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  • 3 hours ago
This Video about our old memories

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Transcript
00:00हम वो आखरी बेडी हैं जिनोंने गलियों में बच्पन गुजारा है
00:03वो बच्पन जो मुबाइल की स्क्रीन में नहीं मिट्टी में खेलता था
00:08जहां धूब भी अपनी लगती थी और गलियां भी अपनी होती थी
00:12हम वो बच्चे थे जो शाम होने से पहले ही घराने की आवाजें सुन लेते थे
00:17बस आखरी ओवर कहकर खेलते रहते और फिर डांट भी खाते थे
00:21कभी क्रिकेट, कभी गली डंडा और कभी छपन चुपाई
00:25वो खेल जो सिर्फ खेल नहीं थे, बलके यादें बन जाते थे
00:28हमारी खुशी किसी नोटिफिकेशन में नहीं, एक दूसरे के साथ होने में थी
00:34दोस दरवाजे पर आकर आवाज देते थे, चल बहार आजा
00:37और हम बगएर सोचे दौड पड़ते थे, ना कोई प्लान होता था, ना कोई टेंशन
00:42बस एक साधा सा बचपन था, और आज बच्चे गलीों में नहीं, स्क्रीन्स में खेलते हैं
00:48वो शोर, वो हसी, वो मासूमियत, सब कहीं पीछे रह गई है
00:55अगर आप भी इन गलीों में खेले हैं, तो एक बार आखें बंद करें, और वो बच्चपन याद करें
01:00क्योंके हम वाकई वो आखरी पेड़ी हैं, जिनोंने गलीों में बच्चपन गुजारा है
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