00:03फसलों की कटाई का मौसम पूरा होने की खुशी में मनाय जाने वाला पर्व बैसाखी जोतिश रेत्री और धार्मिक मानिताओं
00:12से जुड़ा हुआ है।
00:30कब मनाय जाएगी, इसका महत्व क्या है और मेश संक्रांती से इसका संबंद क्या है।
00:35बैसाखी और मेश संक्रांती इस साल 14 एप्रिल 2026 दिन मंगलवार को पड़ रहा है।
00:41सूर्य गोचर मेश राशी में 14 एप्रिल की सुबह 9 बचकर 31 मिनट पर करेंगे।
00:47वहीं पुन निकालती थी सुबह 5 बचकर 56 मिनट से लेकर शाम 3 बचकर 55 मिनट तक रहेगा।
00:54बैसाखी का दन सिख समुदाय के लोगों के लिए काफी महतोपून है।
00:58इसके पिहास की बात करीं तो इस दिन साल 1699 में गुरु गोबिंद सिंग जी ने खालसा 25 की स्थापना
01:05की थी।
01:05उन्होंने एक ऐसा समुदाय बनाय था जो समानता, साहज और भक्ती के मूल्यों पर चले।
01:11इसी दिन पंज प्यारे की शुरुवात भी हुई थी जिनसे सिक समाज में आध्यात्मिक अनुसाशन और एक्टा को मजबूत किया
01:19जाए।
01:19वहीं बैसाकी का पर्व जहां पंजाब और हर्याना राज्य के प्रमुक पर्व के तौर पर जाना जाता है।
01:25वहीं इस दिन सूर्य के मेश राशी में प्रवेश करने पर मेश संक्रांती भी मनाई जाती है।
01:31सूर्य एक राशी में 30 दिन तक रहते हैं इस तरह वो हर महिने राशी परिवर्तन करते हुए सभी 12
01:37राशियों में गोचर करते हैं
01:39मेश राशी के दिन वो मीन राशी से निकल कर मेश राशी में प्रवेश करते हैं और इस दिन नया
01:45सौरे वर्ष आरंब होता है
01:47इस दन से बंगाल, असम और ओरिसा में ने साल के शुरु� food भी होती है
01:52धारमियत मानिता अनुसार मीन राशी में सूर्य के गोचर के दौरान खरमास रहता है
01:57मेशे संक्रांती पर खरमास खत्म होता है
02:00खरमास में मांगलिक कारियों पर रोक रहती है
02:03मेश संक्रांती के बाद से मांगलिक कारे और शुबकारियों की शुरुआत दोबारा हो जाती है
02:08फिलहाल इस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक और शेयर करें
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