00:10अजमेर में मुड़ों यानि मूढ़ा का कारोबार 18-वी सदी से चल रहा है अंग्रेजों के जमाने से लेकर अभी
00:17तक आराम से बैठने के लिए मुड़ों को काफी पसंद किया जाता है
00:21एक समय था जब अजमेर में बने मुड़े देश के कई राज्यों में जाते थे विदेशों में भी इसकी काफी
00:28डिमांड होने लगी थी
00:30साल 2010 तक मुड़ों का कारोबार रफतार से दौड रहा था लेकिन प्लास्टिक की कुर्सियों और टेबल के बाजार में
00:37आने के बाद मुड़ों के कारोबार की रफतार आधी रह गई
00:41अजमेर में आज भी करीब डेड़ हजार से अधिक जातव समाज के लोग मुड़ों को बनाने और वेचने का काम
00:48कर रहे हैं
00:49ये हैं बेनी प्रसाद जातव जो 80 साल के हैं लेकिन फिर भी इनके हाथों के हुनर में कोई कमी
00:56नहीं आई है
00:57सुनिए
01:00ये जिए साब 500 घर्जेभस्ती है और वह सारा काम करते हैं यहीं काम करते हैं और यह कब से
01:09कम अठार में सही से चला आहा था
01:12काहां से आई था आपकी फुजर्बोगा है? वो हमारे बुजर्बग गाय था भरसपूर से
01:16?
01:16?
01:18?
01:18?
01:18?
01:19?
01:19?
01:20?
01:21My father was the man who had his work, so he had his own money.
01:32He didn't do his work.
01:35He didn't do his work.
01:36He did his work.
01:40this is what it is that the plastic has increased and there is also the benefit of the product.
01:54We love it but we don't have to take the route of the product.
02:08foreign
02:13foreign
02:18The plastic material has come out of the place, but the material is coming out of the place.
02:28The plastic road has been made, the plastic road has been made, the wood, the ragging, the tire has been
02:39taken.
02:39All these things are taken from the place when it is a mudder.
03:10Thank you very much.
03:12Thank you very much.
Comments