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पूरा वीडियो: इस रिश्ते में हिचक क्यों ? || आचार्य प्रशांत (2024)

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Transcript
00:00बापों की तो बहुत दुर्दशा है, इसमें तो कोई शक में है
00:02यहाँ जो बेटे बैठे हों बता हैं उन्होंने बाप से आखरी बार कब दिल की बाद करी थी?
00:07नहीं करते हैं
00:08पुरुशों को तो मतलब ऐसा बना दिया है
00:11कि उनको किसी तरह के इस नहीं है कि इस परश की जरूरत ही नहीं होती
00:14लड़का भी जब किसी प्रकार की भावनात्मा की स्थिते में होता है
00:18तो फून पता कि इसको मिलाता है?
00:20अम्मा को
00:21बाप को नहीं मिलाता
00:22हम यह नहीं दिखाई देता
00:24कि रात में 11-12 बजे, 1 बजे
00:26एक बाप बेटा बाहर सड़क पर टहल रहे हैं एक साथ
00:31और धीरे-धीरे कुछ बात कर रहे है
00:33उनकेंगे ऐसे तो प्रेमी लोग आपस में बात करते हैं
00:36बाप बेटा थोड़ी करेंगे
00:38क्यों, बाप बेटा एक दूसरे के दुश्मन है
00:40प्रेमी नहीं हो सकते
00:42लड़के का किस से चक्कर चल रहा है
00:44बाप को गर सूहना है
00:46तो जाके लड़के के दोस्तों से पूछता है
00:48पर हो नहीं सकता कि लड़का खुद आये
00:50बोले, डैड, कैसी लगी है
00:53बाई
00:58किरदारों में कैद संबंद
00:59इंदुस्तानी लोग है भाई
01:01हमारे पास बड़े बड़े आदर्श है
01:03बाप बेटे के, रिष्टे के
01:04राम और दशरत का देश है ये
01:08भीश्म का देश है ये
01:09पिता की खाते कितनी बड़ी
01:11उसने पतिग्या कर ली
01:12हमें पहले ही पता है कि
01:13बाप बेटे का रिष्टा कैसा होना चाहिए
01:15फिर हम सोचते हैं
01:17पुरुष महिलाओं से पात साल पहले क्यों मर जाते हैं
01:20मैं पूछ रहा हूँ जीए गाहे के लिए
01:21गाहे के लिए जीए
01:24वो भीतर से खोखला हो चुका होता है
01:26हमारे उत्तर मद्ध भारत में तो बेटा अधिक से अधिक बाप पचरन सपरश कर सकता है
01:31गले लगाने के हमारी नहीं परंपरा
01:34अब उल्लंगन करिये गले लगाने के लिए
01:36और लजाईए गाने नहीं
01:38गाली थुड़ी देने जा रहे हो
01:39गल्ले लगाने जा रहे हुँ नहीं क्या संकोच है
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