00:09जब किस्मत इंसान को तोड़ना चाहती है तब कुछ लोग उस तूटन को ही अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लेते
00:16हैं
00:16यह कहानी करनाटक के बेलगावी की रहने वाली पच्चार साल की मिनाक्षी सदानन्द मिश्र कोटी की है जिन्होंने समाज की
00:24तानू और भारी तंगहाली के बीच एक ऐसा सामराज खड़ा कर दिया जो आज कडूडों में खेल रहा है
01:00साल 2003 में शादी के महस एक साल बाद ही मिनाक्षी के सिर से पती का साया उठ गया था
01:06समाद चाहता था कि वह एक विध्वा की तरह अपनी जिंदगी को चार दिवारी में समेट ले
01:12लेकिन मिनाक्षी ने हार मानने के बजाए लड़ने का फैसला किया
01:16विना किसी पूंजी के उन्होंने ग्राहकों से एडवांस पैसे लेकर घर का बना खाना बेचना शुरू किया
01:22एक वक्त भह भी था जब मिनाक्षी सिर्पर टोकरी रखकर गलियों में रोटियां और स्नैक्स बेचा करती थी
01:29आज वही छोटी सी कोशिश डेड़ कडो रुपे सालाना टर्न ओवर वाली मिनाक्षी फूर्स बन चुकी है
02:04बेलगावी शहर में उनके दो आउटलेट्स हैं
02:05जिन्हों ने अपनी पति को खो दिया था
02:08मिनाक्षी कहती हैं कि वह एक विध्वा का दर्द समझती हैं
02:12इसलिए रोजगार देने में पहली प्रार्थ मिक्ता उन्हें ही देती हैं
02:16बड़े ओर्डर्स के समय वह चालिस से ज़्यादा लोगों को रोजगार देती हैं
02:21Sarkar nne bhi unke isi jazbe ko salam karte huwe unhe kittu rani chenamma puraskar se nawaaza hai
02:28Minakshi ki yah kahani sabit kerti hai ki hosle ke pank ho to aasman chunna mushkil nahi
02:35Bureau Report, ETV Bharat
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