00:00तब इरान पर अमेरिका इसराइल के पारूदी हमलों का कहर बरस रहा है
00:13इरान भी जवाबी मोर्चे पर डटा है और इसराइल के साथ खाड़ी देशों को टारगेट कर रहा है
00:18ऐसे विधुन्स खालात के बीच जब इरान की जमीन पर अमेरिकी विमान गिरने की खबर आई तो युद्ध का पूरा
00:24रुख ही बदलता दिखा
00:25माना जाने लगा कि अब इरान के हाथों में ऐसा हथियार लग सकता है जिसका इस्तिमाल वो युद्ध में और
00:31भी खतरनाक तरीके से करेगा
00:33लेकिन अमेरिका ने महज 36 घंटों के ओपरेशन में इरान के दुरगम इलाके के बीच से अपने पाइलट को सुरक्षित
00:39निकाल लिया
00:40IRGC अमेरिकी पाइलट को तलाशती रही लेकिन उसके हाथ कुछ नहीं लगा
00:44अमेरिकी सेना ने जिस तरह से इस पूरे ऑपरेशन को अंजाम दिया है वो हैरान करने वाला है
00:48बेहद सटीक रणनीती, तेज ऑपरेशन और तकनीक के जबरदस्त इस्तिमाल से
00:53अमेरिका ने वो कर दिखाया जो करीब करीब असंभव माना जा रहा था
00:57करीब 36 घंटे में अमेरिकी सेना ने खास अभियान चला कर अपने पाइलट को बचा लिया
01:02इस ओमपरेशन में CSEL नाम की एक खास डिवाईज ने अपना अहम रोल निभाया
01:07दरसल गुरुवार रात को इरान में अमेरिकी विमान गिरा
01:10पाइलट और वेपन्स ओफिसर एजेक्ट हुए
01:12पाइलट को तो कुछी घंटे में रेस्क्यू कर लिया गया
01:14लेकिन वेपन्स ओफिसर मलबे से करीब 10 किलोमीटर दूर चलकर पहाड़ी पर पहुँचे
01:19और वहां से मैसेज भेजा
01:22ये मैसेज उसी CSEL डिवाइस से भेजा गया
01:25जो इस अभियान के दौरान सबसे अहम बन गया
01:28CSEL एक खास डिवाइस है जो एक किलोग्राम से भी कम वजन का होता है
01:32दरसल CSEL डिवाइस सैटिलाइट से जुड़ा होता है और उसी के जरिये संदेश भेजता है
01:36पूरे rescue operation के दौरान ये डिवाइस अहम खड़ी बना
01:40अमेरिकी पाइलट और rescue टीम को CSEL डिवाइस से मदद मिली
01:44बताया जा रहा है कि एरान में विमान गिरने के बाद
01:46अमेरिकी पाइलट ने इसी डिवाइस की मदद से अमेरिकी सेना से संपर्क साधने की कोशिश की और इसी के जरीय
01:52अपने संदेश भेजे दरसल CSIL डिवाइस सैटलाइट से जुड़ा होता है और उसी के जरीय संदेश भेजता है
01:58मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इरान में फंसे पाइलट ने छोटे छोटे एंक्रिप्टेट संदेश इसी डिवाइस के जरिये भेजे
02:05जिसमें उसकी सटीक लोकेशन की जानकारी अमिर्की सेना को मिलती रही और लोकेशन ट्रेस होने के बाद इस खतरनाक रेस्क्यू
02:12ऑपरेशन की रन नीती बनाई गई
02:13जानकारी के मुताबिक इस डिवाइस के सिगनल काफी तेजी के साथ फ्रिक्वेसी बदलते हैं
02:18यही वज़ा है कि इरानी सेना के लिए इसको ट्रेक कर पाना आसान नहीं रहा
02:22इस डिवाइस से बातचीत करने का तरीका भी काफी अलग रहा
02:26जिसमें किसी तरह की लंबी बातचीत नहीं की गई केवल छोटे सिगनल ही भेजे गए
02:30डिवाइस से भेजे गए मैसेज सीधे सैटेलाइट के जरिये अमेर्की कमांड सेंटर तक पहुँचे
02:35डिवाइस में पहले सुरक्षित जगों की जानकारी लोड की जाती है जो नेविगेटर को छिपने में मदद करती है
02:41जब कोई पाइलट दुश्मन के इलाके में किसी इमर्जेंसी हालात में इजेक्ट होता है तो वो छिप कर रहता है
02:47पुराने रेडियो में लंबी बात चीत करने से दुश्मन के रडार उसको ट्रैक कर सकते थे लेकिन CSIL में शॉर्ट
02:53बर्स्ट होने के कारण इसको ट्रैक कर पाना मुश्किल है
02:56सबसे खास बात है कि इस डिवाइस की बैटरी 21 दिनों तक चल सकती है
03:00पूरे रेस्क्यू उमपरेशन के दौरान ये डिवाइस अहम कड़ी बना
03:04अमेरकी पाइलट और रेस्क्यू टीम को CSIL डिवाइस से मदद मिली
03:08बेहत जोखिम भरे माहौल में पाइलट के रेस्क्यू उमपरेशन को अंजाम दिया गया
03:12रेस्क्यू के सफल होने के बाद अमेरकी राष्ट्रपती ने खुद इसकी जानकारी दी
03:16अपनी तकनीक और सेन्य ताकत के जरिये पाइलट को सुरक्षित निकाल कर
03:20अमेरिका ने इरान को एक मोर्चे पर बड़ी मात दे दी
03:23आज तक ब्यूरो
Comments