00:00एक लवे कांग उठा काट लिया, बोलो क्यों? शिश्य मोह, कि ये तो आगे निकल जायागा मेरे अरजुन से, वो
00:06आगे निकला जा रहा था, वो भी बिना आपचारिक प्रशिक्षन के, जैसे मुझसे पूछते हैं तुम्हारा गुरू कौन है, उसने
00:14भी खुदी कर्मा रहा
00:15गलती बिचारे से बस ये हो गई कि बताने चला गया कि मैंने सब सीख लिया और इतना बढ़िया सीख
00:19लिया है, बोले अच्छा कैसे सीखा, बोले आपकी बस एक प्रतिमा लगा रखी थी, बोले तो फिर तो मैं ही
00:25गुरू हूँ, लाओ दक्षिना दो, अब महाभारत होगी
00:31देह बड़ी है, क्षमता, काबिलियत, बोध ये सब बात की बाते हैं, विदुर की कोई सुनने को नहीं तयार है,
00:38प्योंकि उनको बोल दिया ये तो दासी से पैदा हुए, ये आ गई न वड़ोय अस था, जाते खड़ी होगी
00:43न, तो जहाते खड़ी होगी वहाँ भारत भी
00:46होगी, अध्यात में योई नहीं होता है, जब अध्यात में नहीं होता तो महाभारत होती है, फिर ब्रहमास्त्र चलते हैं,
00:54फिर महाप्रलय होती है, फिर पूरा देख्ष मिटे जाता है
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