भारत ने न्यूक्लियर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए तमिलनाडु के कलपक्कम में प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (PFBR) में पहली बार क्रिटिकलिटी प्राप्त की है. इसका मतलब है कि रिएक्टर अब सेल्फ-सस्टेनिंग न्यूक्लियर चेन रिएक्शन को बनाए रखने में सक्षम है. यह रिएक्टर जितना ईंधन इस्तेमाल करता है, उससे अधिक उत्पन्न कर सकता है, जिससे न्यूक्लियर फ्यूल की सस्टेनेबिलिटी बढ़ती है. भारत के पास यूरेनियम सीमित मात्रा में है, लेकिन थोरियम का विशाल भंडार है, जिसे यह तकनीक उपयोग में लाने का रास्ता खोलती है. यह भारत के तीन-चरणीय न्यूक्लियर प्रोग्राम का अहम हिस्सा है, जिसकी कल्पना डॉ. होमी भाभा ने की थी. अब तक केवल रूस इस तकनीक में सफल रहा है. यह उपलब्धि भारत को ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगी और 2047 तक 100 गीगावॉट न्यूक्लियर पावर के लक्ष्य को हासिल करने में मदद करेगी.
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