहले पिता ने लिपिका की शादी कर दी थी
05:35पर शादी चली नहीं
05:37और लिपिका का तलाक हो गया
05:39अब वो वापस इसी घर में आकर रहने रहे है
05:42घर में तीन लोग थे
05:44पर तीनों, बाकि रिष्टेदारों, बडोसीों
05:47यहां तक की दोस्तों से भी बहुत दूर थे
05:50इदर कुछ वक्त से लिपिका बीमार थी
05:53पर दोनों भाई उसे डॉक्टर के पास नहीं ले गए
05:56घर पर ही बीमारी के चलते आठ अपरेल को लिपिका ने तम तोड़ दिया
06:01बड़े भाई ने छोटे भाई को फोन किया
06:04छोटा भाई ज्यादा तर घर के बाहर रहता है
06:07वो आया, बेहन को देखा
06:09और वापस चला गया
06:10मानो जैसे घर के अंदर कुछ हुआ ही ना हो
06:13अगले पांच दिनों तक घर में लिपिका की लाश पड़ी रही
06:17सड़ती रही
06:18भाई आया नहीं, पडोसियों को खबर नहीं
06:21लहाजा पांच दिन बाद इसी बड़े भाई ने
06:24घर के अंदर बाथरूम में लिपिका की लाश रखी
06:28और उस पर कंबल रजाई डाल कर लाश का अंतिम संसकार कर दिया
06:36इस घर के अकेले पन और दर्थ को सचमुच महसूस करना है
06:40तो खुद लिपिका के बड़े भाई से
06:42बात्रूम में बहन के अंतिम संस्कार की पूरी कहान सुननी चाहिए
06:48बहन को साथ तारीकों नौ साड़े नौ बजी उसको बात्रूम
06:53तीन-चार बात्रूम की उल्टी थोड़ा जीब टाइब का हुआ
06:56और उसके बाद खतम होगी
07:00हम कपड़ा लगता हुए बदले लेकिन तीन-चार बात्रूम हुआ उल्टी थोड़ा जीब टाइब का हुआ उस टैम हैसा आलत
07:06नहीं था कि हम कुछ कर पाते हैं उसका हाथ पावर अगड़ सकते थे
07:10एक कमबललों लुड़ाय लेकिन बूद अंजय बिखाए लेकिन उचक के तीन-चार बाद मेरा नाम ही लेया कुछ बताइब नहीं
07:16और उसको बदाने उसको थोड़ा हम इसको किक्भड घरया रह्यो wa उसको तीन-चार दिनलिए यही पने पहले सिए नहीं
07:32पहले तो हम इसी क
07:43तो इसको साधारन वेवस्ता में ही कीडा मकॉडा हाटाने के लिए जलाया आप ही जला हुआ फिर इसके लखी वगर
07:54अगर में तीन चार दिन से था उसकी तो वही रजाई कंबल सब रख रहे हैं तो आपको तो पता
08:04होना चेपने कि स्काम्तिन सुट्रा बाहर किया जाता है तो
08:08भाई को हम बोले कि चलो साथ जाना होगा इसको बड़ा भाई बता रहा है कि कैसे उस वक्त जोटे
08:29भाई की नीड यानि जरूरत थी पर वो जरूरत के वक्त भाया नहीं अब अकेला क्या करता हुआ
08:36इसलिए बातरूं को ही शमशान बना कर रजाई कंबल की चिता सजा दी है
08:44यह लिपेका का दूसरा भाई है नाम है प्रबुध राजवर्धन प्रबुध मानता है कि भाई ने उसे बहन की मौत
08:52की खबर दी थी
08:53वो अंतिम संसकार का सामान लेकर भी आया मगर जैसे ही भाई ने बताया के वो बहन का अंतिम संसकार
09:01कर चुका है
09:01वो अंतिम संसकार का सामान घर में सोफे पर रखकर वापस चला गया
09:06मानो कुछ हुआ ही नहीं
09:08बड़े के बाद अब छोटे भाई की भी पूरी बात सुनीजे
09:15मेरे सिस्टर का डेड बोड़ी जो हाफ बंट मिला है
09:18मेरे घर से
09:19हाफ बंट मिला है बातरूम में
09:22और उस समय में मेरे घर में जो मौजुद लोग थे
09:25मेरे बड़ा भाई परणव राजोजन था और मेरी बेहन लिपीका कुमारी थी
09:29मेरी बेहन जो लिपीका कुमारी थी काफिट दिन से बेड रिटन थी
09:34और जिस टाइम पर घटना घटी है उस टाइम में यहां पर आवेलेवल नहीं था
09:38कि यह इंफॉरमेशन भी नहीं दी एक ऐसा कुछ किया जा रहा है जब मैं रिटन किया तो मुझे यह
09:43बताए कि
09:44आल्रीड कर गई है तो मैं आंतिन संश्कार का समान लेने गया था आंतिन संस्कार कर दिया गया है दो
09:53लोग का नाम भी इसमें लिया गया लेकिन उनका
10:02और आभी मुझे साम को एक आदमी ना के बता है कि आपके घर में पिस्यार रही हुए वह ऐसा
10:06ऐसा बात है तो मैं खुद चल की यहां पर आगया तो यह नहीं पूछा कि आप नहीं कहां पर
10:12इसने बोला कि मैंने को महल बनी मैंने कर दिया
10:20अजब आप यहां तो देखे भी घर में बोडी परा हुए नहीं मैंने देखा सब मैंने सोफा पर समान रखा
10:24जब इसने बोला कि अल्रेडी हो गया तो मैं घर से बार निकल गया तो
10:27अफसोस की बात यह के लिपिका का घर एक भरी बस्ती के बीचो बीच है पर किसी को उसकी गुमना
10:34मौत और खामोश अंतिम संसकार की खामोशी से उठती चिता की लोग या धुएं की धुंद दिखाई ही नहीं थी
10:43हाँ जब जलने की कुछ बू आई तब परोसियों ने अपना फर्ज जरूर निभाया पुलिस को खबर दे कर
10:51पुलिस भी घर पहुँच कर हैरान थी घर के बाहर ही दोनों भाई को खड़ा कर वहीं पूच दाज की
10:58गई
10:58बड़ा भाई खामोर सुन रहा था और चोटा भाई बोल रहा था
11:05इसमें खॉल्ट है यह भी कुछ ने करता है और सिश्टर के भी टेकर ने रहन रहा है
11:10मैं नहीं था तब यह सब काम है तो सिश्टर में कब से तरह प्रावा था
11:30भाई ने कोशिश तो पूरी की पर बहन की चिता ठीक से सजा नहीं पाया
11:36इसलिए लाश भी आधी अधूरी ही जली इस खबर के बाहर आने के बाद
11:41और पोस्ट मोटम हो जाने के बाद लिपिका के हिस्से सच मुच अब वो चिता आएगी
11:47जिसकी वो हगदार है जो हर मरने वाले का हग है
11:55धनबाज से बहुत दूर और देश की राजस्थानी के बेहत गरीब ये मेरट शहर है
12:00और इसी मेरट शहर का ये एक घर
12:04घर बस्दी के बीच में है तो बस्दी में और भी बहुत सारे घर है
12:08घरों में लोग भी है
12:10यहां तक के इसी घर के गरीब इस घर में रहने वालों के कुछ गरीबी रिष्टेदार भी इसी बस्दी में
12:17रहते है
12:18मगर पूरे पांच महीने तक इस घर का दर्वाजा बंद रहता है
12:22शुरू में कुछ बद्बू भी आती है
12:25पर तनहाई के अलावा इस घर पर कोई दस्तक देने नहीं आता
12:30कोई आता भी कैसे
12:32खुद पडोसी कह रहे हैं
12:34कि घर में रहने वालों को वो देखते तो थे पर जानते नहीं है
12:38पडोसी छोड़िये जब सगे चाचा का बेटा ही ये कह
12:42कि हमारी बात चीथ ही नहीं होती तो फिर दूसरों से क्या उमीद
12:48परिवार के बारे में बहुत जादा जानकारी तो नहीं है
13:02तो हमें लगा कि कई बार गए हैं में तो बालचीथ थी नहीं
13:05तो आज पता चला कि ये चाए की दुकान बेगंबा के में वहाँ लेडिस के बाद बैटे हैं
13:11वो अकेला पन ही था कि प्रियंका पूरे पांच महीने तक अपने ही घर में
13:16पहले लाश और फिर कंकाल बनकर पड़ी रही पर कभी किसी ने इस दोरान उसे याद तक नहीं किया
13:23हाँ पांच महीने बाद जब वही प्रियंका कंकाल की शकल में मुर्दा घर पहुँची
13:29तो खुद डॉक्टर उसकी हालत देख कर हैरान थे
13:32उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि लाश के सैंपल कहां से ले जो हमारे पास पुलिस दुआरा बोड़ी लाई
13:41गए उसमें किवल कंकाल रूप में हड़ी आही बचीवी थी बाकि कोई मास या स्कीन वगएरा कोई
13:47आइडेंटिफिकेशन और उस तरह के कोई टीशू थे नहीं तो उसका कोस्माटम किया जा चुका है उसमें क्योंकि कोई सैंपल
13:55लेने लाएक होई चीज उसमें थी नहीं लेकिन अंटी का सैंपल हमने विदिक प्रयोक साला में भेजा है ताकि यह
14:02पता लग सके कि उसमें को
14:16प्रदेश शिक्षा विभाग में नौकरी क्या करते थे 2013 में इनकी पत्नी की मौत हो गए कुछ लोग पताते हैं
14:24कि पत्नी ने फंदा लगा कर खुदकुशी कर ली थी वो डिप्रेशन और अकेलेपन का शिकार थी पत्नी की मौत
14:31के बाद अबुदैभान अपनी बेटी ब्र
15:13प्रेंका को आखरी बार देखा गया था
15:16इसके बाद इस घर पर ताला लग गया अब प्रेंका के साथ साथ प्रेंका के पिता उदैभान भी गायब हो
15:22चुके थी दोनों की गुमशुदकी को पांचवा महीना शुरू हो चुका था पर उनका कोई अतापता नहीं था पड़ोसी छोड़ी
15:30है रिष्टेदारों को भी क
15:44सब्सक्राइब है तो हम बहुत दिनों थी दून रहें बाही लोग सब कहा है तो एक भाई ने बताया कि
15:49सदर की चाय की दुकान हो आपे बेगम भाग में वहां बैठे देखा उन्हें राइडे को शाम को मुझे फोन
15:55करा भाई ने मैं तुरंद गया भाई वहां थे उन्हों
15:58ठुचा कि ये लड़की का है में तौमार मकसद है लड़की का है कियरे ब क्याने में बहां को आपने
16:10पीपरियंका के बारे में सच नहीं बोल रहे हैं शुरू में यही कहानी सुनाते
16:14कि वो बीमार है और देहरा दून के एक अस्पताल में भरती है लेकिन जब दूसरे भतीजे भी पहुंचे और
16:22उदैभान को अपने साथ उनके इसी घर पर लेकर आए तब पहली बार उदैभान ने वो कहा जिसे सुनकर सभी
16:29संद्ध रहे गए उदैभान का कहना था कि उनकी ब
16:44अगा तो यहां घर लिया है यहां बैटके बहुत सारे भाई आ गए मेरे चाचा ताव के सबने पूछा बहुत
16:51फिर वह कहने लगे बहुत दबाव डालने के बाद कि अंदर एंदर चार महीने तो हमें भी यहां रहते होगे
16:57अंदर हमें दाना तो बद्बू ना कुछ अंद
17:13पिसाई और इंसी गाई ताला तोड़ा पिर देगा सच मुची अंदर बोड़ी पड़ी है मतलब कंकाल की रूप में जो
17:19भी है चार महीने से घर के अंदर ही प्रेंका की लाश पड़ी होने की बात जैसे ही सब को
17:26पता चली उन्होंने फॉरन पुलिस को फोन किया अब पुल
17:42काल पड़ा था पूरे घर में एक अजीब सी बदबूती
18:12कारण वह निड़े नहीं ले पाया कि उसकार किस प्रकार से करें और वह चार-पांच दिन उसके साथ रहकर
18:18और हरिद्वार चला गया था
18:20जस घर के अंदर प्रियंका लाश बनकर पांच महीने से बन थी उस घर के बाहर से हर वक्त पडूसी
18:27गुजरते बच्चे खेलते पर किसी ने ये जानने की कोशिश नहीं की कि घर में रहने वाले दो लोग इतने
18:34महीनों से क्यों नजर नहीं आ रहे हैं
18:37मैं तो एकदम पैरो तोले जमीन निकल गया हम यहीं से हमारे बच्चे भी यहीं खेलते हैं दिन रात सुबह
18:43शाम यहीं से आरे जा रहे हैं मौले वाले भी आते हैं किसी को कुछ पता ही नहीं चला एकदम
18:47शौक वेरी शौक
18:49यहीं वो मकान है मेरट के सदर छेतर का जहां पर एक यूवतिका शौव मिलता है और वो शौव इस
18:57हालत में मिलता है कि वो पूरी तरीके से कंकाल में तब्दिल हो दुका था
19:00इस पूरी घटना का हम आपको बताते हैं कि यहां एक पिता उदैबान अपनी फुत्री प्रियंका के साथ रहते थे
19:08और बताया जा रहा है कि वो प्रियंका काफी बिमार रहती थी और उसके पिता उसको डॉक्टरों के बाद तंत्रमंत्र
19:17और जालफूक के लिए ले ले जा
19:30को उसके पिता यहां ताला लगा कर यहां से लापता हो जाते हैं
19:35मेरट से मुहम्मद उस्पान चौधरी के साथ सिथुन मोदक धनबाद आज तर अपनी ही बेटी की लाश घर में बंद
19:45कर एक पिता अगले पांच महीनों के लिए गाइब क्यों हो गया था
19:49क्यों पिता ने प्रियंका की मौत की खबर रिष्टेदारों को नहीं दी क्यों एक पिता ने अपनी बेटी का अंतिम
19:56संसकार नहीं किया
19:58और सबसे बड़ा सवाल यह कि क्या प्रियंका की मौत वाकरी बीमारी से हुई थी या फिर उसका कतल हुआ
20:04था
20:05अब इनी सवालों के जवाब जुटाने में पुलिस जुट चुकी थे
20:13कांकाल मिलने के बाद पुलिस को ये पता करना था
20:16कि प्रियंका की मौत कैसे हुए
20:18कहीं उसका कटल तो नहीं किया गया
20:20और उससे भी बड़ा सवाल ये
20:22कि प्रियंका या उसकी लाश को छोड़ कर उसके पिता उदैभान घर पर ताला लगा कर इतने महीने कहां गायव
20:30रहे
20:30तो जब पुलिस ने उदैभान से पूछ ताच की तो एक अजीब कहानी सामने आए
20:35उदेभान के मताबिक उसकी बेटी प्रियंका की तबियत खराब थी
20:39वो बहुत ज्यादा बीमार थी
20:41और इसी बीमारी की वज़ा से 5 दिसंबर 2025 को उसकी मौत हो गई
20:46प्रियंका के बीमार होने के बावजूद उसके पिता उसे डॉक्टर के पास या अस्पताल नहीं ले दे
20:52यहां तक के प्रियंका की मौत की खबर भे किसी को नहीं दी
20:56और तो और प्रियंका की मौत के बाद अगले पांच दिनों तक अपनी बेटी की लाश के साथ उसी घर
21:03में खुद को बंद रखा
21:04इस दौरान लाश से बदबुहानी शुरू हो चुकी थी
21:07उदैभान ने तब घर में परफ्यूम छड़कना शुरू कर दिया
21:12लड़की के पिता ने प्रारंपिक मुस्टाच में बताया है कि चार-पास दिन वो साथ में लड़की के साथ में
21:18रहा था तो वहां वो इस पर वगएरा कर देता था जिससे कि बाहर इस मिलना चाहिए
21:23बेटी एकस्पायर हुई तो वो काफी दिन तक उसके शाओ के साथ में रहा है उन्हों नहीं बताया है कि
21:33काफी सालों से जो मकान है उसमें सफाई भी नहीं थी काफी गंदगी वरी भी थी अंदर पूरा करकट रद्धी
21:39भरावा था हाँ जी यह तो देखा था था बहुत र
21:51प्रार में रहते हैं बोलें मैं तो इस परफ्यूम चिड़क के गया था हाला कि पोस्टमॉटम कंकाल का हुआ लेकिन
21:59फिर भी रिपोर्ट से यह पता चला कि कंकाल पर चोट के कोई निशान नहीं थी यानि शुरवाती पोस्टमॉटम रिपोर्ट
22:06के मताबिक मामला कतल कर न
22:20प्रांक इस पर किसी प्रकार के चोट के निसान नहीं मिले है नहीं कोई फ्रेक्शर के निसान वगएरा है और
22:25बाके अने बिंदो उपर लड़की के मॉबाईल और अने प्रक्रोनों को हम लोग देखकर सीडिया देखकर जांच करने के प्यास
22:32कर रहे हैं कि वास्तों में घ�
22:48जादा तेज हो गई, तब उसे कुछ समझ नहीं आया, उसने अब तक अपने रिष्टेदारों को भी प्रियंका की मौत
22:54की खबर नहीं दी थी, इसके बाद बिना अंतिम संसकार की घर पर ठाला लगाकर, उदैभान मेरट से हली दौार
23:01चले गए, इसके बाद अगले चार-पा
23:04आच महीने तक, वो इधर उदर भठकते रहे, फिर जब वापस मेरट आए, तब कहीं जाकर, भातीजे की नजर उदैभान
23:12तर पड़ी, रिष्टेदारों और प्रोसियों के मताबिक उदैभान और उसकी बेटी, दोनों अकेले पन और डिप्रेशन में जी रहे थे,
23:19उदै�
23:55प्रियंका की मौत पांच महीने पहले हुए, अब कहीं पांच महीने बाद जाकर, उसे उसकी जिता
24:04अगर वो उसी तेम गुजर गई थी, उनको बता देना चीजे था, वो जो भी होता हम लोग देखते हैं,
24:10जैसे भी है हमने अपने बच्ची का, अपने पुलिस वालों से भी कहा कि बच्ची का हम अच्छी तरह करिए
24:17करम करना हैं, तो उन्होंने भी हमारी सायता करी, अच्�
24:32उनों की ही मौत की खबर मौत के कई दिन या महीने बाद बाहर आई
24:36और सबसे एहम बात ये कि दोनों ही परिवार समाच से दूर
24:41तनहाई और अकेले पन का शिकार था
24:43वो अकेला पन जो नजाने कितने ही इनसानों को खाये जा रहा है
24:48इसलिए जरूरी है कि हम सब अपने अपने पडोसियों से बाते करें
24:53उनका हाल चाल पूछें और उन्हें ये अहसास दिलाएं कि वो अकेले नहीं है
24:59मेरट से मुहम्मद उस्मान चौधरी के साथ सिथन मोतक धनबाद आज तक
25:12तो वारदात में फिलाल इत रहीं मगर देश और दुनिया की बागी खबरों के लिए आप देखते रही आज तक
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