00:00BHAARTY JANTA PARTY KAYE DIVANGAT NETA POORU RRAJPAL
00:03LAL GY TENDEN KAYE LIKHI HUI PUSTAK
00:07ISMRATI NAADKA VIMOCHAN
00:09KAL MUKHMENTRI YOGY AADITNAD
00:11OR RAKSHAMENTRI RRAJNAS SINGH KERENGAYE
00:13UNKI PCHLI PUSTAK ANKAHA LAKHNOU NAYE KAYS SOWALO KO JARM DIA THA
00:18KHASTA OR POR LAKSHMAN TILA JAHAN TILA WALI MESDIT HAYE
00:23USKO UNHONNE LAKSHMAN TILA BATAYA THA
00:26की वहाँ पर एक शेश गूफा हुआ करती थी
00:28जहां लोग पूजा अर्चना किया करते थे
00:31उस उल्लेक पर बड़े विवाद हुए थे
00:34इसमर्ती नाद भी एक खास किताब है
00:36जिसमें लाल जी टंडन अपने बिबिन्द नेताओं के साथ
00:40रिष्टो का उलेक करेंगे
00:42अटल बिहारी बाचपई, माया वती, मुलायम सेंग
00:45और यहां तक की पधान मतीन नरेन मोदी के साथ
00:48लंबे समय तक लाल जी टंडन के सयोगी रहे
00:52और वर्तमान में भारती जनता पाटी के परदेश
00:54प्रवक्ता संजे चौधरी हमारे साथ है
00:56और संजे जी हमको बताएंगे
00:58कि इस पुस्तक के बारे में इसमें क्या खास है
01:01और पिछली अनकाहा लखनओ कैसे गड़ी गई
01:06और ये पुस्तक कैसे गड़ी गई
01:08लेखे टंडन जी एक राजनेतिक बेक्तितु तो थे ही
01:11लेकिन उसके साथ साथ उनका जो रूची थी
01:14वो पढ़ने में बहुत जादा थी
01:17पुस्तकों से उनके बहुत लगाव था
01:20पुस्तके उन पर भी लिखी गई और उन्होंने भी पुस्तके लिखी
01:22लखनों में जनसंग के समय पुर्शोत्तम दास टंडन इसमारक पुस्तकाले उन्होंने शुरू किया
01:29जिसकी पुस्तकों को ले जाकर पंडित दिन दियाल उपाद है जी यहां से जब जा रहे थे
01:37तो वो वहीं से कुछ जो नई पुस्तके आएं थी उनको पढ़ने के लिए ले गए थे
01:41और बाद में जब उनके साथ दुरगटना होती है मुगल सराय में
01:45तो उनके पास जो सामान मिलता है सामेगरी जो जिससे शिनाक्त हो पाती है
01:51तो उसमें वो पुस्तके भी शामिल थी जो यहां लखनों से ले गए थे
01:54तो सुरू से टंडन जी पुस्तकों के पुरती बहुत आगरही रहते थे पढ़ते भी थे
02:11और लोगों को पढ़ने के लिए देते भी थे
02:21पाई के लिए भी वो कभी जुटे थे तो हर दिन जन दिन को एक अलग तरीके से मनाना
02:26इस बार अगर वो जीवित होते तो उनका एक क्यावनवेवाज जन दिवस होता
02:30जब वो मद्दपरदेश के राज़ पाल रहे तभी उन्होंने अपने जीवन में आए
02:36बड़े व्यक्तित्तों के स्मरण को जो उनके याद में सजो गया
02:40उन पर पुस्तक लिखी है और कलिसका भी मुचन है
02:43अनका लखनव में जो लश्मन टीना वाला उलेक था उसको लेकर काफी बाते हुँदी
02:49क्या था मामला
02:50देखें टंडन जी का लखनव से बड़ा गहरा जुड़ा रहा
02:55और लखनव के इतिहास को भी उन्होंने बड़े नजदीक से देखा
03:01तो लखनव का जैसा जिक्र है काफी पुस्तकों में अतिहासिक साक्ष भी है
03:06लखनव के गजेटियर में भी है
03:08this one, he had this one with a lack of evidence
03:10after the relationship of these people
03:14instead of giving it out
03:16this one, he got this one
03:18and now he had this balance
03:20and he had this other
03:22These people did not think the
03:23of this statement
03:24and the thoughts of these people
03:27can we have a
03:29what we have to do
03:31is that those people who are
03:32objective of these people
03:33which is
03:34which are
03:36Thank you very much.
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