00:00It's time!
00:02It's time!
00:03It's time!
00:14Haryana की कुर्खशेतर का सारसा गाउं आज हेंडबॉल का गड़ बन चुका है
00:18सुभे की शुरुआत यहां मैदान में दोड़ते बच्चो, कसरत करते घिलाडियो और उनकी प्रैक्टीस से शुरू होती है
00:25शाम भी बच्चो की महनत और उनके पसीलें से गीली हो चुकी मिट्टी से होती
00:31इसका शुरे जाता है रिटाइड फोजी राजेंदर कुमार को
00:34जिन्होंने रूढिवादी सोच को तोड़ते हुए बच्चो के हाथ में बॉल थमा दे
01:01राजेंदर कुमार बच्चो को फ्री में कोचिंग देते हैं
01:03कभी 11 खिलाडियों के साथ उन्होंने सार्सा हेंडबॉल नर्सरी की शुरुआत की थी
01:08आज डेड़ सो के करीब खिलाडी मैदान पर दिन रात प्रैक्टिस करते हैं
01:14ये चार साल पहले हमने 11 बच्चों से सुरू की थी
01:17सुरू सुरू में तो थोड़ा ऐसे होता है
01:37हेंडबॉल कोच राजेंदर ने अकेली ही इस अकादमी की शुरूआत की थी
01:40उनकी स्पहल को देखते हुए उनके साथ ही रिटाइड आर्मी जवान
01:44और हेंडबॉल के खिलाडी संजे भी उनके साथ ही जुड़ गए
02:14शुरूआत में भी भावक इसके लिए तयार नहीं थे
02:16ज्यादा समस्या बेटियों को लेकर आई
02:19लोगोंने निकर में बेटियों को खेलने पर सवाल उठाए
02:22जब बेटियोंने मेडल जीतना शुरू किया तो सब के मुह बंद हो गए
02:26अब बेटिया भी यहां बिना किसी रोक टोक के प्रैक्टिस करती हैं
02:31बोला था सर लेकिन यह गाम में होता तो बहुत अच्छ होता गाम ऐसे बोलते घरबाडे लेकिन अब गाम में
02:38हमारे राजेंदर कोच ने बहुत अच्छी अकारड़ी मिनाई और हमें खेलने का एक होका दिया सर
03:06कोच राजेंदर को यह कादमी चलाते हुए चार साल हो गए है
03:09दो साल पहले हर्याना सरकार की खेल नीती के जरीए यहां नर्सरी स्थापित की गए
03:14अब यहां 25 खिलाड़ियों की डाइट और कुछ महिने के पैसे भी दिये जाते हैं
03:2021 बच्चे तो राजेस्तर पर मैडल भी जीत चुके हैं
03:23अब यह सिर्फ खेल अकादमी नहीं बलके उमीदों की फैक्टरी बन चुकी
03:28प्रुक्षेतर से मुनिश टूरन की रिपोर्ट ETV भर
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