00:00यह भारत का वो कुंड है जहां भगवान परशुराम ने अपनी मा की हत्या करने के बाद अपने हाथ से
00:05चिपकी हुई कुलहाडी से मुक्ति पाई थी
00:07यह कहानी है महान रशी जमदग ने और उनकी पत्नी पतिवरता रेणुका की
00:12कहते हैं रेणुका हर दिन नदी से कच्चे घरे में पानी लाती थी और उनके सतीत्व के बल से वह
00:18घड़ा तूटता नहीं था
00:19उनके पाँच पुत्र थे जिनमें सबसे छोटे थे विश्णु अवतार परशुराम
00:24एक दिन रेणुका ने नदी में कुछ गंधरवों स्वर्ग के संगीतकार को जलकरीडा करते देखा
00:29उन्हें देखकर एक पल के लिए उनका मन मोह में पड़ गया और उसी क्षण उनके सतीत्व का बल तूटा
00:35और कच्चा घरा तूट गया
00:37जब वो आश्रम लोटी तो राशे जमदगने ने अपने योग बल से जान लिया कि उनका मन भटक गया था
00:43वो इतने क्रोधित हुए कि उन्होंने अपने पुत्रों को आज्या दी अपनी मा का वध कर दो
00:48जब चारों बरे भाईयों ने मना कर दिया तो क्रोधित पिता ने उन्हें तुरंत पत्थर बन जाने का श्राप दे
00:54दिया
00:55इसके बाद परशुराम ने पिता की आज्या को अपना धर्म समझा
00:58उन्होंने भारी मन से अपनी कुलहारी उठाई और अपनी ही मा का सिर्धर से अलग कर दिया
01:03उनकी आज्या कारिता से ब्रसन्न होकर जमदग्ने ने वरदान मांगने को कहा
01:08परशुराम ने तुरंत अपनी मा को फिर से जीवित करने और साथ ही पत्थर बन चुके अपने चारों भाईयों को
01:14भी मुक्त करने का वर मांग लिया
01:16सब फिर से जीवित हो गए
01:17मानो कुछ हुआ ही न हो लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई
01:21मात्र हत्या का पाप उस कुलहारी पर एक दाग की तरह चिपक गया
01:25और वो उनके हाथ से अलग ही नहीं हो रही थी
01:27उस पाप से मुक्ति पाने के लिए वह दरदर भटकते रहे
01:30लेकिन कोई भी तीर्थ उस कुलहारी को छुड़ा नहीं सका
01:33अंत में वह पहुँचे पूरवी हिमालय की लोहित नदी के किनारे
01:37और जैसे ही उन्होंने इस कुंड के जल को छुआ चमतकार हुआ
01:40कुलहारी अपने आप उनके हाथ से छूट गई
01:42यही पवित्र स्थान आज अरुनाचल प्रदेश में परशुराम कुंड के नाम से जाना जाता है
01:47आज भी हर साल मकर संकरांती पर हजारो श्रद्धालू यहां इस विश्वास के साथ डुबकी लगाने आते हैं
01:53कि यह कुंड उनके सारे पापों को धो डालता है
01:56ठीक वैसे ही जैसे इसने स्वयम भगवान परशुराम को पाप मुक्त किया था
02:01भगवान परशुराम को दिल से मानने वाले सभी भक्त कमेंट्स में जै परशुराम जरूर लिखें
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