00:00जै जिनेंद्र आचार्य भगवन स्री पत्मसागर सुरिश्वर जी महराज साहिब
00:14गुजरात के गवर्नर आचार्य देवरत जी
00:22मुख्य मंत्री श्री पुपेंद्र भाई राज्य के उपमुख्य मंत्री
00:32बाय हर संग्वी जी परंपुज्य आचार्य भगवंत उझ्य सादू भगवन्त
00:44साद वीजी भगवन्त इस पवित्र सभा में उपस्तित
00:49समस्त आचार्यगंग और मुनि भगवन मान्य दानवीर विद्वजन देवी और सज्जनो आज भगवान महविर जैनती के पावन पर्वपर मुझे इस
01:14पवित्र जैन तिर्जाने का सौभाग्य मिला है
01:20सर्वप्रथम मैं भगवान महविर के चर्णों में प्रणाम करता हूँ
01:26मैं कोबा तीर्थ से सभी देश वास्यों को भगवान महविर जैनती की शुब कामनाई देता
01:41साथियों मैं आज परंपुज्य आचारिय स्री कैला सागर सुरिस्वल्ति महाराज साभ की सुनूति को भी बंदन करता हूँ
01:55उनके स्वप्न ने कोबा की इस धर्ति पर गिन्यान और स्रधा का यम्हान केंद्र स्थापित किया है
02:10कोबा तिर्थ की इस्थली आध्धात्विक शान्ति से ओत प्रोत है
02:18जिस्थान की उर्जा ऐसी अलोकिक हो जिसमें इतने जैन मुनियों की संतों की तपस्या जुड़ी हो
02:33वहां स्रिजन और सेवा ये अपने आप प्रस्फोटीत और संचालित होते है
02:46मैं तो बर्थों से देखता आया हूँ कि कोबा तिर्थ में कैसे अध्यान, साधना और सैयम की सतत परंपरा चलिया
03:00रही
03:02यहां मुल्यों का समरक्षन होता है, समस्कारों को संबल मिलता है और गिन्यान का पोशन होता है
03:12यह त्रिवेणी भारतिय सभ्यता का आधार है
03:20इस त्रिवेणी को अवीरल बनाए रखना यह हम सब का दाईत्व है
03:28साथियों, मुझे खुशी है कि हजारों वर्ष की भारतिय विरासत
03:37जैन धर्व का समयातित ग्यान
03:41हमारी धर्वहरे और उनसे मिलने वाली प्रेणाए
03:47उन्हें आने वाली सद्यों तक अमर बनाने के लिए
03:53उन्हें नए और आधुनिक रूप में अगली पीड़ी तक पहुचाने के लिए
04:00हमारे संतों ने इस जैन हेरिटेज मिज्यम के संकल्पना की
04:06आज वो संकल्पना एक भव्य रुप्मे साकार हो रही है
04:13यह समराट संप्रति संग्राल है
04:19जैन दर्शन भारतिय संस्कृति और हमारी प्राचीन दरोहर का एक पवित्र केंद्र बना है
04:28मैं इस अद्वितिय प्रयास के लिए
04:33हमारे सभी जैन मुईयों का संतों का अभिनंदन करता हूँ
04:39मैं उनके चरड़ों में प्रणाम करता हूँ
04:43ऐसे हजारों निष्ठावान लोग जिनोंने इस कारे में असिम योगदान दिया
04:52मैं उन सभी की भी सराना करता हूँ
04:56भायों बहनों जब हम अनादी ग्ञान को नई पीड़ी तक पहुचाने के लिए
05:06इनोवेशन करते हैं नयापन लाते हैं
05:11तो इसे हमारी विरासत भी समरुद्ध होती है और आने वाले कल को भी प्रेरणा मिलती है
05:22समराट संप्रती संग्राले ये भारत के कोटी कोटी लोगों की धरोहर है
05:30ये भारत के गवरवशाली अतीत की धरोहर है
05:36मैं इसके लिए सभी देश वाचियों को बहुत बहुत बधाई देता हूँ
05:43साथियों समराट संप्रती की ये केवल एक इतिहासिक राजा का नाम नहीं है
05:53समराट संप्रती एक ऐसे सेतु है जो भारत के दर्शन और व्यावार को जोडते हैं
06:04क्योंकि जब हम इतिहास में जौंकते हैं
06:07हम देखते हैं कि दुनिया की कई सभ्यताओं में महान विचारकों और दार्शिकों ने जन्म लिया
06:17मानवता के आदर्श भी अलग अलग परिभाशों में घड़े गए
06:24लेकिन जब सवाल सत्ता और शक्ति का आया कई शासकों ने आदर्शों और मुल्यों को किनारे कर दिया
06:37इसे विचार और व्यवार में विचार और व्यवस्ता में एक खाई पैदा होती चली गई
06:47लेकिन भारत में समराट संप्रति जैसे सासक हुए जो नहोंने सत्ता को सेवा और साधना मानकर काम किया
07:00जहां एक और कुछ शासकों ने हिंसा को हध्यार बना कर सासन किया
07:07वही समराट संप्रति ने सिहासन पर बैट कर अहिंसा का विस्तार किया
07:14उन्होंने सत्य, अस्ते और अब परिग्रह का प्रचार प्रसार किया
07:21इतनी निस्पृत्ता से
07:24इतने निस्वार्द भाव से
07:27शाहसन को सेवा का माध्यम मानकर जीवन जीना
07:31ये सीख हमें भारत के अतीद से ही मिलती है
07:36इसी अतीद को
07:38हम इस मुजियम में सहेच रहे हैं
07:42साथियों मैं देख रहा था
07:45इस मुजियम को डिजाइन पर ऐसे किया गया है
07:49इसमें हर कदम पर भव्य भारत की पहचान के दर्शन होते है
07:55इसकी साथ दिर्गाएं हर दिर्गा भारत की विवितता और सांसकुर्तिक संपनता का उद्गोश करती है
08:06प्रथम दिर्खा में हमें नवपद के दर्शन होते हैं नवपद यानि अरिहंत, सिद्ध, आचारिय, उपाध्याय और साधू
08:22सम्यक दर्शन, सम्यक ज्यान, सम्यक चरीत्र और सम्यक तब, अर्थाथ हम उनसे सिखें, जिनोंने स्वयम तब करके जीवन को जीना
08:41है
08:41और जो गिनान हम प्राप्त करें, वो सम्यक हो, हमारा चरीत्र सम्यक हो, क्योंकि ग्यान जब सम्यक होता है, तो
08:53वो समता और सेवा का आधार बनता है
08:56ताथियों, तीसरी दिर्गा में, हमारे तिर्थंकरों के जीवन को, उनके उपदेश्ण और प्रसंगों को, कलात्मक तरीकों से भी जीवन्त किया
09:10गया है
09:11बाईयों बहनों, इस मुजियम में, भारत की सबसे बड़ी विशिज्टा के, सबसे बड़ी ताकत के दर्शन होते हैं
09:23जैसा कि मैंने पहले भी जिक्र किया, हमारी ये ताकत है, भारत की विविदता
09:31और विविदता में एक्ता, दुनिया ने हमेशा मत, मधब और आस्था के नाम पर टकराव देखा है
09:43लेकिन इस मुजियम में, भारत के दुसरे सभी धर्मों के भी गवरवशाली दर्शन होते हैं
09:52वैदीक और बाउद परंपरा, बेद, पुराण, आवरवेद, योग, दर्शन, विबिन्न परंपराओं के सभी रंग
10:04एक साथ इंद्र धनूश की तरह उपस्तिद हो, ये भारत में ही हो सकता है
10:11साथियों, आज दुनिया में, जिस तरह के हालात हैं, जिस तरह विश्व, अस्तीरता और रसांती के आग में जुलस रहा
10:23है
10:23इस मुजियम की विरासत, इसका संदेश, केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी बानवता के लिए बहुत एहम है
10:34हमारा प्रयास होना चाहिए, दुनिया के देशों ते, यहां आने वाले जिग्यासू, स्टूडेंस, और रिसर्टर्स की संख्या और बड़े
10:48जो लोग यहां आये, वो भारत की जैन धर्म की सिक्षाओं को, विश्व के कौने कौने में पहुचाए
10:58साथियों, भारत में गिनान हमेशा से, एक मुक्त प्रवार रहा है
11:04हर यूग में, तिर्थंकरों और रुश्यों मनिश्यों का अवतार हुआ
11:10गिनान का संकलन बढ़ता चला गया, समय के साथ बहुत कुछ नया जुडता गया
11:18आप कलपरा करिए, एक समय हमारे तक्ष शिला, नालंदा जैसे विश्व विदाले, लाखों, ग्रंथों और पंडू लिप्यों से बड़े होते
11:32थे
11:32लेकिन विदेशी आकर्मनकारियों ने मजभ़भी संक्रिनता में ज्यान को भी अपना दुश्मन मानकर उन्हें जला दिया
11:44मानवता कि कितनी बड़ी धरोरे नस्ट हो गई
11:49उस मुश्चिल दौर में लोगों ने पीडी दर पीडी बची हुई पांडू लिप्यों को सहजा उनकी रक्ष सुरक्षा की
11:59आजादी के बाद उन्हें खोजना उन्हें सहजना ये देश की जिम्मेदारी होने चाहिए थी
12:09लेकिन दुर्भाग्य से गुलामी की मानसिक्ता के कारण इस और कोई ध्यान नहीं दिया गया
12:18आचार्य भगवन स्री पद्मसागर सुरिस्वर्जी महराज साब जैसे महान व्यक्तित्वों और संतों ने इसका महत्व समझा
12:31उन्होंने अपना पूरा जीवन इसके लिए समर्पित किया जीवन के साड़ साल गाउ गाउ शहर शहर देश के कोने कोने
12:45से उन्होंने मैनिस्क्रिप्ट को खोजा
12:48ऐसी तील लास से अधुक पंडुलिप्या ताड़ पत्र भोज़ पत्र परंकीत शैकडो साल पुराना वो ग्णान आज कोबा में सुरक्षित
13:03और संकलित हुआ है
13:05ये भारत के अतीत की भारत के वर्तमान की और हमारे भविश्य की बहुत बड़ी सेवा है
13:14साथियों पुरानी सरकानों ने पंडुलिप्यों की उपेक्षा करके जो गल्ती की थी आज हम उसका सुधार कर रहे हैं
13:28हमने इसके लिए गिन्यान भारतम मिशन सुरू किया है
13:35हम टेकनलोजी का इस्तेमाल कर रहे हैं इस मीशन के तहर प्राचिन पांडुलिप्यों का
13:44डिजिटाइजेशन किया जा रहा है उनका वेगिनानिक तरीके से सवरक्षन हो रहा है
14:01इसी रविवार को मन की बात में मैंने विस्तार से जिक्र किया है
14:07कि कैसे इस दिशा में एक सर्वे भी शुरू किया गया है
14:12इसमें देश बर से लोग अपने पास समरक्षित पांडुलिप्यों को अपलोड कर रहे है
14:19इस अभियान देश के कौने कौने में बिखरी पांडुलिप्यों को एकत निच करने में बड़ी भूमी का निभायेगा
14:29साथियों सरकार के स्तर पर गिन्यान भारतम मिशन और कोबा तिर्जका और साधारन योगदान
14:39समाज और सरकार के इस साजा प्रयास भारत के नए सांसकृति अभ्युदाई का प्रतिक भी है
14:51साथियों आदेश के कल्चरल हेरिटेज को सहज ने विश्व के सामने लाने के प्रयास हर सर पर हो रहे हैं
15:01पांडुलिप्या और गिन्यान दरोर के सवरक्षा का कारियत हो ही रहा है
15:07इसके साथ साथ प्राचिन मंदिरों का पनरुदार तीर्थ छेत्रों का विकास
15:16एकिहासिक थलों का विकास आईरवेद और योग का प्रचार प्रसार हर स्तर पर इस दिशा में काम हो रहा है
15:27यहां गुजरात में ही लोथल में विशाल मेरिटाइम मुजियम बन रहा है
15:36और यह दुनिया का सबसे बड़ा मेरिटाइम मुजियम बनने जा रहा है
15:41यहां से 70-80 किलोमेटर दूरी पर है
15:43उधर बढ़नेगर में एक बहुत बड़ा मुजियम बना है
15:50वो दुनिया के अच्छे मुजियम है में उसकी जगा बन चुकी है
15:54दिल्ली में यूगे-यूगेन भारत मुजियम बनाने की भी तैयारी है
16:00आज पहली बार आजाजी की लड़ाई के इतिहास को भी समगर रूप में सामने लाने के लिए सार्थक कार्य हुए
16:11है
16:11आपको याद होगा पहले ये काम राजनेतिक चस्पे से होते से
16:18एक राजनेतिक परिवार का नेरेटिव कैसे सैट हो
16:23वोट बेंक के हिसाब से बाते कैसे बोली जाएं सब कुछ इसी के इर्दिगिर गुमता था
16:30हमने इस मानसिक्ता को समाप्त किया है
16:34हम सबका साथ सबका विकास के मंत्र के साथ चल रहे हैं
16:39यही मंत्र विक्सित भारत के वीजन की आप्मा है
16:44साथियों आप सभी संतगा भारत की विरासत तो संजोने का इस्तना महान प्रयास कर रहे हैं
16:54हम व्यक्तिकत आकांचा से उपर उठकर
16:56समाज और रास के लच्छों के लिए काम करते हैं
17:02तो देश के विकास को गती और मिल जाती है
17:06इसी भावना के साथ मैं नवकार महामंतर दीवस पर दिल्ली में हुए कारकम्य भी शामिल हुआ था
17:15इस आयोजन में चारों फिरके एक साथ जुटे थे
17:22उस एक्तिहासिक अउसर पर मैंने नव आगर किये थे
17:29नव संकल्प की बात की थी
17:32और जिसका उलेक अभी भी हमारे मुक्मंतरी भुपंद्रभाई ने भी किया
17:38मैं हर बार आपके सामने वो नव संकल्प जरूर दोहराता हूँ
17:44आज का यह उसर उन्हें फिर से दोहराने का भी है
17:49पहला संकल्प पानी बचाने का संकल्प
17:55दूसरा संकल्प एक पैड मा के नाम
17:59तीसरा संकल्प स्वच्छता का मिशन
18:03चौथा संकल्प वोकल फोर लोकल
18:07पाँचमा संकल्प देश दर्शन
18:11छट्था संकल्प नेचरल फार्मिंग को अपनाना
18:16सात्वा संकल्प हेल्दी लाइफस्टाइल को अपनाना
18:21आठवा संकल्प है योग और खेल को जीवन में लाना
18:26नवा संकल्प है गरीबों की सहायता का संकल्प और दस्वा संकल्प आप सभी ने स्वयम से जोड़ लिया है और
18:39वो है भारत की विरासत का सवरक्षण
18:44आज का ये कारकम इसी का प्रतिमीम है साथ यों आने वाले समय में हमारे सामने बड़े लक्ष है हमें
18:56बड़े संकल्पों को पूरा कर रहा है हमारी एक्ता हमारे सांसकुर्थिक संबल ही इसमें हमारी ताकत बनेगा
19:06मुझे विश्वाथ है कि समराट संप्रति मुजियम आने वाले समय में इस दिशा में एक महत्वपों भूमी का निभाएगा
19:19यह ज्ञान साधना और संस्कृति का एक ऐसा केंद्र बनेगा जहां से नई पीड़ी को प्रेणा मिलेगी और समाज को
19:32एक नई उर्जा मिलेगी
19:33इसी विश्वाथ के साथ मैं आप सभी को इस महत्वपों कारे के लिए एक बार फिर से बहुत बहुत बढ़ाई
19:44देता हूँ
19:45अन्य साथे साथे बढ़ाने आगर अपन करूश हूँ
19:52के मारा साहे बदा बदू करियू पर आपने जोवानोय टाइम ना आप ये केम चाले है बदूमा बदू लोकोई आवे
20:04अन्य जोईने जतारे उन्याई जानवानी कोशिस करे
20:11समझवानी कोशिस करे अएक अमूल्य खजानों छे अन्य वो इच्छू के गुजरात मा दर एक पीडी ना लोकोई परिवार साथे
20:26ही आवे
20:28एन्य मन भरी ने जुवे गिन्यान अन्य महान विरासत्तों गव्रव करे अन्य मारे माटे आजे महवेर जैन्ती अनेक रिते शूब
20:44से
20:45कारण के यहां गांदिनेकर मा आवतानी साते गुजराती दर्ती पर पर मुपतानी साते पहलो कारिकम जडो थी जोडावानू जड से
20:59जुड़ना
21:01अने इती अमना सानन जाऊचु त्या बीजो कारिकम जडो जगत से जुड़ना
21:11अईया महान सांस्कुर्दिक परंपराओ भव्य भुत्कार एनी साथे आचमन लिदू अने सानन मा जैने विश्वनी आधुत्न जनिकमा आधुनिक टेक्नोलोजी
21:26चीपस्णा निर्बार दूद्गाटन थही देःुचे सेमीकंडक्टन थुद्गाटन थेःुचे
21:32अईया जडो थी जड़ावानू क्या हां थी जगने जड़ोवानू अनि या बदु गुजरातनी धरती पर थे देः थे बवचे भारतनी
21:42धरती पर थे रे हूचे
21:44आप सवने खुब खुब खुब कामना हो, खुब खुब धन्यवाद, जाए जिने इंद्रा, जाए जिने इंद्रा.
Comments